कथाकार (Storian Hindi)

कथाकार (Storian Hindi)

By Vivek Dutta MishraArtsBooks
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कथाकार (Storian Hindi) episodes

  • पिता और पुत्र (कविता)

    आज पिता दिवस के अवसर कुछ अनुभूति एक कविता के रूप में प्रगट हुआ। ये मेरे पापा के विषय में है पर कदाचित इसमें आपको अपने पिता की झलक भी मिल जाए और आप भी मेरे शब्दों में आपनी स्वयं की अभिव्यक्ति को ढूंढ पाएं। 

    आपके विचार आपके शब्द में हम तक अवश्य बताएं। 

    5 min
  • युद्ध

    आज जब विश्व एक युद्ध के दौर से गुजर रहा है और हम दूर से बैठ रक्तपात का तमाशा देख रहे हैं तो युद्ध और आपनी नीति का विश्लेषण करने के क्रम में  इस कविता का जन्म हुआ। 

    4 min
  • दिव्यास्त्र का वो असली स्वरूप जिसे आपको किसी ने बताया नहीं

    आज के कथाकार, चाहे वो उपन्यासकार हों अथवा टीवी धारावाहिक व सिनेमा के निर्देशक, कदाचित दिव्यास्त्र के महत्ता को समझ ही न सके। उनकी माने तो पौराणिक काल के  दिव्यास्त्र आज के पक्षेपास्त्र अथवा परमाणु अस्त्रों के आद्य सवरूप रहे थे, या किसी विशेष प्रकार के रसायनयुक्त तीर या कोई जादुई अस्त्र जो धनुष की प्रत्यंचा खींचने मात्र से प्रगट हो जाती थी। वस्तुतः ये सारी कल्पनाएं सिरे से ही निराधार हैं और प्राचीन  प्रामाणिक संदर्भों से मेल नहीं खाते  हैं।

    दिव्यास्त्र आज के आयुधों की भांति रसायन या भौतिक उर्जा से परिपूर्ण कोई विनाश-मृत्यु के औजार नहीं थे, दिव्य थे, चेतन थे, सूक्ष्म थे। उनकी महत्ता विनाश की परिधि बढ़ाने में नहीं कम करने में थी। महाभारत के युद्ध के उपरांत भय  वो क्रोध से भरे अश्वाथामा ब्रह्मास्त्र का संधान करते हैं। उनका लक्ष्य होता है देवी उत्तरा के गर्भ में पोषित हो रहा एक शिशु। ध्यान दें सम्पूर्ण पांडव शिविर नहीं, उत्तरा भी नहीं, उसकी गर्भ में पल रहा शिशु मात्र! और उस वक्त अश्वथामा वहाँ से कोसों दूर था। क्या आज के कोई भी अस्त्र ऐसा करतब दिखला सकते हैं? भयानक विनाश नहीं, एक अति सूक्ष्म नियंत्रित संधान?

    आइए समझने की कोशिश करते हैं दिव्यास्त्र का वो वास्तविक स्वरूप जो आजके ज्यादातर कथाकार की कल्पना से छूट गया। इस स्वरूप के बारे में और अधिक जानने के लिए पढ़ें https://thelostepic.com/amazon  

    #The Mahabharata Project

    #Mahabharata

    #Divyastra

    #महाभारत #दिव्यास्त्र #महाभारत-प्रोजेक्ट #stroian 

    24 min
  • महाभारत: द्रौपदी स्वयंवर भाग २: प्रथम अर्जुन कर्ण युद्ध

    पिछले भाग में ... 

    महाभारत — द्रौपदी स्वयंवर भाग १ — क्या द्रौपदी ने कर्ण को अपमानित किया था?

    द्रौपदी स्वयंवर के पहले भाग में हमने चर्चा की उस बहुचर्चित भ्रांति पर जिसमे कहा जाता है कि द्रौपदी ने कर्ण को स्वयंवर में भाग लेने से मना कर दिया था। ये बहुचर्चित घटना जिसका वर्णन आज के ज्यादातर समकालीन रचनाओं में होता है, उसे विद्वानों ने संदर्भ समीक्षा द्वारा खारिज कर दिया है और सिद्ध किया है कि ये संभव था ही नहीं। 


    इस भाग में ... 

    अर्जुन द्वारा द्रौपदी स्वयंवर को विजित कर लिए जाने के पश्चयात, अपने असफलताओ से तिलमिलाए राजपुरुषों ने तय किया कि वो द्रौपदी को जीवित ही अग्निकुंड में फेंक देंगे। जब कर्ण सहित अन्य राजाओं ने आक्रमण का उपक्रम किया तो बढ़ कर अर्जुन और भीमसेन ने उनका सामना किया और यही पृष्ठभूमि बनी प्रथम अर्जुन-कर्ण द्वंद्वयुद्ध का। 

    इस भाग में हम चर्चा करेंगे इसी भीषण युद्ध पर |



    मूल विषयवस्तु 

    महाभारत , कथाकार , महाभारत-प्रोजेक्ट , द्रौपदी , कर्ण , अर्जुन , द्रौपदी  स्वयंवर, Mahabharata, Indian Epic, Karna, Arjuna, Draupadi, Draupadi's Swyamvar



    27 min

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