ये कहानी मर्द जाति की चंचलता का व्याख्यान है। और नारी के सतीत्व ओर ममत्त्व को इस कहानी मैं बड़ी सरलता से दिखाया गया है। कहानी मे देखने को मिलेगा के किस तरह मनुष्य जवानी मैं नई नई तितलियों के पीछे अपने गृहस्थ जीवन मे आग लगा लेता है।और जब सब उसे छोडकर चली जाती है तो फिर अपनी उसी पत्नी के पास आता है जिसे कभी वो दूसरो के लिए छोड़ चुका था। और स्त्री अपनी सरल और छमशील स्वभाव वस उसे फिर माफ जर देती है।