Vinay Iztirar

Vinay Iztirar

By Vinay इज़्तिरारArtsPerforming Arts
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Vinay Iztirar episodes

  • *उपभोगवाद की हकीकत*
    *इन पांच लघु कहानी से समझे*
    *उपभोगवाद की हकीकत*
    1.
    सर में भयंकर दर्द था सो अपने परिचित केमिस्ट की दुकान से सर दर्द की गोली लेने रुका।
    दुकान पर नौकर था, उसने मुझे गोली का पत्ता दिया ,
    तो उससे मैंने पूछा गोयल साहब कहाँ गए हैं ,
    *तो उसने कहा साहब के सर में दर्द था ,*
    *सो सामने वाली दुकान में कॉफी पीने गये हैं।*
    अभी आते होंगे!
    मैं अपने हाथ मे लिए उस दवाई के पत्ते को देखने लगा.?
    🤔🤔
    2.
    माँ का ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा हुआ था ,
    सो सवेरे सवेरे उन्हें लेकर उनके पुराने डॉक्टर के पास गया।
    क्लिनिक से बाहर उनके गार्डन का नज़ारा दिख रहा था ,
    जहां डॉक्टर साहब योग और व्यायाम कर रहे थे।
    मुझे करीब 45 मिनिट इंतज़ार करना पड़ा।
    कुछ देर में डॉक्टर साहब अपना नींबू पानी लेकर क्लिनिक आये ,
    और माँ का चेक-अप करने लगे।
    उन्होंने मम्मी से कहा आपकी दवाइयां बढ़ानी पड़ेंगी ,
    और एक पर्चे पर करीब 5 या 6 दवाइयों के नाम लिखे।
    उन्होंने माँ को दवाइयां रेगुलर रूप से खाने की हिदायत दी।
    बाद में मैंने उत्सुकता वश उनसे पूछा कि...
    क्या आप बहुत समय से योग कर रहे हैं.?
    तो उन्होंने कहा कि...
    *पिछले 15 साल से वो योग कर रहे हैं ,*
    *और ब्लड प्रेशर व अन्य बहुत सी बीमारियों से बचे हुए हैं!*
    मैं अपने हाथ मे लिए हुए माँ के उस पर्चे को देख रहा था ,
    जिसमे उन्होंने BP और शुगर कम करने की कई दवाइयां लिख रखी थी.?
    🤔🤔
    3.
    अपनी बीवी के साथ एक ब्यूटी पार्लर गया।
    मेरी बीवी को हेयर ट्रीटमेंट कराना था ,
    क्योंकी उनके बाल काफी खराब हो रहे थे।
    रिसेप्शन में बैठी लड़की ने उन्हें कई पैकेज बताये और उनके फायदे भी।
    पैकेज 1200 से लेकर 3000 तक थे।
    कुछ डिस्काउंट के बाद मेरी बीवी को उन्होंने 3000 रु वाला पैकेज 2400रु में कर दिया।
    हेयर ट्रीटमेंट के समय उनका ट्रीटमेंट करने वाली लड़की के बालों से अजीब सी खुशबू आ रही थी।
    मैंने उससे पूछा कि आपने क्या लगा रखा है ,
    कुछ अजीब सी खुशबू आ रही है।
    तो उसने कहा ---
    *उसने तेल में मेथी और कपूर मिला कर लगा रखा है ,*
    *इससे बाल सॉफ्ट हो जाते हैं और जल्दी बढ़ते हैं।*
    मैं अपनी बीवी की शक्ल देख रहा था ,
    जो 2400 रु में अपने बाल अच्छे कराने आई थी।
    🤔🤔
    4.
    मेरी रईस कज़िन जिनका बड़ा डेयरी फार्म है, उनके फार्म पर गया।
    फार्म में करीब 150 विदेशी गाय थी ,
    जिनका दूध मशीनों द्वारा निकाल कर प्रोसेस किया जा रहा था।
    एक अलग हिस्से में 2 देसी गाय हरा चारा खा रही थी।
    पूछने पर बताया.. .
    *उनके घर उन गायों का दूध नही आता ,*
    *जिनका दूध उनके डेयरी फार्म से सप्लाई होता है।*
    बल्कि परिवार के इस्तेमाल के लिए ...
