51 Shaktipeeth with Nishtha

51 Shaktipeeth with Nishtha

By HT Smartcast OriginalsReligion & SpiritualityHinduism
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51 Shaktipeeth with Nishtha episodes

  • हरसिद्धि माँ शक्तिपीठ - उज्जैन, मध्यप्रदेश
    मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर से 1 घंटे की दूरी पर स्थित महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जहां ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे पश्चिम दिशा में हरसिद्धि माता का मंदिर स्थित है। यहां माता सती के दो अंग विपरीत पहाड़ी पर आमने-सामने गिरे थे, जहां माता की कोहनी गिरी थी, उसे हरसिद्धि शक्तिपीठ कहा गया, जो राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी हैं और जहां उनका ऊपर का गिरा, उसे गढ़कालिका माता नाम दिया गया। उज्जैन में ही भैरव पहाड़ी पर भैरवगढ़ में भैरवनाथ विराजमान हैं, जो स्वयं शराब पीते हैं। इस एपिसोड में सुनिए पूरी कहानी।

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    22 min
  • चामुंडेश्वरी शक्तिपीठ - मैसूर, कर्नाटका
    दुर्गा सप्तशती में ही भगवान शिव ने समस्त विश्व के कल्याण के लिए सिद्ध कुंजिका स्त्रोत्र का रहस्य बताया। इस एपिसोड में सुनिए की काली देवी ने चंड मुंड का वध किस स्थान पर किया था और किस लिए वे चामुंडेश्वरी शक्तिपीठ से विख्यात हुई

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    20 min
  • माँ विशालाक्षी शक्तिपीठ | मणिकर्णिका - काशी, उत्तर प्रदेश
    मोक्षदायनी धरा वाराणसी की अलौकिकता को अनुभव करना एक अद्भुत एहसास है. यहाँ पर माता सती की कर्ण मणि गिरी थी जिससे मणिकर्णिका शक्तिपीठ यानि विशालाक्षी शक्तिपीठ की स्थापना हुई. उसी के साथ मणिकर्णिका घाट की उतपत्ति भी हुई. इसी घाट पर भगवान शिव ने माता सती के शव का अंतिम संस्कार किया था जिससे ये मोक्षदायनी धरा के साथ महाशमशान के नाम से विख्यात हुई. महादेव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से काशीविश्वनाथ महादेव, कोतवाल काल भैरव के साथ काशी में विराजते है. माना जाता है कि हर रात्रि भोलेनाथ विश्राम करने माँ विशालाक्षी शक्तिपीठ जाते है. इस एपिसोड में विस्तार से सुनिए कहानी.

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    24 min
  • सुगंधा- सुनंदा शक्तिपीठ | उग्रतारा शक्तिपीठ - शिकारपुर गाँव , बांग्लादेश
    बांग्लादेश के शिकारपुर में बरिसल या बरीसाल से उत्तर में 21 किमी दूर शिकारपुर नामक गांव में सुनंदा नदी (सोंध) के किनारे स्थित है मां सुगंधा, जहां सती माता की नासिका गिरी थी। इसकी शक्ति है सुनंदा और भैरव या शिव को त्र्यंबक कहते हैं। यहां का मंदिर उग्रतारा के नाम से विख्‍यात है। उग्रतारा सुगंदा देवी के पास तलवार, खेकड़ा, नीलपाद, और नरमुंड की माला है। सदियों से इस स्थान पर होने वाली साधनाओं के कारण यहां कदम रखते ही शरीर और मन में शक्ति का संचार होता है।

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    15 min
  • नैना देवी शक्तिपीठ - बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
    हिमाचल प्रदेश की शिवालिक पर्वत श्रेणी की पहाड़ियों पर चंडीगढ़ से लगभग 104 किलोमीटर की दूरी पर बिलासपुर जिले में पहाड़ी पर स्थित है नैना देवी शक्तिपीठ जहां माता सती के दोनों नेत्रों का निपात हुआ था लेकिन कुछ लोगों का ये मानना है कि उनके नेत्रों का निपात नैनी देवी मंदिर में हुआ था जो भारत के उत्तराखंड राज्य के नैनीताल शहर में नैनी झील के उत्तरी छोर पर स्थित है और उन्हीं के नाम से इस स्थान का नाम नैनीताल पड़ा. इस एपिसोड में सुनिए नैना देवी मंदिर की महिमा और उनकी मान्यताएं.

