Harmonized_Words

Harmonized_Words

By Akshara JainArtsPerforming Arts
Download on the App Store

Harmonized_Words episodes

  • "आख़िरी चाय"
    कितना अजीब शब्द हैं न "आख़िरी" जैसे इसके होने में कभी खुशी है तो कभी गम, कभी विरह हैं तो कभी मिलन... कभी न कभी आपने भी कोई शाम किसी अपने के साथ एक चाय की चुस्की ली तो होगी, अगर वो आख़िरी थी तो आप इस कविता से ज़रूर उस लम्हें को याद कर पाएंगे और अगर कभी कोई आख़िरी चाय नहीं हुई हैं तो उम्मीद करूंगी आपकी अपने अपनो के साथ हर चाय आबाद रहें......
    3 min
  • कुछ बाक़ी हैं!
    जिंदगी के किसी मोड़ पर जब निराशा के बादल छा जाते हैैं तब कहीं सूरज की किरण उन बादलों को छाट कर हौले से आकर कहती हैं कुछ बाक़ी हैं..... क्योंकि चलते रहने का ही तो नाम हैं ज़िन्दगी!
    3 min

About Harmonized_Words

From the publisher's feed

"I would define poetry as the words with the Rhythmical Creation of Beauty."