सुनो कहानी

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By डॉ .स्वाति तिवारीArtsBooks
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सुनो कहानी episodes

  • कहानी 'वो जो भी है, मुझे पसंद है' - स्वाति तिवारी | Hindi Kahani by Swati Tiwari

     कहानियाँ रिश्तों की 

    "तो क्या कहूँ?" मेरे अंदर शब्द लिसलिसे से हो आए थे, कुछ सूझ ही नहीं रहा था उसके तर्क को नकारने के लिए ऊपर से गुस्सा आ रहा था मन कर रहा था एक जोरदार थप्पड़ जड़ दूँ उसके गाल पर।

    "मेम आप तो सिंगमंड फ्रायड को पढ़ती रही है न, आपने ही एक बार फ्रायड को पढाते हुए समझाया था ना? आप तो मनोविज्ञान की टीचर हैं। मेम मुझे लगता है फ्रायड ठीक ही कहते रहे हैं यह विकृति (परवरसन) नहीं यह उलटाव (इनवरसन) है वे इसे बीमारी विमारी नहीं मानते?"

    "फ्रायड सिर्फ पढने ने और समझने के मनोवैज्ञानिक है पगली, जीवन में उतारने के नहीं। तुम समझ क्यों नहीं रही मेरा मतलब?"

    28 min
  • रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी. कहानी-"काबुलीवाला"/ बान्ग्ला कहानी
    "काबुलीवाला"  1892 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित  एक बंगाली कहानी है. मानवीय संबंधों पर आधारित एक मर्मस्पर्शी कहानी है। इस कहानी में पिता-पुत्री के प्रगाढ़ संबंधों को दर्शाया गया है। इसके अलावा कहानी की एक मुख्य पात्र बच्ची ‘मिनी’ एवं ‘काबुलीवाला’ के बीच आत्मीय संबंधों को भी दर्शाया गया है। मिनी के प्रति उसके पिता का अपार स्नेह है और काबुली वाला के साथ मिनी के आत्मीय संबंधों का गहन चित्रण इस कहानी के माध्यम से किया गया है। काबुलीवाला एक अफगानी व्यक्ति है जो अपने देश अफगानिस्तान से दूर भारत में रोजी-रोटी कमाने के लिए आया है। वह सूखे मेवे बेचने का काम करता है। उसे अपने परिवार से दूर होने का दुख है। उसकी बेटी की आयु भी मिनी की आयु के समान है, इसलिए उसे मिनी से लगाव हो जाता है। वह मिनी में अपनी बेटी की छवि पाने की कोशिश करता है। । इस तरह काबुलीवाला कहानी मानवीय संबंधों के अलग-अलग पहलुओं को उजागर करती है।काबुलीवाला एक पठान है और मिनी एक हिन्दू परिवार से संबंधित है। दोनों के मध्य उत्पन्न स्नेह में धर्म की दीवार का नामोनिशान नहीं है। काबुलीवाला मिनी से ही अपनी पुत्री के स्नेह की पूर्ति करता है.यह कहानी मन के किसी कोने में अपनी गहरी छाप छोड़ देती है
    25 min
  • Episod-4 कहानी-पुर्जा भाषा : स्वीडिश. लेखक- ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग कहानी पाठ- डॉ स्वाति तिवारी

     Episod-4

    कहानी-पुर्जा

    भाषा : स्वीडिश. 

     लेखक- ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग

    अनुवाद - विजय शर्म
    कहानी पाठ- डॉ स्वाति तिवारी

     लेखक- ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग एक स्वीडिश नाटककार, उपन्यासकार, कवि, निबंधकार और चित्रकार। स्वीडन में, स्ट्रिंडबर्ग को एक निबंधकार, चित्रकार, कवि और विशेष रूप से एक उपन्यासकार और नाटककार के रूप में जाना जाता है, लेकिन अन्य देशों में उन्हें ज्यादातर नाटककार के रूप में जाना जाता है।

    मुख्य कृतियाँ

    नाटक : मास्टर ओलोफ, द फादर (पिता), मिस जूलिया, क्रेडिटर्स (जिनका पैसा बकाया है) द डांस ऑफ डेथ (मृत्यु का नाच) आदि 60 नाटक

    उपन्यास : अलोन (एकाकी), द रेड रूम (लाल कमरा),  बाइ द ओपेन सी (खुले सागर के किनारे) आदि 30 से ज्यादा उपन्यास
    कहानी संग्रह : गेटिंग मैरिड (शादी करना), यूटोपियाज इन रियलिटी (वास्तविकताओं में स्वप्नलोक)
    आत्मकथा : द सन ऑफ अ सर्वेंट (नौकर का बेटा)
    निबंध : ऑन साइकिक मर्डर (मानसिक मृत्यु के बारे में)