    *इन 2 देसी गायों का दूध, दही व घी इस्लेमाल होता है।*
    मै उन लोगों के बारे में सोच रहा था ,
    जो ब्रांडेड दूध को बेस्ट मानकर खरीदते हैं।
    🤔🤔
    5.
    एक प्रसिद्ध रेस्तरां जो कि अपनी विशिष्ट थाली और शुद्ध खाने के लिए प्रसिद्ध है ,
    हम खाना खाने गये।
    निकलते वक्त वहां के मैनेजर ने बडी विनम्रता से पूछा-
    सर खाना कैसा लगा, हम बिल्कुल शुद्ध घी तेल और मसाले प्रयोग करते हैं ,
    हम कोशिश करते हैं बिल्कुल घर जैसा खाना लगे।
    मैंने खाने की तारीफ़ की तो उन्होंने अपना विजिटिंग कार्ड देने को अपने केबिन में गये।
    काउंटर पर एक 3 डब्बों का स्टील का टिफिन रखा था।
    एक वेटर ने दूसरे से कहा--
    "सुनील सर का खाना अंदर केबिन में रख दे ,
    बाद में खाएंगे"।
    मैंने वेटर से पूछा क्या सुनील जी यहां नही खाते?
    तो उसने जवाब दिया--
    *"सुनील सर कभी बाहर नही खाते ,*
    *हमेशा घर से आया हुआ खाना ही खाते हैं"*
    मैं अपने हाथ मे 1670 रु के बिल को देख रहा था।
    🤔〽️✌️🤔
    👇🏾
    ये कुछ वाकये हैं जिनसे मुझे समझ आया कि ..
    *हम जिसे सही जीवन शैली समझते हैं ..*
    *वो हमें भृमित करने का जरिया मात्र है।*
    *हम कंपनियों के ATM मात्र हैं।*
    *जिसमें से कुशल मार्केटिंग वाले लोग मोटा पैसा निकाल लेते हैं।*
    *अक्सर जिन चीजों को हमे बेचा जाता है ,*
    *उन्हें बेचने वाले खुद इस्तेमाल नही करते।*
    ~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    कृपया इसे एक बार और सुनें।
    *शायद विचारणीय हो।*
    6 min
  • गरीब और बेबस लोगों की मदद ईश्वर की पूजा से भी अच्छी होती है।
    🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾
    *👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*
    *!! महिला के शुभ कदम !!*
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    एक आदमी ने दुकानदार से पूछा: केले और सेव फल क्या भाव लगाऐ है? दुकानदार: केले 20 रु. दर्जन और सेव 100 रु. किलो
    उसी समय एक गरीब सी औरत दुकान में आयी और बोली मुझे एक किलो सेव और एक दर्जन केले चाहिए, क्या भाव है? भैया दुकानदार: केले 5 रु दर्जन और सेब 25 रु किलो। औरत ने कहा: जल्दी से दे दीजिए। दुकान में पहले से मौजूद ग्राहक ने खा जाने वाली निगाहों से घूरकर दुकानदार को देखा, इससे पहले कि वो कुछ कहता, दुकानदार ने ग्राहक को इशारा करते हुए थोड़ा सा इंतजार करने को कहा। औरत खुशी-खुशी खरीदारी करके दुकान से निकलते हुए बड़बड़ाई हे भगवान! तेरा लाख-लाख शुक्र है, मेरे बच्चे फलों को खाकर बहुत खुश होंगे।
    औरत के जाने के बाद, दुकानदार ने पहले से मौजूद ग्राहक की तरफ देखते हुए कहा: ईश्वर गवाह है, भाई साहब मैंने आपको कोई धोखा देने की कोशिश नहीं की। यह विधवा महिला है, जो चार अनाथ बच्चों की मां है। किसी से भी किसी तरह की मदद लेने को तैयार नहीं है। मैंने कई बार कोशिश की है और हर बार नाकामी मिली है। तब मुझे यही तरकीब सूझी है कि जब कभी ये आए तो, मैं उसे कम से कम दाम लगाकर चीज़े दे दूँ। मैं यह चाहता हूँ कि उसका भ्रम बना रहे और उसे लगे कि वह किसी की मोहताज नहीं है।
    मैं इस तरह भगवान के बन्दों की पूजा कर लेता हूँ। थोड़ा रूक कर दुकानदार बोला: यह औरत हफ्ते में एक बार आती है। भगवान गवाह है, जिस दिन यह आ जाती है उस दिन मेरी बिक्री बढ़ जाती है और उस दिन परमात्मा मुझ पर मेहरबान हो जाता है।
    ग्राहक की आंखों में आंसू आ गए, उसने आगे बढ़कर दुकानदार को गले लगा लिया और बिना किसी शिकायत के अपना सौदा खरीदकर खुशी-खुशी चला गया। खुशी अगर बांटना चाहो तो तरीका भी मिल जाता है।
    *सदैव प्रसन्न रहिये।*
    *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
    3 min
  • झूठा अभिमान
    दूसरों को दिखाने के लिए हमें जीवन नही जीना चाहिए... जीवन का आनंद हर पल में लेते रहें... मनुष्य माटी का पुतला है..माटी में ही मिल जाएगा...जो पास है वही पर्याप्त है... सदैव मुस्कुराते रहिए।
    5 min
  • आख़िर कब तक ?
