पितर, देवताओं को माननेवालों के काम बन जाते, हम भगवान को मानते, हमारे काम नहीं बनते? (श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज के साथ चुप साधन व वासुदेव सर्वम संबंधी प्रश्नोत्तर)
वासुदेव सर्वम के अनुभव के बाद भी नयी चीजें खाने व दोस्तों से बात करने की मन में आती है? (श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज के साथ चुप साधन व वासुदेव सर्वम संबंधी प्रश्नोत्तर)