बातों बातों में (Baton Baton Mein)

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बातों बातों में (Baton Baton Mein) episodes

  • कुछ नया सीखने के लिए जोखिम उठाना पड़ता है

    स्वामी विवेकानंद कहते हैं की जोखिम उठाए। यदि आप जीत जाते हैं तो आप नेतृत्व कर सकते हैं, और यदि आप हार जाते हैं तो आप मर्गदर्शन कर सकते हैं।

    कुछ नया सीखने के लिए, आगे बढ़ने के लिए जोखिम उठाना भी ज़रूरी होता है।इस वक़्त मन में थोड़ा सा डर होता है, मगर, उससे ज़्यादा उस नए कार्य को करनी की excitementहोती है। जहाँ risk है वहाँ कहीं ना कहीं डर होता है। उस डर का level काम या ज़्यादा हो सकता है मगर अक्सर risk के साथ डर को इसलिए जोड़ दिया जाता है क्योंकि हम उस कार्य की कठिनाई से ज़्यादा उसके परिणाम से डरते हैं।

    आज बात करते हैं risk या जोखिम के विषय पर और कैसे हम इसपर कैसे मात करके नयी चुनौतियों को स्वीकार कर सकते हैं।

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    12 min
  • Burnout क्या है और इसे कैसे दूर भगाएँ?
    I am sure आप सभी दिवाली की तैयरीयों में व्यस्त होंगे। और शायद कुछ लोगों की तो अभी सारी तैयारियाँ पूरी भी हो गयी होंगी। और शायद ये करते वक्ता कई बार थक गए होंगे। कई बार ऐसा भी लग रहा होगा की उफ़्फ़ मैंने इतना सारा काम अपने सर क्यों ले लिया? एक बार ये festival season ख़त्म हो तो चैन की साँस ले। ये तो त्योहार था मगर कई बार हमारे दिन भी इतने ज़्यादा व्यस्त हो जाते हैं की हमें लगता है मानो कामों का अंत ही नहीं हो रहा है। कुछ तो बदलने की ज़रूरत है। हम इसे burnout का नाम देते हैं। मेरे साथ भी ऐसा होता है। फिर ऐसे में में क्या करती हूँ? चलिए बताती हूँ मैं कैसे burnout को दूर भागती हूँ।
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    7 min
  • क्या आपका बचपन ८० और ९० में गुज़रा है? (ताज़ा करते हैं बचपन की यादों को)

    90s is said to be the golden period. ये वो समय था जब technology ने हमारी जिंदगियों में हल्की से दस्तक दी थी।घर पर फ़ोन होना ये बड़ी बात मानी जाती थी। चिट्ठियों से हम एक-दूसरे के सम्पर्क में रहते थे। computer या internet ये हमारी ज़रूरत नहि हुआ करती थी। लेकिन इसका ये मतलब नहि था की दुनिया की ख़बर नहि थी। किसी से मिलने के लिए पहले phone करके जानेकी औपचारिकता नहि थी। फिर आए mobile phones। क्या आपने अभी तक थोड़ा-थोड़ा अपने बचपन को याद करना शुरू कर दिया है ?

    वो हो ता हैबचपन– प्यारा, चिंतामुक्त, उन्मुक्त और सरल। और अगर आपका बचपन ८०स या ९०स में गुज़रा है फिर तो आजका एपिसोड आपको बहुत कुछ याद दिला देगा।

    चलिए आज आपको ले चलती हूँआपके बचपन में।

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    10 min
  • आपके लिए ज़िंदगी में क्या सबसे ज़्यादा मायने रखता है?

    आज बात करते हैं हमारे लिए ज़िंदगी में क्या सबसे ज़्यादा मायने रखता है। कई बार हम ऐसी कई बातों को अपनी ज़िंदगी में इतनी special जगन दी है कि हमें ऐसा लगता है कि उनके बिना सब अधूरा है। मगर वास्तव में चीज़ें जो वाक़ई माईने रखती हैं वो हमेशा हमारे पास होती हैं। वो किसी पर निर्भर नहीं रहती हैं। जैसे ख़ुशी – happiness, संतुष्टि- satisfaction, सब्र- patience, दोस्ती – friendship, और शांति – peace। ये वो बातें है जो किसी भी बाहरी स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। And these are our true possessions. तो आपके लिए ज़िंदगी में क्या सबसे ज़्यादा मायने रखता है। उसे तलाशिए और उस पर काम कीजिए।


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    11 min
  • In conversation with Rajeshwari Dholakia Antani - Ex-Indian Women Cricketer