    जब से ख़बर पढ़ी है,देखी है अजीब सी मन में कसमसाहट है। अजीब सी घृणा के भाव आ रहे हैं जा रहे हैं। गुस्सा बेहिसाब आ रहा है पर किसपर करूँ ये समझ नही आ रहा है। दोषी कौन है ? ये प्रश्न यक्ष प्रश्न बनकर सामने खड़ा हुआ है जिसका सही जवाब नही सूझ रहा है अगर आप को मिले तो जरूर कमेंट करें ताकि महसूस कर सकूं के इंसानों के बीच में हूँ नरपषुओं के बीच में नही क्योंकि मित्र मंडली में संख्या बहुत है पर शायद उनकी जुबान भी जाति,धर्म के तालों से बंद है।
    #उत्तर प्रदेश के #हाथरस जिले में मनीषा नाम की लड़की का गैंगरेप हुआ है..लड़की दलित वर्ग से आती है..लड़की की जुबान काट दी गई...रीढ़ की हड्डी( स्पाइनल कॉर्ड) तोड़ दी गई है...और आज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उस लड़की की मौत हो गई है...
    अब प्रश्न ये उठ रहा है कि गैंग रेप किसका हुआ उस लड़की का या हमारी संस्कृति का... सरकार के खोखले वादों का ....या झूठे नारों ,स्लोगन का..जिसमें बेटी बचाओ को बहुत बढ़ा चढ़ा के प्रचारित किया जाता है...
    आज 2020 में भी जाति,धर्म की भावना खत्म नही हुई है हम सब के मस्तिष्क से...तभी तो सरकार अलग अलग वर्ग,जाति, धर्म के लोगों में तरह तरह की योजना लागू करती है...और समाज के लोग अपनी अपनी जाति,धर्म,रंग के अनुसार उन योजनाओं के पीछे लार टपकाते भागते रहते हैं और खामोश रहते हैं।
    जुबान उस लड़की की कटी है ताकि वो अपराधियों के नाम न बोल सके...या हम सब की जुबान काट दी गई है जो इतना सब देख सुनकर भी मौन हैं...पहले भी खामोश थे आज भी खामोशी के साथ ये सोचकर कि हम क्यों फालतू की खबरों पर ध्यान दे...कौन सा हमारे घर में हुआ है..ये तो होता रहता है...चुप हैं...
    रीढ़ की हड्डी उस लड़की की टूटी है या हमारे सिस्टम की टूटी है...हमारे और आपके स्पाइनल कॉर्ड पर चोट की गई है...जिसका दर्द हमें अभी महसूस नही हो रहा है...हम इंतजार में है कि हमारे साथ जब ऐसा होगा या वाकई हम इतने लाचार हो चुके हैं कि हम सीधे खड़े होकर विरोध नही कर सकते ऐसी घटनाओं का।
    क्या हम ऐसी शर्मनाक घटनाओं के देश को भारत कहते हैं...क्या हम किताबों में लिखे "यत्र नारी पूज्यंते, तत्र देवता रमन्ते" जिसमें नारी की पूजा होने पर भगवान के खुश होने को माना गया है की अवधारणा को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित मानते हैं...क्या वर्ष में दो बार नवरात्र मनाने में कन्याओं का पूजन,देवी के मंदिर में जुटी भीड़ सिर्फ दिखावा है,ढोंग है...क्या लड़कियों के हमसे गलती से पैर लग जाने पर उनके पैर छूना ढोंग है...क्या बेटियां होने पर घर पर लक्ष्मी आई है कह कर बधाई देना भी एक दिखावा है....क्या बेटियों के पैर पूजना भी सिर्फ एक दिखावा बन चुका है...
