
Sign up to save your podcasts
Or


अध्याय तृतीय एवं चतुर्थ - साध्य- साधन आदिका विचार तथा श्रवण, कीर्तन और मनन - इन तीन साधनों की श्रेष्ठताका प्रतिपादन |
Our Podcast is also available on:
1. YouTube
2. Facebook
3. Google Podcasts
4. Spotify
5. Radio Public
6. Breaker
7. Pocket Casts
विद्येश्वर संहिता
प्रथम अध्याय - प्रयाग में सूतजी से मुनियोंका तुरंत पापनाश करनेवाले साधनके विषय में प्रशन |
द्वितीय अध्याय - शिवपुराण का परिचय |
Our Podcast is also available on:
1. YouTube
2. Facebook
3. Google Podcasts
4. Spotify
5. Radio Public
6. Breaker
7. Pocket Casts
छठा और सातवाँ अध्याय : शिवपुराण के श्रवण की विधि तथा श्रोताओं के पालन करने योग्य नियमों का वर्णन
#ShivPuran #ShivPuranWithAbhijitSharmaa #YogicSwadhyayam #AbhijitSharmaa #AbhijitSchoolOfDevelopment
Our Podcast is also available on:
1. YouTube
2. Facebook
3. Google Podcasts
4. Spotify
5. Radio Public
6. Breaker
7. Pocket Casts
पांचवां अध्याय - चंचुलेके प्रयत्न से पार्वती जी की आज्ञा पाकर तुम्बरू का विंध्य पर्वत पर शिव पुराण की कथा सुनाकर बिंदुगका पिशाचयोनि से उद्धार करना तथा उन दोनों दम्पति का शिवधाम में सुखी होना |
#ShivPuran #abhijitsharmaa #YogicSwadhyayam #AbhijitSchoolOfDevelopment
Our Podcast is also available on:
1. YouTube
2. Facebook
3. Google Podcasts
4. Spotify
5. Radio Public
6. Breaker
7. Pocket Casts
#शिव_पुराण, अभिजीत के साथ एपिसोड 2 || #ShivPuran with Abhijit Episode #2
1. द्वितीय + तृतीय अध्याय - शिव पुराण के श्रवण से देवराजको शिवलोक की प्राप्ति तथा चंचुलाका पापसे भय ऐवम संसारसे वैराग्य |
2. चतुर्थ अध्याय - चंचुलाकी प्रथना से ब्राह्मण का उसे पूरा शिवापुराण सुनाना और समयानुसार शरीर छोड़कर शिवलोक में जा चांचुला का पार्वती जी की सखी एवं सुखी होना |
शिव पुराण
1. प्रथम अध्याय - शिव पुराण महात्म्य - शौनकजी के साधनविषयक प्रश्न करने पर सूतजी का उन्हें शिव पुराण की उत्कृष्ट महिमा सुनाना |
2. द्वितीय अध्याय - शिव पुराण के श्रवण से देवराजको शिवलोक की प्राप्ति तथा चंचुलाका पापसे भय ऐवम संसारसे वैराग्य |
राई का पहाड़" बनाने वाली कहावत तो हम सबने सुनी ही होगी. इसका कारण होता है, की हर व्यक्ति का किसी भी विचार को समझने का और उस विचार को समझ कर फिर आगे किसी और व्यक्ति को समझाने का तरीक़ा अलग-अलग होता है | इसके लिए कई कारण होते हैं, जैसे की उस व्यक्ति के मन-मस्तिष्क में उस विचार को सुनते समय अन्य किस प्रकार के विचार चल रहे हैं, उस व्यक्ति की उस भाषा पर पकड़ कितनी मज़बूत या कमज़ोर है इत्यादि-इत्यादि | यही कारण है की कुछ समय बाद कुछ लोगों के माध्यम से प्रचारित होते-होते वह विचार अपना मुख्य रूप खो देता है और उस मुख्य विचार से भिन्न ही, कोई अलग विचार उस मुख्य विचार के नाम पर प्रसारित होता रहता है. विचारों के इस गलत प्रचार से हमारे धर्म-ग्रन्थ भी अछूते नहीं बचे हैं इसी कारण से प्रेरित हो, अपने धर्म-ग्रंथों को यथार्थ आप सब तक पहुँचाने के उद्देश्य से ही इस पॉडकास्ट का विचार मेरे मन में आया और अब आप सब की सहायता से मैं इसे करने की कोशिश कर रहा हूँ.
आइए हम एक साथ सुनें और सुनाएँ।
महा मंत्र "ॐ नमः शिवायः" का 108 बार जप करें|
आइए हम एक साथ सुनें और सुनाएँ।
प्रणव मंत्र ॐ का 108 बार जप करें.
From the publisher's feed

0 Listeners