अपने जीवन काल में हम न जाने कितने लोगों का उपकार लेते हैं किसी पर उपकार करते हैं कहीं प्रार्थी होते हैं और कहीं किसी को क्षमा देने का वजूद रखते हैं। कहीं प्रशंसनीय होते हैं तो कहीं कोई दूसरा प्रशंसा का हकदार होता है। परंतु जीवन की आपाधापी में बहुत कुछ हम शोक सभा के लिए ही संचित करके रह जाते हैं श्रद्धांजलि के रूप में। इसी का एहसास इस कहानी में जब इंद्रनील को होता है फिर
यह एक सच्ची कहानी है। हमारे समाज में मैरी गोम्स जैसे कितने ही पात्र होते हैं जिन का योगदान सराहनीय होने के बावजूद भी किसी के ध्यान में नहीं आता। अपने समाज के उद्धार की ओर उठा हुआ छोटा सा कदम भी पहली सीढ़ी बन सकता है।
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