Kahani Wali Kudi !!!(कहानी वाली कुड़ी)

Kahani Wali Kudi !!!(कहानी वाली कुड़ी)

By Sukhnandan BindraArtsBooks
Download on the App Store

Kahani Wali Kudi !!!(कहानी वाली कुड़ी) episodes

  • स्वकथा epi -26 (Rasidi Ticket part- 26)

    मैंने बार बार एक ही लफ़्ज़ लिखा था साहिर... साहिर... साहिर...। इस दीवानगी के बाद घबराहट हुई कि सवेरे जब अखबार में तस्वीर छपेगी ,तस्वीर वाले काग़ज़ पर यह नाम पढ़ा जायेगा ,कैसी क़यामत आएगी।

    साहिर मुझ से मिलने आता था ,आकर चुपचाप सिगरेट पीता रहता था। राखदानी जब टुकड़ों से भर जाती थी तो चला जाता था ,और उसके जाने के बाद मैं अकेली उन टुकड़ों को जला कर पीती थी


    15 min
  • रसीदी टिकट epi-25
    मेरे पास जो कुछ था,अगर आज बर्फ़ से दब गया है,तो ये बर्फ़ जब पिघलेगी,इसके नदी नाले वे होंगे जो एक ईमान से ,हाथों में नए कलम थामेंगे,और उन कलमों की शिद्दत में मेरा वह कुछ भी सम्मिलित होगा ,जो आज चुप की बर्फ़ के नीचे दबा हुआ है।
    14 min
  • अपराधी कौन
    ग़लतफ़हमियों से भी मर जाते हैं रिश्ते... हर बार कसूर गलतियों का नहीं होता 
    what's up Zindagi में हैं वो कहानियां जो हम पढ़ते है सोशल मीडिया पर, ये कहानियां whatsapp पर खूब शेयर की जाती हैं। ये कहानियां कहां से आती हैं,इनको किसने लिखा है यदि आपको ज्ञात हो तो प्रमाण सहित कमेंट्स में बताएं। description में लेखक को पूर्ण क्रेडिट दिया जाएगा
    5 min
  • "The Great" Filmi Show "KEDAR SHARMA"

    केदार शर्मा हिंदी फिल्म जगत की नीव का पत्थर कहे जाते हैं। मूक फिल्मों के दौर से लेकर सन 1990 दशक तक हिंदी सिनेमा के हर दौर के साक्षी रहे केदार शर्मा फिल्मों के हर पक्ष के जानकार थे। अभिनेता ,फिल्म निर्माता- निर्देशक लेखक और गीतकार केदार शर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी फनकार हुए हैं। केदार शर्मा पर केंद्रित "द ग्रेट" फ़िल्मी शो के इस अंक में आप केदार शर्मा द्वारा लिखे गए गीत भी सुनेंगे। ( सिर्फ एक गीत तोरा मन दर्पण कहलाये साहिर लुधियानवी द्वारा लिखित है ,बाकी सभी गीत केदार शर्मा द्वारा रचित हैं )

    13 min
  • .जुबान (Zuban)

    तल्ख़ कर दी है ज़िंदगी जिस ने

    कितनी मीठी ज़बान है प्यारे,

    जंग छिड़ जाए हम अगर कह दें 

    ये हमारी ज़बान है प्यारे 

     

    4 min
  • एक से दस(Ek se Dus)
    what's up Zindagi में हैं छोटी छोटी कहानियां, वो कहानियां जो शेयर की जाती हैं सोशल मीडिया के बड़े बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर,वो कहानियां जो शेयर की जाती हैं व्हाट्सएप पर।
    ये कहानियां कहां से आती हैं , इन्हे किसने लिखा है इस बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है।
    यदि लेखक का पता चले तो प्रमाण सहित मेल करें,लेखक को क्रेडिट दिया जाएगा।
    ......कहानी वाली कुड़ी
    3 min
  • रसीदी टिकट epi-24 (Rasidi Ticket ,Amrita Pritam's biography part 24)

