इस काण्ड में माता कैकई के वचनों के कारण राम, सीता और लक्षमण वनवास चले जाते है। उसके बाद दण्डक वन के पंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा द्वारा राम और लक्षमण से प्रणय निवेदन करना और फिर लक्षमण द्वारा सूर्पनखा का नाक काटने से लेकर रावन के दवारा सीता के हरण की कहानी इसमें वर्णित की गई है।