    क्यों हमें बलात्कार के पीछे की घटनाओं में उनके कम कपड़ों,उनके खुलेपन के दोष देने में अपनी बहादुरी समझते हैं...हम अपनी नज़रों में छिपे घटिया सोच, अपने दिमाग की गंदी समझ,अपने बेटों में छुपे दरिंदों की पहचान क्यों नही कर पाते...क्यों ऐसी घटनाओं में माँ, बहन अपने बेटों,भाइयों का पक्ष लेते नज़र आती है...क्यों मीडिया और हम केवल महिलाओं में छिपे ऐब की तलाश में लगे रहते हैं...
    और समाज में मां ,बहन की गालियों में क्यों नारी के नाम पर ही गाली दी जाती है...क्यों केवल महिलाओं के निजी अंग पर प्रहार किया जाता है.. जबकि हम सब का जन्म उसी अंग से हुआ है...हम कब तक सरकार ,पुलिस,कानून को दोषी ठहराते रहेंगे...हम कब समझेंगे के इस तरह के अपराध में हम सब बराबर के दोषी हैं...कभी अपने लड़कों की गलतियों पर पर्दा डालकर,कभी अपनी लड़कियों को ज्यादा छूट देकर...तो कभी ये सोचकर कि हम कर भी क्या लेंगे ।
    हम कैसे लोकतंत्र में है जहाँ अपनी आवाज उठाने से हमें डर लगता है... कैसे देश में है जहाँ अकेले आने जाने में डर लगता है... कैसे धर्म का पालन कर रहे हैं जिसकी लिखी कही गई बातें मानने में शर्म आती है...हम इंसानियत को समझते भी है या सिर्फ अपनी धुन,अपने काम,अपनी अंधी दौड़ में दौड़े जा रहे हैं....जिसका अंत एक गहरी काली खाई है...जहां पहुँचने के बाद लौटने का कोई रास्ता नही...
    अंत में एक आखरी बात के ये जो #daughtersday मनाने का चलन शुरू हुआ है उसको बंद कर दो अगर तुम बेटी वाले होकर भी बेटियों के लिए आवाज नही उठा सकते...बंद कर दो कन्याओं का पूजन भी अगर उनकी रक्षा नही कर सकते...बंद कर दो बेटियों के नाम पर नारे गढ़ना...#बेटीबचाओ अभियान चलाना...क्योंकि आने वाले कल में ये सारी हरकतें मानवता को शर्मशार करेंगी।
    #StopRape
    #manishavalmiki
    #BetiBachaoBetiPadhao
    #हाथरस
    12 min
  • धैर्य शील शिष्य
    *!! धैर्यशील शिष्य !!*
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    एक बार कि बात है, एक गुरू अपने कुछ शिष्यों के साथ पैदल ही यात्रा पर थे। वे चलते-चलते किसी गांव में पहुंच गए। ये गांव काफी बड़ा था, वहां घूमते हुए उन्हें काफी देर हो गयी थी। गुरू जी थक चुके थे और उन्हें बहुत प्यास लगी थी, तो उन्होनें अपने एक शिष्य से कहा कि हम इसी गांव में कुछ देर रूकते हैं, तुम मेरे लिए पानी ले आओ।
    *सदैव प्रसन्न रहिये।*
    *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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    5 min
  • मां और डिनर
    मां के साथ DINNER DATE🙏
    एक दिन अचानक मेरी पत्नी मुझसे बोली - "सुनो, अगर मैं तुम्हे किसी और के साथ डिनर और फ़िल्म के लिए बाहर जाने को कहूँ तो तुम क्या कहोगे"।
    मैं बोला - " मैं कहूँगा कि अब तुम मुझे प्यार नहीं करती"।
    उसने कहा - "मैं तुमसे प्यार करती हूँ, लेकिन मुझे पता है कि यह औरत भी आपसे बहुत प्यार करती है और आप के साथ कुछ समय बिताना उनके लिए सपने जैसा होगा"।
