आज दोस्ती का मतलब केवल स्वार्थ तक सीमित हो गया है स्वार्थ पूरा होते ही दोस्ती के मायने बदल जाते हैं
यदि हमें सही मायने में दोस्ती के एहसास को जानना है तो कृष्णा सुदामा की दोस्ती की गहराई को समझना होगा जो शब्दों से परिभाषित नहीं की जा सकती उसके लिए आपको दोस्ती के प्रेम को महसूस करना होगा
लेकिन फिर भी मेने उस एहसास को भावों में पिरोने की कोशिश की है ,
उम्मीद करती हूँ आप लोगों को पसंद आएगी |