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अगर शत्रु आपसे अधिक बलशाली है तो उसके अनुकूल व्यवहार कर उसे परास्त किया जा सकता है। शत्रु दुष्ट स्वभाव का है तो उसका विरोध करके और अगर शत्रु आपके समान बल वाला है तो उसे विनय से वश में किया जा सकता है।
किसी व्यक्ति की परख या पहचान इस बात से होती है कि वह कितना त्याग करता है, उसका चरित्र कैसा है, उसमें गुण कौन से है और उसका कर्म कैसा है।
जिस तरह कम परश्रिम या मेहनत व्यक्ति को असफल करती है, ठीक उसी तरह अधिक मेहनत भी व्यक्ति को उसकी मंजिल तक पहुंचने नहीं देती।
धर्म का अर्थ होता है सत्य के साथ रहना, झूठ के साथ नहीं, सदा सत्य बोलने से व्यक्ति की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता कायम रहती है।
जीवन में समय की क्या उपयोगिता है इसका ज्ञान इंसान को तब होता है जब वह समय को गंवा चुका होता है।
दोस्तों हमारे इस पॉडकास्ट चाणक्य नीति में हम आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई नीतियों का विश्लेषण करते हैं।इसके जरिए मेरा यह एक छोटा सा प्रयास रहेगा कि कैसे आप आचार्य चाणक्य की नीतियों पर चलके जीवन को सफल बना सकते है।
आलस्य हमारी इच्छाशक्ति को, संकल्प-शक्ति को शिथिल बनाता है। आलसी व्यक्ति में न तो आत्मबल होता है, न ही आत्मविश्वास। वह भग्यवादी बन जाता है। अपने दोषों, अपनी त्रुटियों को उत्तरदायी न मानकर अपने कष्टों के लिए भाग्य, प्रारब्ध,या हाथ की रेखाओं को दोष देता है।
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