प्रतिक्षा और प्रयास दोनों जीवन के अभिनय अंग है। देखा जाए तो हम सदेव किसी न किसी की प्रतिक्षा कर रहे होते हैं चाहे कोई व्यक्ति हो, चाहे कोई षण हो, चाहे कोई भावना, कुछ भी हो सकता हैं। और देखा जाए तो सदेव कोई न कोई प्रयास भी कर रहे होते हैं। जैसे सफलता के आने की प्रतिक्षा, असफलता न आए इसके लिए प्रयास; सुख आने की प्रतीक्षा, दुख न आए इसके लिए प्रयास। प्रतिक्षा और प्रयास का अत्यंत घनिष्ट संबंध हैं और वो यह हैं कि - प्रतिक्षा करने वालो को उतना ही मिलता हैं जो प्रयास करने वाले पीछे छोड़ जाते हैं तो प्रतीक्षा नहीं , प्रयास कीजिए।