    वह अन्य औरत कोई और नहीं मेरी माँ थी। जो मुझ से अलग अकेली रहती थी। अपनी व्यस्तता के कारण मैं उन से मिलने कभी कभी ही जा पाता था।
    मैंने माँ को फ़ोन कर उन्हें अपने साथ रात के खानेे और एक फिल्म के लिए बाहर चलने के लिए कहा।
    "तुम ठीक तो हो,ना। तुम दोनों के बीच कोई परेशानी तो नहीं" माँ ने पूछा
    मेरी माँ थोडा शक्की मिजाज़ की औरत थी। उनके लिए मेरा इस किस्म का फ़ोन मेरी किसी परेशानी का संकेत था।
    " नहीं कोई परेशानी नहीं। बस मैंने सोचा था कि आप के साथ बाहर जाना एक सुखद अहसास होगा" मैंने जवाब दिया और कहा 'बस हम दोनों ही चलेंगे"।
    उन्होंने इस बारे में एक पल के लिए सोचा और फिर कहा, 'ठीक है।'
    शुक्रवार की शाम को जब मैं उनके घर पर पहुंचा तो मैंने देखा है वह भी दरवाजे पर इंतजार कर रही थी। वो एक सुन्दर पोशाक पहने हुए थी और उनका चहेरा एक अलग सी ख़ुशी में चमक रहा था।
    कार में माँ ने कहा " 'मैंने अपनी friends को बताया कि मैं अपने बेटे के साथ बाहर खाना खाने के लिए जा रही हूँ। वे काफी प्रभावित थी"।
    हम लोग माँ की पसंद वाले एक रेस्तरां पहुचे जो बहुत सुरुचिपूर्ण तो नहीं मगर अच्छा और आरामदायक था। हम बैठ गए, और मैं मेनू देखने लगा। मेनू पढ़ते हुए मैंने आँख उठा कर देखा तो पाया कि वो मुझे ही देख रहीं थी और एक उदास सी मुस्कान उनके होठों पर थी।
    'जब तुम छोटे थे तो ये मेनू मैं तुम्हारे लिए पढ़ती थी' उन्होंने कहा।
    'माँ इस समय मैं इसे आपके लिए पढना चाहता हूँ,' मैंने जवाब दिया।
    खाने के दौरान, हम में एक दुसरे के जीवन में घटी हाल की घटनाओं पर चर्चा होंने लगी। हम ने आपस में इतनी ज्यादा बात की, कि पिक्चर का समय कब निकल गया हमें पता ही नही चला।
    बाद में वापस घर लौटते समय माँ ने कहा कि अगर अगली बार मैं उन्हें बिल का पेमेंट करने दूँ, तो वो मेरे साथ दोबारा डिनर के लिए आना चाहेंगी।
    मैंने कहा "माँ जब आप चाहो और बिल पेमेंट कौन करता है इस से क्या फ़र्क़ पड़ता है।
    माँ ने कहा कि फ़र्क़ पड़ता है और अगली बार बिल वो ही पे करेंगी।
    "घर पहुँचने पर पत्नी ने पूछा" - कैसा रहा।
    "बहुत बढ़िया, जैसा सोचा था उससे कही ज्यादा बढ़िया" - मैंने जवाब दिया।
    इस घटना के कुछ दिनबाद, मेरी माँ का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। यह इतना अचानक हुआ कि मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पाया ।
    माँ की मौत के कुछ समय बाद, मुझे एक लिफाफा मिला जिसमे उसी रेस्तरां की एडवांस पेमेंट की रसीद के साथ माँ का एक ख़त था जिसमे माँ ने लिखा था " मेरे बेटे मुझे पता नहीं कि मैं तुम्हारे साथ दोबारा डिनर पर जा पाऊँगी या नहीं इसलिए मैंने दो लोगो के खाने के अनुमानित बिल का एडवांस पेमेंट कर दिया है। अगर मैं नहीं जा पाऊँ तो तुम अपनी पत्नी के साथ भोजन करने जरूर जाना।
    उस रात तुमने कहा था ना कि क्या फ़र्क़ पड़ता है। मुझ जैसी अकेली रहने वाली बूढी औरत को फ़र्क़ पड़ता है, तुम नहीं जानते उस रात तुम्हारे साथ बीता हर पल मेरे जीवन के सबसे बेहतरीन समय में एक था।
    भगवान् तुम्हे सदा खुश रखे।
    I love you".
