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जब पति-पत्नी दोनों को अपने रिश्ते और कर्तव्य का आभास हो तभी वह रिश्ता प्रेमपूर्वक चल सकता है I
दान अर्थात् केवल देना होता है। यदि लेना-देना हुआ तो व्यापार हो जायेगा, फिर वह दान नहीं होगा।
एक बुद्धिमान व्यक्ति बदलाव से नहीं डरता। एक बुद्धिमान व्यक्ति सुधार करने और सही करने की हमेशा कोशिश करता है I
लज्जा और ग्लानि से हम मनुष्य बने रहते हैं और मनुष्य की लोकबद्धता में जब कमी आती है तब लज्जा और ग्लानि भी नहीं रहती है I
यह सत्य है कि जब मनुष्य में किसी प्रश्न को लेकर भय का संचार होता है तभी उसमें दूसरों से प्रेम करने की इच्छा जागृत होती है।
रोटी,कपड़ा और मकान मनुष्य की सबसे बड़ी जरूरत है लेकिन वह भी हम बिना रोजगार के हासिल नहीं कर सकते।
सफल लोग भी आम लोगों की तरह साधारण इंसान होते हैं। वे ऐसे इंसान होते हैं, जिन्हें अपने आप पर विश्वास होता है, अपनी क्षमताओं में विश्वास होता है और जो मानते हैं कि वे सफल हो सकते हैं।
आचार्य चाणक्य कह्ते है कि विपत्ति किसी भी मनुष्य पर आ सकती है इसलिए व्यक्ति को बुरे दिनों का सामना करने के लिए धन का संचय करना चाहिए I विपत्ति के समय़ व्यक्ति की सूझबूझ ही महत्वपूर्ण होती है I आपकी सूझबूझ से ही उस कठिन समय का उचित सामना किया जा सकता है I
आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कहा है ‘दुनिया में ऐसा किसका घर है, जिस पर कोई कलंक नहीं, वो कौन है, जो रोग और दुख से मुक्त है,सदा सुख किसके पास रहता है?
एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है यदि वह किसी मुर्ख को उपदेश देता है, यदि वह एक दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करता है या किसी दुखी व्यक्ति के साथ अतयंत घनिष्ठ सम्बन्ध बना लेता हैI
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