    8 min
  • Episod-3 अनूदित अमेरिकी कहानी - पुल पर बैठा बूढ़ा -- मूल कथा : अर्नेस्ट हेमिंग्वे -- अनुवाद : सुशांत...aawaj-swati tiwari
    ये कहानी दूसरे विश्व युद्ध के समय की घटना   है जब जर्मनी की फौजें यूरोप के बहुत से देशों पर आक्रमण करके स्थानीय लोगों को या तो मार रही थी या बंदी बना रही थी.अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने लिखा है कि लेखन के आरंभिक दौर में उन्हें यह सूझा कि कहानी लिखते हुए मुख्य घटना का वर्णन छोड़ देना चाहिए। उसे लिखना नहीं चाहिए। बाद में आलोचकों ने उनकी इस तकनीक हिडेन फैक्ट के नाम से जाना। ।
    अर्नेस्ट हेमिंग्वे  (1899-1961) अमेरिकन उपन्यासकार तथा कहानीकार थे। 1954 ई० में साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता।1950 ई० में प्रकाशित 'अक्रॉस द रिवर एंड इन टू द ट्रीज़' में उन्होंने मृत्यु का वर्णन कर अपनी ही मृत्यु की कल्पना की है। यह पुस्तक भी बेस्टसेलर सिद्ध हुई थी। 1954 में उनकी संसार प्रसिद्ध रचना दि ओल्ड मैन एंड द सी (बूढ़ा मछुआरा और समुद्र) प्रकाशित हुई और इसी रचना पर उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।[5] हेमिंग्वे की इस रचना को न केवल उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना घोषित किया गया है बल्कि इस रचना में वर्णित बूढ़े मछुआरे की जिजीविषा एवं संघर्ष अपने आप में प्रेरणा के एक प्रतीक का रूप ले चुका है। सामान्य व्यक्ति से लेकर रचनाकारों तक ने इस रचना से प्रेरणा ली है तथा उस रचनात्मक प्रतीक का उपयोग भी किया है
    8 min
  • Episode 1 - अंतोन चेखव :: :: :: दुख :: कहानी

    कहानी पाठ- डॉ स्वाति तिवारी 

    अनुवाद - सुशांत सुप्रिय

    अंतोन चेखव (1860-1904) को रूसी साहित्य में ही नहीं बल्कि विश्व साहित्य में महानतम कहानीकारों में से एक माना जाता है।

    अन्तोन पाव्लाविच चेख़व रूसी कथाकार और नाटककार थे। अपने छोटे से साहित्यिक जीवन में उन्होंने रूसी भाषा को चार कालजयी नाटक दिए जबकि उनकी कहानियाँ विश्व के समीक्षकों और आलोचकों में बहुत सम्मान के साथ सराही जाती हैं।चेखव के विशद साहित्य में से कुछ कहानियों का चयन करना सरल नहीं। उनकी प्रत्येक कहानी विशिष्ट है। अतः स्वरुचि के आधार पर एक कहानी चयनित  कर यहाँ पाठ किया हैं

    18 min
  • Episode 2 - वह लड़का : मैक्सिम गोर्की (The Little Boy)

     वह लड़का : मैक्सिम गोर्की  (The Little Boy)

     रूसी भाषा की कहानी

    कहानी पाठ -डॉ स्वाति तिवारी

    रूसी साहित्य के सबसे चमकते सितारे मैक्सिम गोर्की का अपने देश ही नहीं, विश्व में भी ऊंचा दर्ज़ा है. वे रूस के निझ्नी नोवगरद शहर में जन्मे थे. पिता की मौत के बाद उनका बचपन मुफ़लिसी और रिश्तेदारों के तंज़ खाते हुए गुज़रा में गुज़रा. गोर्की ने चलते-फिरते ज्ञान हासिल किया और पैदल घूम-घूमकर समाज और दुनियादारी की समझ हासिल की.असमर्थ युग के समर्थ लेखक के रूप में मैक्सिम गोर्की को जितना सम्मान, कीर्ति और प्रसिद्धि मिली, उतनी शायद ही किसी अन्य लेखक को अपने जीवन में मिली होगी। वे क्रांतिदृष्टा और युगदृष्टा साहित्यकार थे। जन्म के समय अपनी पहली चीख़ के बारे में स्वयं गोर्की ने लिखा है- 'मुझे पूरा यकीन है कि वह घृणा और विरोध की चीख़ रही होगी।उनकी रचनाओं में व्यक्त यथार्थवादी संदेश केवल रूस तक ही सीमित नहीं रहे। उनके सृजनकाल में ही उनकी कृतियाँ विश्वभर में लोकप्रिय होना प्रारंभ हो गईं।

    10 min
  • कहानी 'वो जो भी है, मुझे पसंद है' - स्वाति तिवारी | Hindi Kahani by Swati Tiwari

    "तो क्या कहूँ?" मेरे अंदर शब्द लिसलिसे से हो आए थे, कुछ सूझ ही नहीं रहा था उसके तर्क को नकारने के लिए ऊपर से गुस्सा आ रहा था मन कर रहा था एक जोरदार थप्पड़ जड़ दूँ उसके गाल पर।

    "मेम आप तो सिंगमंड फ्रायड को पढ़ती रही है न, आपने ही एक बार फ्रायड को पढाते हुए समझाया था ना? आप तो मनोविज्ञान की टीचर हैं। मेम मुझे लगता है फ्रायड ठीक ही कहते रहे हैं यह विकृति (परवरसन) नहीं यह उलटाव (इनवरसन) है वे इसे बीमारी विमारी नहीं मानते?"

    "फ्रायड सिर्फ पढने ने और समझने के मनोवैज्ञानिक है पगली, जीवन में उतारने के नहीं। तुम समझ क्यों नहीं रही मेरा मतलब?"

    28 min

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