    तुम्हारी माँ
    उस पल मुझे अपनों को समय देने और उनके प्यार को महसूस करने का महत्त्व मालूम हुआ।
    जीवन में कुछ भी आपके अपने परिवार से भी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है।
    ना व्हाट्सएप
    ना फेसबूक
    ना मोबाइल
    ना लैपटॉप
    और
    ना ही टीवी।
    अपने परिजनों को उनके हिस्से का समय दीजिए क्योंकि आपका साथ ही उनके जीवन में खुशियाँ का आधार है।
    इस मेसेज को उन सब व्यक्तियों के साथ शेयर कीजिए
    जिनके बूढ़े माता पिता हो
    जिनके छोटे बच्चे हो
    और
    जिनको प्यार करने वाला और उनका इंतज़ार कोई हो...
    क्योंकि
    🌺धन तो आता जाता है मगर अपने गए तो लौट के नहीं आते🌺 🙏
    8 min
  • अमृता प्रीतम
    अमृता प्रीतम और प्रेम शायद पर्याय थे एक दूसरे के। साहिर अमृता के प्रेम ने इस कहानी को अमर कर दिया।
    10 min
  • एक प्रेम कहानी राजीव और सोनिया
    दो अलग-अलग देश, दो अलग-अलग पृष्ठभूमि, दो अलग-अलग संस्कृतियां लेकिन एक साझा भाग्य। जी हां, यह राजीव गांधी और सोनिया गांधी की प्रेम-कहानी नहीं है।
    एक प्रेम कहानी जो एक राजनीतिक मामला बन गया; राजीव गांधी और सोनिया गांधी की प्रेम कहानी इतनी जुनून और गर्मजोशी से भरी है कि यह लेखकों को एक प्रेम कहानी को कलमबद्ध करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
    युवा जोड़े
    राजीव गांधी ने एक खूबसूरत इतालवी लड़की को कैम्ब्रिज में एक ग्रीक रेस्तरां में बैठे देखा और उसके लिए तुरंत गिर पड़े। यह इतालवी लड़की भविष्य की श्रीमती सोनिया गांधी के अलावा और कोई नहीं थी। बहुत ही आकर्षक राजीव गांधी ने रेस्तरां के मालिक चार्ल्स एंटोनी से पूछा कि वह उन्हें अपने करीब रखे, जिसके लिए मालिक ने काफी रकम की मांग की।
    उस दिन, वह सोनिया की सुंदरता से इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसने तुरंत उसके बारे में एक पेपर नैपकिन पर एक कविता लिखी और उसे चार्ल्स के माध्यम से सबसे अच्छी शराब की एक बोतल के साथ भेजा।
    सिमी ग्रेवाल के साथ एक टॉक शो पर, राजीव ने कहा:
    "जब मैंने पहली बार सोनिया को देखा तो मुझे पता था कि वह मेरे लिए लड़की है। मैंने सोनिया को बहुत सीधा और मुखर पाया, कभी भी कुछ नहीं छिपाया। वह बहुत गर्म है और एक व्यक्ति के रूप में समझती है।"
    दोनों अक्सर बाहर जाने लगे और सत्यजीत रे की पाथेर पांचाली पहली फिल्म थी जिसे उन्होंने एक साथ देखा था।
    मां से मिलना
    भले ही राजीव कैंब्रिज में एक आम व्यक्ति की तरह रहे, लेकिन यह तथ्य कि वे एक महान राजनीतिक नेता, इंदिरा गांधी के पुत्र थे, उनकी वास्तविकता का एक बड़ा हिस्सा था। राजीव ने सोनिया के प्रति अपने प्यार का इजहार करते हुए अपनी मां को एक पत्र लिखा। श्रीमती गांधी ने पत्र प्राप्त किया और अपनी चाची के साथ चर्चा करने के बाद, विजयलक्ष्मी पंडित ने अपनी भावी बहू से मिलने का फैसला किया।