    एक उड़ता हुआ कबूतर आया और उसने मेरी गोद में शरण ली। देख उसके पीछे एक बाज भी था,और वह मुझसे कबूतर को मांग रहा था।

    बाज ने कहा ,'अगर कबूतर नहीं देती तो अपने बदन का मांस तोल कर दे दे।'


    मेरी सारी रचनाएँ ,क्या कविता और क्या कहानी और क्या उपन्यास ,मैं जानती हूँ ,एक नाजायज़ बच्चे की तरह हैं

    मेरी दुनिया की हक़ीक़त ने मेरे मन के सपने से इश्क़ किया और उनके वर्जित मेल से ये सब रचनाएँ पैदा हुईं


    कुमार जब अलका को बताता है की वह शरीर की भूख मिटाने के लिए कुछ दिन एक ऐसी औरत के पास जाता रहा है ,जो रोज़ के २० रुपये लेती थी ,और जब अलका कहती है। ......

    9 min
  • रसीदी टिकट Epi-23 (Rasidi Ticket,Amrita Pritam's Biography part -23)

    एक कटोरी धूप को मैं एक घूँट में ही पी लूँ

    और एक टुकड़ा धूप का मैं अपनी कोख में रख लूँ .....


    और सूरज से धारण किए गर्भ में से सूरज के पैदा होने तक यह ज़िक्र पहुंचा ..... कोठरी दर कोठरी मैं रोज़ सूरज को जन्म देती .........

    ------रसीदी टिकट पृष्ठ संख्या १०८

    10 min
  • रसीदी टिकट Epi -22 (Rasidi Ticket ,Amrita pritam's Biography part-22)

    'ओन' सूरज का एक नाम था ,इसी लिए फ़िनिशियन्स ने जब यूरोप में एक नयी धरती की खोज की ,उसका नाम ऐल -ओन-डोन रखा ,जो आज लन्दन हैं।



    इंग्लैंड की जड़ें हिब्रू भाषा में हैं। बैल के लिए हिब्रू भाषा में 'ऐंगल' शब्द हैं। नई खोजी हुई धरती को उन्होंने ऐंगल-लैंड का नाम दिया ,जो आज इंग्लैंड है।


    नींद के होठों से जैसे सपने की महक आती है

    पहली किरण रात के माथे पर तिलक लगती है

    हसरत के धागे जोड़ कर शालू-सा हम बुनते रहे

    विरह की हिचकी में भी हम शहनाई को सुनते रहे

    ----अमृता प्रीतम

    12 min
  • रसीदी टिकट Epi -21 (Rasidi Ticket ,Amrita pritam's Biography part-21)

    1975 में मेरे उपन्यास "सागर और सीपियाँ के आधार पर जब 'कादम्बरी' फिल्म बन रही थी तो उसके डायरेक्टर ने मुझसे फिल्म का गीत लिखने के लिए कहा। ... जब मैं गीत लिखने लगी तो अचानक वह गीत सामने आ गया ,जो मैंने 1960 में इमरोज़ से पहली बार मिलने पर अपने मन की दशा के बारे में लिखा था। ..... तब मुझे लगा जैसे चेतना के रूप में मैं पन्द्रह बरस पहले की वह घड़ी फिर से जी रही हूँ


    अम्बर की इक पाक सुराही ,बादल का एक जाम उठाकर

    घूँट चांदनी पी है हमने ,बात कुफ़्र की,की है हमने


    कैसे इसका क़र्ज़ चुकाएँ ,मांग के अपनी मौत के हाथों

    यह जो ज़िंदगी ली है हमने ,बात कुफ़्र की, की है हमने


    अपना इसमें कुछ भी नहीं है ,रोज़े -अज़ल से उसकी अमानत

    उसको वही तो दी है हमने ,बात कुफ़्र की, की है हमने

    17 min

About Kahani Wali Kudi !!!(कहानी वाली कुड़ी)

From the publisher's feed

*कहानीनामा( Hindi stories),