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मनुष्य को अपने अंदर सीखने की चाहत कभी भी खत्म नहीं करनी चाहिए। ऐसा करके वो अपने अंदर से जिज्ञासा को खत्म कर देता है।
असल जिंदगी में किसी भी व्यक्ति को अपने अंदर कोई भी कमी नहीं दिखती है। उसे लगता है कि वो जैसा है वैसा ही परफेक्ट है। अगर सामने वाला आपका करीबी है और आप में कोई कमियां निकालता है तो आपको बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा।
मित्र और मित्रता दोनों में ही आदर भाव होना चाहिए। जब इसमें कमी आने लगती है तो मित्रता कमजोर पड़ती जाती है।
किसी व्यक्ति को उतनी ही अहमियत दें, जितनी वो आपको देता है तभी आपका जीवन सुकून से बीत सकता है i
एक सच्ची जीवनसाथी विपरीत परिस्थितियों में कभी भी अपने पति का साथ नहीं छोड़ती, बल्कि उसको सकारात्मक बनाकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है I
यह माना जा सकता है कि बच्चे की माता के कर्म तथा विचार भी होने वाले बच्चे के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
आचार्य कहते है कि व्यक्ति को व्यवहार से इतना सीधा और सरल नहीं होना चाहिए जिससे लोग आपका फायदा उठा ले l ऐसे लोग खुद बहुत अच्छे होते हैं, लेकिन ये दुनिया उनके जैसी नहीं होती I
जो व्यक्ति जीवन में गुरु का अपमान करता है वह कभी सफल नहीं हो सकता I याद रखें किताबों के साथ-साथ आपकी सही शिक्षा सिर्फ गुरू के सही मार्गदर्शन से ही पूर्ण होती है इसलिए अपने गुरू का हमेशा आदर करें I
आचार्य के मुताबिक छात्र जीवन में आलस को खुद पर कभी हावी नहीं होने देना चाहिए l ये जीवन तपस्या का समय होता है और इसमें आलस की वजह से छात्र सही तरह से शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाता I
आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस घर में प्रेम और खुशी का वास होता है, जहां रिश्तों में एक- दूसरे के प्रति सम्मान होता है वहां सुख और समृद्धि बनी रहती है और वहां मां लक्ष्मी ठहरती हैंI
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