इतिहास पुराण की कथाएं Itihas Puran Ki Kathaye

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इतिहास पुराण की कथाएं Itihas Puran Ki Kathaye episodes

  • Nahush Part 3

    On the banks of the Saraswati river at the foothills of the Himalayas, Nahusha lived in the form of a huge snake in the forest and ate the animals and humans that came near him. Due to the curse that is supposed to last for a thousand years, Nahusha had entered the Dwapar Yuga in his snake form. 

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    15 min
  • Nahush katha- Part 2

    Dev Indra had been ruling Swargalok for ages and made him proud as he was blinded by the wealth and prosperity that he owned. Indralok, it was always a festive environment and on one such occasion, Indra Dev was sitting on his seat with Devi Shachi. They were enjoying the dances and songs performed by Gandharvas. Everyone present there, the Gandharva, maraud gan, rishi munis, and apsaras worshiped Indra all time long. Dev Indra was already lost in his pride and with everyone worshiping him, he became even more egoistic.

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    14 min
  • Nahush janm katha ( नहुष जन्म कथा) Part-1

    The dynasty of Chandravansh was established by Ila, the first child of
    Vaivasvata Manu and Pururava, son of Chandraputra Buddh. Ayu, son of
    Maharaja Pururava and Apsara Urvashi, took over the kingdom. Ayu was a
    judicial and dedicated king who followed Rajdharma the same way as his
    father. Even after attaining so much opulence and splendor, the heart of the
    king was always saddened as he was childless. He would worry about his
    kingdom as without an heir, who would look after his dynasty?

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    9 min
  • Janamejay ka naag yagya Part-5

    जनमेजय का नागयज्ञ शृंखला में अब तक आपने जाना कि किस तरह जनमेजय को सरमा कुतिया ने शाप दिया, कैसे जनमेजय ने अपने पुरोहित सोमश्रवा को ढूँढ़ा। उत्तंक और जनमेजय की भेंट होना, उत्तंक की तक्षक से द्वेष भावना और परिक्षित की मृत्यु। इन सभी अंकों की अन्तिम कड़ी जनमेजय के नागयज्ञ से आकर जुड़ती है। ये सभी घटनाएँ एक बड़ी घटना को जन्म दे रहीं थीं। आइए इस शृंखला की अन्तिम कड़ी की शुरुआत करें।

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    9 min
  • Janamejay ka naag yagya Part-4 (आस्तिक मुनि का जन्म)

    हमने अभी तक जनमेजय और उससे जुड़े सभी पहलुओं को जाना परन्तु नागों के द्वारा नागयज्ञ को रोकने के क्या प्रयास किए गए और उन्होंने इस यज्ञ में व्यवधान उत्पन्न करने के लिए कैसे प्रयोजन बनाए इस विषय पर जिज्ञासा होना बहुत ही आम है। अपनी माता से शाप पाकर नागों को अपनी नियति का भान बहुत पहले ही हो चुका था परन्तु नियति को अपने कर्मों के प्रभाव से मार्ग बदलने पर कैसे विवश किया जा सकता है इसकी चर्चा हम आज के अंक में करेंगे।

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    7 min
  • Janmeyjay ka naag yagya Part-3 (राजा परिक्षित)

    जनमेजय का नागयज्ञ के पिछले अंक में आपने जाना कि कैसे जनमेजय की भेंट उत्तंक से हुई और उत्तंक का तक्षक से क्या द्वेष था। परन्तु सर्वप्रथम प्रश्न यह आता है कि राजा परिक्षित को ऐसा शाप किसने दिया जिस कारण वो तक्षक के दंश का शिकार हुए और उनकी मृत्यु हो गई। इस अंक में हम राजा परिक्षित की कथा के विषय में चर्चा करेंगे और जानेंगे परिक्षित की मृत्यु का कारण।

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    9 min
  • Janamejay Naag yagya Part-2 (उत्तंक ऋषि और तक्षक)

    तय नियति है तो होनी होगी वही

    बँध गए इसमें तो शेष परिणाम है

    जनमेजय का नागयज्ञ के पिछले अंक में आपने जाना कि किस तरह जनमेजय को सरमा ने शाप दिया और जनमेजय ने अपने पुरोहित की खोज कैसे की। इस अंक में हम चर्चा करेंगे कि किस तरह जनमेजय को नागयज्ञ करने की प्रेरणा मिली और उत्तंक का तक्षक से द्वेष कैसे हुआ।

     

    महर्षि आयोदधौम्य के तीन शिष्य थे — उपमन्यु, आरुणि पांचाल तथा वेद। ऋषि वेद ने अपने गुरु आयोदधौम्य की आज्ञा का पालन करते हुए उनकी बहुत सेवा की जिसके परिणामस्वरूप वे स्नातक होकर गुरुगृह से लौट आए। गृहस्थाश्रम में आकर आचार्य वेद के पास तीन शिष्य रहा करते थे। उन्होंने कभी अपने शिष्यों से उस भाँति का कोई कार्य नहीं कराया था जो उन्हें अपनी छात्रावस्था में करना पड़ा। जनमेजय और पौष्य ने आचार्य वेद को अपना उपाध्याय बना लिया।

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    11 min
  • Janmeyjay nag yagya (जनमेजय नागयज्ञ)Part-1

    महाभारत, कौरवों और पाण्डवों के बीच लड़ी गई अनोखी गाथा। लेकिन पाण्डवों के बाद कुरु वंश का क्या हुआ? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके प्रति बहुत लोगों की रुचि होगी। अर्जुन के पुत्र का नाम अभिमन्यु था और अभिमन्यु का पुत्र परिक्षित हुआ। परिक्षित के चार पुत्र हुए - जनमेजय, श्रुतसेन, उग्रसेन और भीमसेन।  शमीक ऋषि के साथ हुए वृत्तान्त के कारण उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि ने परिक्षित को शाप दे दिया जिसके पश्चात तक्षक के दंश से परिक्षित की मृत्यु हो गई। इस कथा के विषय में जब जनमेजय को भान हुआ तो उन्होंने नागयज्ञ करने का मन बनाया जिसमें सभी नागों की आहुति दी जानी थी। नागों की यह दशा उन्हीं की माता के शाप के कारण होने वाली थी। हम महाभारत की जिस कथा को जानते हैं, यह कथा वैशम्पायन ऋषि ने जनमेजय के नागयज्ञ के दौरान ही सभी उपस्थित लोगों को सुनाई थी।

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    7 min

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नमस्कार श्रोताओं ! सूत्रधार आपके लिए लेकर आया है, इतिहास पुराण पोडक्स्ट। इस पॉडकास्ट के माध्यम से हम आप सभी को अनेकों पौराणिक कथाओं से जोड़ने वाले है। ये कथाएं महाभारत, शिव पुराण, रामायण जैसे…