    Cricket ये एक ऐसा sport है जो हर भारतवासी के दिल में बसता है। दिल तो करता है की हमारी पसंदीदा team या prayers हर ball पर चौके और छक्के मारे मगर उस pressure को सिर्फ़ वही समझ सकता है जिसने उन balls को face किया हो। In this episode, let me take you down the memory lane and unravel the humble beginnings of Indian women’s cricket with my guest. आज मेरे साथ बातों बातों में पर ऐसी ही एक guest हैं जो cricketके प्रति इतनी passionate हैं की उन्होंने एक लम्बे अंतराल के बाद एक बार फिर अपनी दूसरी इनिंग खेलना शुरू किया। एक coach के तौर पर। Please welcome राजेश्वरी धोलकीय अंतानी – aka Coach Raju, Ex-Indian Women Cricketer  and coach for Northwest Cricket Club। हमारी बातचीत के दौरान, राजेश्वरी ने क्रिक्केट से जुड़े कई महावपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की, कई memorable moments बाटें। और इसके साथ ही साथ, उन्होंने cricket और safety से जुड़ी एक बहुत ही valuable tip share की जो हर player को ध्यान में रखनी चाहिए। तो चलिए शुरू करते हैं राजेश्वरी से अपनी बातों के सफ़र को। 

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    1 hr
  • Personal Power
    Personal power ये सुनने में जितना वज़नदार लगता है, वास्तव में उसका महत्व उससे कही गुना ज़्यादा है।Personal power कोई ऐसा trait नहीं  है जो हम by birth लेकर आते हैं। क्योंकि इसमें personal ये शब्द है तो इसका सीधा मतलब है की ये हम पर निर्भर करता है की हम इसे अपनी ज़िंदगी में शामिल करना चाहते हैं की नहीं ।और सिर्फ़ शामिल ही नहीं लेकिन, इसका  अनुशासन के साथ पालन करने के लिए तैयार हैं की नहीं? क्योंकि तभी हमें इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखेंगे। कोई भी चीज़ जब हम स्वयं के लिए करते हैं, और हमें किसी परिणाम की अपेक्षा होती है तब हमारी mental state कैसी है, हम उस परिवर्तन के लिए तैयार है की नहीं ये बहुत माईने रखताहै ।
    1. अपने विचारों को बाटें।
    2. नकारात्मक विचारों को नज़रंदाज ना करें। बल्कि उनको समझें।
    3. अपना support system तैयार करें।
    4. अपने डर को अपनाएँ और उसपर क़ाबू पने की कोशिश करें।
    5. अपने खान पान का ध्यान रखे।
    6. meditation करें, dance करें ।
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    14 min
  • Dr. Hari Joshi - Hindi writer, satirist, novelist and poet

    आज बातों बातों में पर मेरे साथ है, प्रख्यात व्यंगकार डॉक्टर.हरी जोशी। जिनका नाम ही भगवान श्री कृष्ण के नामों में से एक हो, उनके बोल तो सभी को मीठे लगेंगे।मेरे आज के मेहमान भी समय और परिस्थितियों के अनुरूप सटीक शब्दों का प्रयोग कर अपने विचार लेखन के माध्यम से हम तक पहुँचते हैं। ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी है। इन्होंने technical side में जितनी सफलता अर्जित की उतनी ही साहित्य जगत में भी की। ये आधुनिक हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक हैं और अपने तीखे व्यंग्य के लिए जाने जाते हैं। 

    Highlights of the interview: 

    1. Teaching और लेखन में तालमेल कैसे बनाया? 

    2. व्यंग लेखन - इस शाखा को चुनने की कोई ख़ास वजह। 

    3. व्यंग लेखन के कारण आपको किसी कठिनाई का सामना करना पड़ा? 

    4. लेखन, social media, youtube channel - इस तीनों में संतुलन कैसे बनते हैं?  

    5. भारत के बाहर की गई गोष्ठियों में, सम्मेलनों में भाग लेने का अनुभव कैसा था? 

    6. आज भाषा का महत्व कम होता जा रहा है। ऐसे में आप क्या कहना चाहेंगे। 

    7. सभी लेखकों के लिए क्या राय है? 

    You can follow Dr. Hari Joshi  Facebook: Hari Joshi   His 13th satire novel ′′अमेरिकी लालू′′ will be released on September 4th'2021 My social media handles: Twitter: alpana_deo, Instagram: alpanabapat and Facebook: mothersgurukul . आप मेरे  blogs www.mothersgurukul.com पर पढ़ सकते हैं। आप मुझे अपने feedback, suggestions [email protected] पर भी भेज सकते हैं।

    46 min
  • कठिन परिस्थितियों में ख़ुद को शांत कैसे रखें?

