Syahdeepti 

Hindi Poetry Blog!

Syahdeepti Hindi Poetry Blog!

By Tripti MishraArtsBooks
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Syahdeepti Hindi Poetry Blog! episodes

  • Bashir Badr-Magar dil ko har raat ik baar padhna

    किताबें, रिसाले न अख़बार पढ़ना
    मगर दिल को हर रात इक बार पढ़ना
    सियासत की अपनी अलग इक ज़बाँ है
    लिखा हो जो इक़रार, इनकार पढ़ना
    अलामत नये शहर की है सलामत
    हज़ारों बरस की ये दीवार पढ़ना
    किताबें, किताबें, किताबें, किताबें
    कभी तो वो आँखें, वो रुख़सार पढ़ना
    मैं काग़ज की तक़दीर पहचानता हूँ
    सिपाही को आता है तलवार पढ़ना
    बड़ी पुरसुकूँ धूप जैसी वो आँखें
    किसी शाम झीलों के उस पार पढ़ना
    ज़बानों की ये ख़ूबसूरत इकाई
    ग़ज़ल के परिन्दों का अशआर पढ़ना
    (मई १९९८) - Kavita Kosh for you all.
    I read from Musafir -Kindle copy!

    Music -https://www.youtube.com/watch?v=DRnyxlaqqLk&t=347s

    Image -

    Photo by Kelly Sikkema on Unsplash

    4 min
  • Bashir Badr- Musafir - Mere saath tum bhi dua karo

    मेरे साथ तुम भी दुआ करो यूँ किसी के हक़ में बुरा न हो
    कहीं और हो न ये हादसा कोई रास्ते में जुदा न हो
    मेरे घर से रात की सेज तक वो इक आँसू की लकीर है
    ज़रा बढ़ के चाँद से पूछना वो इसी तरफ़ से गया न हो
    सर-ए-शाम ठहरी हुई ज़मीं, आसमाँ है झुका हुआ
    इसी मोड़ पर मेरे वास्ते वो चराग़ ले कर खड़ा न हो
    वो फ़रिश्ते आप ही ढूँढिये कहानियों की किताब में
    जो बुरा कहें न बुरा सुने कोई शख़्स उन से ख़फ़ा न हो
    वो विसाल हो के फ़िराक़ हो तेरी आग महकेगी एक दिन
    वो गुलाब बन के खिलेगा क्या जो चराग़ बन के जला न हो
    मुझे यूँ लगा कि ख़ामोश ख़ुश्बू के होँठ तितली ने छू लिये
    इन्ही ज़र्द पत्तों की ओट में कोई फूल सोया हुआ न हो
    इसी एहतियात में मैं रहा, इसी एहतियात में वो रहा
    वो कहाँ कहाँ मेरे साथ है किसी और को ये पता न हो

    Source- Kavita Kosh!



    Photo -https://www.amazon.in/Musafir-Ba

    shir-Baa/dp/818322590X

    Music -https://www.youtube.com/watch?v=DRnyxlaqqLk&t=346s

    4 min
  • Sahir Ludhianvi - Guzre Jidhar se Ham!

    कुछ और बढ़ गए जो अँधेरे तो क्या हुआ

    मायूस तो नहीं हैं तुलू-ए-सहर से हम

    भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागर से हम

    ख़ामोश क्या रहेंगे ज़माने के डर से हम

    ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है

    क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

    माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके

    कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम

    Sahir Ludhianvi 

    Photo -Mumbai Mirror - Maseem Raza Collection 

    Music -https://www.youtube.com/watch?v=0CApEp5Ad0w

    3 min

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स्याह की रौशनी लिए कुछ चुलबुले कुछ मंझे कुछ सधे कुछ यूँ ही शब्द … और उनकी टोली !