    श्रीमती गांधी ने 1965 में नेहरू प्रदर्शनी के लिए लंदन के लिए उड़ान भरी और यह वहां था कि राजीव ने सोनिया को अपनी मां से मिलवाया। उस समय, युवा जोड़े ने एक-दूसरे से शादी करने का मन बना लिया था। खुले विचारों वाले नेता होने के नाते, इंदिरा उनके प्रेमालाप के रास्ते में नहीं आईं लेकिन उन्होंने सुझाव दिया कि सोनिया को अंतिम कॉल करने से पहले भारत का दौरा करना चाहिए।
    एक डरा हुआ पिता
    इस तथ्य के बावजूद कि इंदिरा गांधी ने मैच को आसानी से स्वीकार कर लिया, सोनिया के पिता, श्री स्टेफानो मेनो, अपनी बेटी के फैसले के बारे में थोड़ा आशंकित थे। वह अपनी बेटी को इतनी दूर जमीन पर भेजने से डरता था। उन्हें राजीव के लिए पसंद था लेकिन अपनी बेटी को एक राजनीतिक परिवार में शादी करने के लिए बहुत उत्सुक नहीं थे।
    जैसा कि यह अब तक की सबसे बड़ी प्रेम कहानी थी, राजीव 1967 में अपनी इंजीनियर की डिग्री पूरी किए बिना भारत लौट आए और सोनिया ने 1968 में 21 साल की उम्र में शुरुआत में उनका साथ दिया। कैम्ब्रिज से लौटने के बाद वह पायलट बन गईं, इससे पहले वह बच्चन परिवार के साथ रहीं। शादी की शुरुआत हुई।
    सिविल शादी
    इंदिरा गांधी ने महसूस किया कि राजीव और सोनिया एक दूसरे के बारे में गंभीर थे। इसलिए, उसने अनावश्यक गपशप से बचने के लिए, जल्दी शादी करने का फैसला किया। उसने घटनाओं में गहरी दिलचस्पी ली और उसके मार्गदर्शन में सब कुछ आयोजित किया गया।
    जनवरी 1968 के अंत तक राजीव और सोनिया की सगाई हो गई। मेहंदी समारोह नई दिल्ली के विलिंगडन क्रीसेंट में बच्चन के घर पर हुआ।
    25 फरवरी, 1968 को पीएम के घर के पीछे के बगीचे में एक नागरिक विवाह हुआ। शादी एक सुरुचिपूर्ण थी और इसमें कई प्रसिद्ध राजनेताओं, व्यापारियों और मशहूर हस्तियों ने भाग लिया था। समारोह के बाहर पत्रकारों की एक ब्रिगेड खड़ी थी, बस समारोह की एक झलक पाने के लिए।
    फूल, रंगोली, भव्य बुफे और संगीत थे, लेकिन इंदिरा गांधी के पिता, पं। जवाहरलाल नेहरू की अनुपस्थिति सभी को महसूस हुई। उसकी माँ, बहन और मामा, हालाँकि, समारोहों का एक बड़ा हिस्सा थे। अगले दिन हैदराबाद हाउस में एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया।
    घर और दुनिया
    राजीव गांधी पहले एक पारिवारिक व्यक्ति थे और फिर कुछ और। सोनिया और राजीव ने 19 जून, 1970 को अपने बेटे, राहुल गांधी और 12 जनवरी, 1972 को उनकी बेटी प्रियंका गांधी का स्वागत किया।
    सोनिया मुख्य रूप से एक पत्नी और एक माँ थी। वह कभी नहीं चाहती थीं कि उनके पति राजनीति में शामिल हों। राजीव भी राजनीति का हिस्सा बनने से हिचक रहे थे।
    उन्होंने सोनिया से वादा किया कि वह इस मांग वाले पेशे का प्रमुख हिस्सा नहीं बनेंगी।
    संजीव गांधी की अचानक मृत्यु के बाद, राजीव को अपनी पत्नी की माँ की मदद करने के लिए किए गए वचन को तोड़ना पड़ा। सोनिया उन दिनों के लिए रोई जब राज
    12 min

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