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मैं बॅॉके की बॉंकी बन गयी
स्वर सेवा: दासी अंजुना जी
बाँके पी से.....
मैं बाँके की बाँकी बन गई
बाँका बन गया मेरा
बड़े भाग्य से मिले रंगीले-
बाँके रसिक बिहारी
परम् सुहाग ..सौन्दर्य सींव वे-
अद्भुत प्रेम पुजारी!
श्यामल घन की नित्य चातकी..
उनसे सर्वस्व मेरा
मैं बाँके की बाँकी बन गई
बाँका बन गया मेरा
मेरी उनकी प्रीत पुरानी
जन्म-जन्म की दासी
उन्हीं में नित जीती बसती,
फिर भी रहती प्यासी?
प्यास उसी चिर संगी की
वह नित्य अभीप्सत मेरा!
मैं बाँके की बाँकी बन गई
बाँका बन गया मेरा
"अग-जग", "इह-पर",
बलि हो गए-
उन पर ही अनजाने
मैं अनजान...सदा सब जानें-
प्रीतम परम् सयाने
अपनी मंगल कृपा कोर से
कर्ष लिया सब मेरा!
मैं बाँके की बाँकी बन गई
बाँका बन गया मेरा
सौ मेघा ताई बांभोरीकर
महालक्ष्मी अष्टक-:
*श्री गणेशाय नमः। इंद्र उवाच।*
*नमस्तेस्तु महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते । शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते ॥१॥*
*नमस्ते गरुडारुढे कोलासुरभयंकरी । सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते ॥२॥*
*सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरी । सर्वदुःखहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते ॥३॥*
*सिद्धिबुद्धिप्रदे देवी भुक्तीमुक्तीप्रदायिनी । मंत्रमुर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते ॥४॥*
आद्यंतरहिते देवी आद्यशक्ती महेश्वरी ।योगजे योगसंभूते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ५ ॥
स्थूल सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ती महोदरे ।महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ६ ॥
पद्मासनस्थिते देवी परब्रम्हस्वरूपिणी ।परमेशि जगन्मातर्र महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥७॥
श्वेतांबरधरे देवी नानालंकार भूषिते ।जगत्स्थिते जगन्मार्त महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥८॥
महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं यः पठेत् भक्तिमान्नरः ।सर्वसिद्धीमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥९॥
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनं ।द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्य समन्वितः ॥१०॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रूविनाशनं ।महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥
॥ इतिंद्रकृत श्रीमहालक्ष्म्यष्टकस्तवः संपूर्णः ॥
- अथ श्री इंद्रकृत श्री महालक्ष्मी अष्टक
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राम कुटी पॉडकॉस्ट विविध प्रकारचे स्तोत्र साठी आहे ही स्तोत्रे राम रक्षा व्हाट्सअप ग्रुप मधील साधकांच्या आवाजात आहे. फॉलो करा रामकुटी https://whatsapp.com/channel/0029Va4zngu6WaKiIdZ8kH0b