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उस परोपकारी हंस को एक ऎसे अपराध के लिए अपनी जान गंवानी पड़ी, जो उसने किया ही नहीं था। उसकी भूल तो बस इतनी थी कि उसने उस दुष्ट कौए पर विश्वास कर उस से दोस्ती की थी। अतः दुष्ट और धूर्त के साथ रहने से सदा बचना चाहिए।
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