Suresh Verma

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By Suresh VermaArts
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Suresh Verma episodes

  • आशा लिख रहा है || सुरेश वर्मा

    आशा लिख रहा है 

    आज महीनों बाद आपके बीच अपनी एक कविता ले  कर आया हूं,

    इस त्रासद काल में जब वक्त बेहद क्रूर हो चला है मौत का नंगा नृत्य जारी है 

    और समय पहाड़ से भी भारी है ऐसे में अपने भी मुंह मोड़ने लगे हैं नाते तोड़ने लगे हैं 

    रिश्तो की बुनियाद एकबारगी हिलने लगी है 

    इसी कसक और पीड़ा को अपनी कविता में जिया  है मैंने 

    कविता का शीर्षक है आशा लिख रहा है 


    सुरेश वर्मा

    सीतामढ़ी


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    4 min
  • गीली आँखों की पीड़ाएँ

    जीवन और मर्म की धड़कनो की समाहित करने वाला ये कविता उस हर व्यक्ति से सम्बन्ध रखता है जो अपने जीवन में बहुत आभाव को देखा है परन्तु वो अपने बच्चो को ऐसे आभाव में नहीं देखना चाहत।  इसमें एक पिता की कैसे विवश है अपने बच्चो के लिए।  वही एक पुत्र अपने पिता के बीच का संवाद भी है। 


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    3 min
  • पितृपक्ष

    इस कविता में मेरे पिता अपने पिता यानि दादाजी "बाबा" को याद कर रहे है। बेहद मार्मिक तरह से शब्दों को पिरोया गया इस कविता को सुन के मेरे आँख भी नम हो गयी।  

    3 min
  • Sab yaad hai mujhe || सब याद है मुझे

    ये कविता मेरे पिता अपने बचपन को याद करते लिखा है, ऐसा शायद उस दौर में आम बात रही होगी लेकिन सोचने वाली बात है हम लोग ने अपने जीवन को एक राजकुमार के जैसा जिया है लेकिन हमारे जीवन के असली नायक किस किस अभाव को झेला है। ये कविता जीवन की यात्रा  को बताती है।

    6 min
  • Yaad Hai Mujhe || याद है मुझे

    ये  कविता  मेरे पिताजी श्री सुरेश वर्मा "नीलकंठ" ग्राम बेलाही नीलकंठ के द्वारा लिखा हुआ और उनके आवाज में ही आपको प्रस्तुत कर रहा हू।

    उम्मीद करता हूँ इस कविता से बहुत लोग खुद के जुड़ा महसूस करेंग। ऐसे उनके अनेक रचनाये है जिन्हे लाने की कोशिश है मेरे तरफ से।

    आपके स्नेह का इंतजार रहेगा ।

    4 min

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ये पॉडकास्ट मेरे पिताजी श्री सुरेश वर्मा "नीलकंठ" ग्राम बेलाही नीलकंठ के द्वारा लिखे हुए रचनाओं से है ,जीवन साहित्य में उनका गहरा लगाओ ह। राष्ट्रीय स्तर पे भी कई बार सम्मानित हुए है।पिता जी को फेसबुक…