Sign up to save your podcastsEmail addressPasswordRegisterOrContinue with GoogleAlready have an account? Log in here.
September 30, 2021वो भी हैं मेरे अपने जो रुठ गये हैंरिश्तों के झंझावात में अपनापन को बरक़रार रखने के जज़्बात को जगाती एक अनोखी रचना3 minPlay
September 28, 2021आसमाँ को चीर गई चीखें चीत्कार कीबलात्कार के पीड़िता की दु:ख भरी ज़िन्दगी को प्रतिबिम्बित करती एक अविस्मरणीय कविता3 minPlay
September 26, 2021कभी बाहों के झूलों में झुलाया था तुमकोएक पिता अपने बेटे को याद कर बिलखता हुआ :5 minPlay