स्वर सौ.निवेदिता डंभारे
या कुन्देन्दु-तुषार-हार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता।या वीणा-वर-दण्ड-मण्डित-करा या श्वेत-पद्मासना॥या ब्रह्माच्युत-शंकर-प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष-जाड्यापहा॥🌸*अर्थात*🌸जो कुंद पुष्प, चन्द्रमा और हिमहार के समान श्वेत हैं,जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और जिनके हाथों में वीणा शोभित है,जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं और ब्रह्मा, विष्णु एवं महादेव द्वारा वन्दित हैं—वे भगवती माँ सरस्वती मेरी रक्षा करें और मेरे अज्ञान को पूर्णतः दूर करें।🌼*आपको वसंत पंचमी एवं सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।*🌼*हरे कृष्ण*🦚हरे राम 🪷