(अल्लहड़ बनारसी और रमती बंजारन) जिसके (लेखक शरद दुबे) और (वक्ता RJ रविंद्र सिंह) है !
एक इंतजार था बेहतर कल के लिए
एक प्रयास था बेहतर कल के लिए
हम मिले घाट पर बेहतर कल के लिए
गुजारा वक्त रात भर बेहतर कल के लिए
कितने सपने दिखाए बेहतर कल के लिए
हम दोबारा फिर से आए बेहतर कल के लिए
फिर जब राते हुई मुलाकाते हुई बेहतर कल के लिए
गुजारा कल का सफर रहा जो बेहतर कल के लिए
मन में एक आस था बेहतर कल के लिए
एक अलग प्रयास था बेहतर कल के लिए
हमने जो भी किया जिंदगी भर के लिए
ना मिले हम डोनर फिर कल के लिए
कल का इंतजार था जिंदगी भर के लिए
ना मिले फिर दोबारा एक दो पल के लिए
एक सफर था हमारा जिंदगी भर के लिए
एक इंतजार था बेहतर कल के लिए
एक प्रयास था बेहतर कल के लिए
हम मिले न दोबारा जिंदगी भर के लिए