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    21 min
  • अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर | करवीर शक्तिपीठ - कोल्हापुर, महाराष्ट्र
    क्या आप जानते है कि महालक्ष्मी के पीछे-पीछे स्वयं नारायण को भी धरती पर आकर तिरुपति में स्थापित होना पड़ा. कहते है, इस स्थान के दर्शन किए बिना तिरुपतिबाला जी के दर्शन पूर्ण नहीं होते. इस एपिसोड में हम तंत्र चूड़ामणी, स्कन्द पुराण व देवी गीता में उल्लेखित कोल्हापुर में स्थित करवीर शक्तिपीठ को विस्तार से जानेंगे. यहां की जगदम्बा को ‘करवीरसुवासिनी’ या ‘कोलापुरनिवासिनी’ भी कहा जाता है. महाराष्ट्र में इन्हें ‘अम्बाबाई’ माता भी कहते हैं.

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    23 min
  • चूड़ामणि शक्तिपीठ - रूड़की, उत्तराखंड
    माता सती के इस शक्तिपीठ के दर्शन करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है लेकिन इसके लिए करना होगा मंदिर में अपराध पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए इस एपिसोड को.

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    12 min
  • वक्रेश्वर शक्तिपीठ - बीरभूम, बंगाल
    महिषमर्दिनी शक्तिपीठ के नाम से विख्यात वक्रेश्वर शक्तिपीठ की महिमा अलौकिक है. यहां माँ सती की प्रतिमा महिषासुर का वध करते हुए दर्शायी गयी है. यहां पर वक्रेश्वर शक्तिपीठ के साथ ही भगवान शिव का वक्रेश्वर नाथ मन्दिर भी है. इस जगह पर पानी के स्वनिर्मित 10 कुंड है. जिनका तापमान खोलते हुए से लेकर जमा देने वाले ठन्डे जैसा है. इस एपिसोड में सुनिए पश्चिम बंगाल के सिउरी के बीरभूम जनपद के पाप हरा नदी के तट पर स्थित माता के मस्तिष्क के पिंडी रूप की कहानी.

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    17 min
  • सुरकंडा देवी शक्तिपीठ - कद्दूखाल, उत्तराखंड
    देव भूमि उत्तराखंड में माता सती का सिर गिरा था जिस स्थान पर उनके सर ने पिंड रूप धारण किया उसे सुरकंडा देवी शक्तिपीठ कहा गय। सुरकंडा देवी की पहाड़ी से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री अर्थात चारों धाम की पहाड़ियां दिखाई देती है. गंगा दशहरा और नवरात्रि के मौके पर यहां दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और गंगा दशहरा के अवसर पर सुरकंडा माँ की डोली निकलती है जिसके दर्शन हेतु अनेकों लोग इकठ्ठे होते है। इस एपीसोड में सुनिए माता के प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में से इस अंग के दर्शनों की महिमा का महत्त्व।

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    11 min
  • हिंगलाज माता शक्तिपीठ - बलूचिस्तान, पाकिस्तान
    51 शक्तिपीठ के पहले पीठ में हम जानेंगे माता हिंगुला के बारे में, जिसे हिन्दू भक्त माता रानी और मुस्लिम भक्त नानी कहते है. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगोल नदी के किनारे हिंगलाज नामक पहाड़ी पर बसे हिंगलाज माता के मंदिर में सती माता का 'ब्रह्मरंध्र' गिरा था. यहां उपासना से मनुष्य का भी ब्रह्मरंध्र जाग्रत होता है. जिससे वो जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो मोक्ष की ओर जाता है. इस एपिसोड में सुनिए माता हिंगुला देवी की महिमा और यात्रा के बारे में. साथ ही जानिए की यहां भगवान राम ने क्यूँ तपस्या की थी.

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    15 min

About 51 Shaktipeeth with Nishtha

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आदि शक्ति स्वरूपा शिव की अर्धांगिनी बनी माता सती के शव के 51 भाग ही 51 शक्तिपीठ कहलाएं। सतयुग में जब ब्रह्म देव के पुत्र दक्ष ने द्वेष और घृणा भाव में पुत्री सती और दामाद महादेव को अपमानित किया, जिस कारण माता सती ने अपनी योग अग्नि से स्वयं को भस्म किया। इस पॉडकास्ट सीरीज में हम जानेंगे महादेव और सती की प्रेम कहानी। साथ ही जानेंगे मानव कल्याण के लिए बने ये शक्तिपीठ कहाँ पर स्थित है और उनकी मान्यताएं क्या है।