    आजकल हमारे इर्द गिर्द इतना कुछ हो रहा है की it is hard to keep calm.आए दिन कोई नयी news होती है। अब तो जैसे लगता हैं pandemic ये पुरानी news हो गई। newsकी ही बात करें तो हमें न्यूज़ देखने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती है। whatsapp, social mediaहमें बिना किसी देरी के सारे updatesदे देते हैं – चाहे हम उन updates को जानना चाहते हो या ना चाहते हो -इसके बारे में हम आगे बात करेंगे। और जैसे माईने शुरूवात में कहा की आज हम बात करने वाले हैं की कैसे हम ख़ुद को कठिन परिस्थितियों में ख़ुद को शांत रखे।

    1. अपनी breathing को कंट्रोल करें।

    2. बाहरी sources से आ रही जानकारी को filter करें।

    3. अपने लिए ऐसी कोई hobby तलाशे या ऐसा routine तय करें जिससे आपको सुकून मिलता हो।

    4. परिस्थिती को समझिए और हम क्या कर सकते है वो सोचिए।

    5. Take a break

    6. खान पान और नींद पर ध्यान दें।

    7. मन की बातें बाटें

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    12 min
  • यह एक बात किसी से कभी ना कहें

    सच सच बताइए, क्या आपके मन में अपनी किसी दोस्त के बारे में ये विचार कभी नहीं आते हैं की वो कितनी lucky है या काश मेरी life भी उसके जैसी ही होती? मेरा ऐसा मानना है की हमें ऐसा कभी भी किसी के बारे में ना सोचना चाहिए ना कहना चाहिए। अब इसमें क्या बुराई है? -  हम तो दूसरे के बारे में अच्छा ही तो सोच रहे हैं। मगर हमें क्या पता की जिसे हम अच्छी और एक perfect जिंदगी कह रहे हैं या समझ रहे हैं, वो वाक़ई में वैसी है। 

    ऐसा कोई नहीं है जो ज़िम्मेदारी से मुक्त है। आज वो जहाँ हैं वहाँ तक पहचने के लिए उन्होंने ना जाने कितने ही कठिन दिन देखे होंगे। हो सकता है वो परेशानियों से, कठिनाइयों से जूझ रहे होंगे लेकिन उन सब का सामना वन मुस्कुराहट के साथ कर रहे हैं। उसकी मेहेनत को सराहे।

    ये कहना कि मैं तुम्हारे लिए ख़ुश हूँ ये अलग है और ये कहना की काश मैं भी तुम्हारे जैसा होता- ये एकदम अलग बात है। इस लिए दूसरे से ख़ुद की तुलना करने की बजाए ख़ुद पर ध्यान दे। ये सोचे की आप ख़ुद को, अपनी परिस्थिती को कैसे अच्छे से और अच्छा बना सकते है। फिर शायद ये ख़याल काम आएगा की काश मेरी ज़िंदगी उसके जैसी होती। 

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    9 min
  • Praggatti Rao- consultant psychologist and personal growth and transformation master coach at Educoncepts India Initiatives
    मेरी आज की जो मेहमान हैं वो जिस क्षेत्र से जुड़ी है, it is one of my favorite fields तो connectionहोना तो बनता ही है– psychology. Infact, NLP जिसका मैंने कई बार ज़िक्र किया हैं, इस term के बारे में, इस field के बारे में पहली बार मैंने इनसे ही सुना। Please welcome Praggatti Rao - mentor & principal consultant at Educoncepts India Initiatives, psychologist, psychometric analyst, neurological transformation coach, blogger, and author.
    Highlights of the interview:
    1. Reason behind choosing this field as a career, and how did Educoncepts India Initiatives started?
    2.Her tips on how to handle Children and adolescents. With a specialization in Behavioral and Positive Psychology with Child and adolescent psychology and psychometrics as the add ons, what are her suggestion about it.
    3.How to handle failure? Praggatti shared her inputs for parents and kids. What steps can parents take to prevent their children from going to the extreme and taking their lives?
    4.Why building a good rapport between parent and child is important.
    5.She gives online training to kids, young adults, women, corporates. While doing this, what are some common issues she came across?
    6.She also discussed the “Three life positions - Others, Self, Observer”. Also, how it can help you see life with clarity making the right decisions at the right time.
    7.She talked about her recently published book -  Raising The Parent
    8.What personality traits are crucial for someone interested in building a career in Psychology or NLP.
    If you want to follow Praggatti Rao,
    Website: www.praggattirao.com, educonceptsindia.com,Facebook: Praggatti Rao,Twitter: Praggatti, Instagram: praggattirao, Raising The Parent: Kindle
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    49 min

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बातों बातों में पर हम बात करते हैं कुछ हल्के-फुल्के मगर संजीदा, और मज़ेदार विषयों पर जो हमारी दैनिक ज़िंदगी का हिस्सा होते हैं मगर बड़े बड़े मुद्दों को सुलझाते हुए हम इनके बारे में बात करना…