शिव पुराण - द्वितीय संहिता - रूद्र संहिता - द्वितीय खंड - सती खंड
अध्याय ३३ - ३४ : प्रमथगणों सहित वीरभद्र और महाकाली का दक्षयज्ञ-विध्वंस के लिए प्रस्थान, दक्ष तथा देवताओं को अपशकुन एवं उत्पातसूचक लक्षणों का दर्शन एवं भय होना।
Chapter 33 - 34: Virabhadra and Mahakali along with Pramathganas leave for Dakshayagya-destruction, Daksha and the deities seeing ominous and ominous symptoms and fear.
अध्याय ३५ : दक्षके यज्ञकी रक्षाके लिए भगवान् विष्णुसे प्रार्थना, भगवान का शिवद्रोहजनित संकट को टालने में अपनी असमर्थता बताते हुए दक्ष को समझाना तथा सेना सहित वीरभद्र का आगमन
Chapter 35: Prayer to Lord Vishnu to protect Daksha's Yagya, Lord explaining to Daksha his inability to avert the danger created by Shiva's rebellion and the arrival of Virabhadra with the army
अध्याय ३६ - ३७ : देवताओं का पलायन, इंद्र आदिके पूछनेपर बृहस्पति का रुद्रदेव की अजेयता बताना, वीरभद्रका देवताओंको युद्ध के लिए ललकारना, श्री विष्णु और वीरभद्र की बातचीत तथा विष्णु आदिका अपने लोकमें जाना एवं दक्ष और यज्ञका विनाश करके वीरभद्र का कैलास को लौटना।
Chapter 36 - 37 : Escape of the Gods, Brihaspati tells the invincibility of Rudradev when asked by Indra etc., Virabhadra challenges the gods to fight, conversation between Shri Vishnu and Virbhadra and Vishnu etc. going to his world and Virabhadra returning to Kailasa after destroying Daksha and Yagya
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