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#Quoraflix का मिशन दुनिया के ज्ञान को साझा करना और बढ़ाना है। ज्ञान की एक विशाल सम्पदा जो कई लोगों के लिए मूल्यवान होगी वर्तमान में केवल कुछ के लिए उपलब्ध है - या तो लोगों के मस्तिष्क में बंद है, या क... more
FAQs about Quoraflix:How many episodes does Quoraflix have?The podcast currently has 317 episodes available.
January 29, 2021India's first English Newspaper Hicky’s Bengal GazetteIndia's first English Newspaper Hicky’s Bengal Gazette 242 साल पहले पब्लिश हुआ था भारत का पहला अखबार ‘बंगाल गजट’, 3 साल बाद ब्रिटिश सरकार ने कर दिया था बैन...more3minPlay
January 28, 2021Lala Lajpat Rai After killing his killer, Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev got hangedLala Lajpat Rai After killing his killer, Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev got hanged जिनके हत्यारे को मारने के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को मिली फांसी...more3minPlay
January 27, 2021141-year Story of Electric Bulb, Thomas Alva Edison Patented on 27 January 1880141-year Story of Electric Bulb, Thomas Alva Edison Patented on 27 January 1880. इलेक्ट्रिक बल्ब की 141 साल की कहानी; थॉमस अल्वा एडिसन के नाम हुआ था पेटेंट...more3minPlay
January 25, 202126 January Republic Day facts and history26 January Republic Day: 18 साल तक 26 जनवरी को मनाया गया स्वतंत्रता दिवस, जानिए पूरी कहानी...more3minPlay
January 25, 2021National Voter's Day 2021National Voter's Day 2021 राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की याद दिलाने का दिन...more3minPlay
January 24, 2021National Girl Child DayNational Girl Child Day - राष्ट्रीय बालिका दिवस बेटियों के बढ़ते कदमों ने नाप लिए हैं जल, थल और आकाश हर साल भारत में 24 जनवरी को नेशनल गर्ल चाइल्ड डे मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2008 में महिला और बाल विकास मंत्रालय ने की थी। इस दिन को मनाने के उद्देश्य देश में बालिकाओं के साथ होने वाले भेदभाव के प्रति लोगों को जागरुक करना है। 2008 से यह दिन पूरे देश में मनाया जाने लगा। एक तरफ हमारे देश में जहां महिलाओं को देवियों का दर्जा दिया जाता है. वहीं कहीं ना कहीं लड़कियों के साथ भेदभाव और मूलभूत अधिकारों से वंचित भी रखा जाता रहा है. चाहे वो शिक्षा का अधिकार हो या फिर सुरक्षा या सम्मान. हालांकि मौजूदा समय में हालात और लोगों की सोच बदली है. आज बेटियां और महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं. देश बेटियों की गर्वीली मिसालों से गदगद है।...more4minPlay
January 23, 2021Subhash Chandra Bose Death MysterySubhash Chandra Bose Death Mystery 75 साल बाद भी रहस्य बनी हुई है नेताजी की मौत, जिस प्लेन क्रैश में निधन की बात उसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं...more3minPlay
January 22, 2021Subhas Chandra Bose JayantiSubhas Chandra Bose JayantiParakram Diwas नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नाम से भला कौन परिचित नहीं है। देश ही नहीं दुनिया के सभी देशों में उनकी पहचान एक निडर फौजी और देशभक्त व्यक्ति और नेता के तौर पर की जाती है। नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। हालांकि उनकी मौत पर से पर्दा आज तक नहीं उठ सका। उनके निधन को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आती रही हैं। नेताजी भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में शामिल होने वाले अग्रणी नेताओं में से एक थे। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने और भारत को आजादी दिलाने के मकसद से आजाद हिंद फौज का गठन किया था। उस वक्त उन्होंने नारा दिया था तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। इसका सीधा सा अर्थ था कि देश की आजादी को उस पर न्यौछावर होने वाले लोग चाहिएं, तभी आजादी के दर्शन हो सकेंगे। उनके इस नारे के बाद हजारों की संख्या में लोग उनसे जुड़े थे।...more4minPlay
January 22, 2021Bloody Sunday 22 January 1905Bloody Sunday22 January 1905 बात 20वीं सदी के पहले दशक की है। रूस में जार निकोलस द्वितीय का शासन था। लोगों में जार के शासन के खिलाफ गुस्सा था। मजदूरों की स्थिति खराब थी। 22 जनवरी 1905, दिन रविवार को मजदूरी की स्थिति और काम के घंटे जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हो रहा था। प्रदर्शनकारी सेंट पीटर्सबर्ग के विंटर पैलेस की तरफ बढ़ रहे थे। ये लोग जार निकोलस से मिलकर अपनी बात पहुंचाना चाहते थे। लेकिन, जार के पास पहुंचने से पहले ही उसके सैनिकों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसा दीं। इस घटना में 500 से ज्यादा लोग मारे गए।...more2minPlay
January 21, 2021Rash Behari Bose BiographyRash Behari Bose Biography उनका जन्म 25 मई, 1886 को बंगाल के वर्धमान जिले के सुभलदा गांव में हुआ था। उन्होंने चांदनगर से अपनी पढ़ाई की। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम, गदर आंदोलन और आजाद हिंद फौज के गठन में अहम भूमिका निभाई। स्कूल के दिनों से ही वह क्रांतिकारी गतिविधियों की ओर आकर्षित थे। बहु ही कम उम्र में उन्होंने क्रूड बम बनाना सीख लिया था। बंकिम चंद्र के उपन्यास आनंद मठ से उनके अंदर क्रांति का जज्बा पैदा हुआ था। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद और सुरेंद्रनाथ बनर्जी के राष्ट्रवादी भाषणों से उनके अंदर क्रांति की ज्वाला और तेज जलने लगी।...more3minPlay
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