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आज का सुविचार Ep 02 I ऐसे मिलेगी आपके पंखो को उड़ान ॥ आज सुनते है प्रकृति मे छुपी कई सीखो मे से एक सीख जो उजागर करती है एक कहानी I जीवन जीने की कला हमे जीवन के संघर्ष से ही सीखने को मिलती है I
Suvichar Ep 01: समस्याएं अक़्सर उतनी ताक़तवर नहीं होती जितना हम उन्हें मान लेते हैं...एक नयी शुरुआत, एक और कोशिश, और आप पायेंगे खुद को कमयबियों के शिखर पर .... जय हिन्द , जय भारत I
Beautiful song Lord ganesh. jaidev jaidev jai mangal murti | Shendur Lal Chadhayo Achchha Gajmukhko | जयदेव जयदेव जय मंगल मूर्ति आरती | सुख करता दुख हर्ता आरती | सुखकार्ता दुखरता | bappa morya re | Ganpati Bappa Morya | गणपति बाप्पा मोरया | Jai Dev Jai Dev | Shri Siddhivinayak Aarti | jaidev jaidev jai mangal murti | Ganesh Aarti | Jaidev Jaidev | गणेश आरती | जयदेव जयदेव | sukh karta dukh harta aarti | sukhkarta dukhharta full aarti | ganesh aarti jai dev jai dev | ganpati aarti. Please subscribe to my channels Music Courtsy - Vikas Kumar
Lyrics: Sukh karta dukhharta Varta vighnachi Noorvi poorvi prem krupya jayachi Sarwangi sundar utishendu rachi Kanthi jhalke maad mukhta padhanchi Jai dev jai dev Jai mangal murti Darshan marte maan kamana purti Jai dev jai dev Ratna khachikata para Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi Nurvi Purvi Prem Krupa Jayachi Sarvangi Sundar Uti Shendurachi Kanti Jhalke Mal Mukataphalaanchi Jai dev jai dev Jai mangal murti Darshan marte maan kamana purti Jai dev jai dev Ratnakhachit Phara Tujh Gaurikumra Chandanaachi Uti Kumkum ke shara Hire jadit Mukut Shobhato Bara Runjhunati Nupure Charani Ghagriya Jai dev jai dev Jai mangal murti Darshan marte maan kamana purti Jai dev jai dev Lambodar Pitaambar Phanivar vandana Saral Sond Vakratunda Trinayana Das Ramacha Vat Pahe Sadna Sankati Pavave Nirvani Rakshave Survar vandana Jai dev jai dev 2 Jai mangal murti Darshan marte maan kamana purti Jai dev jai dev Shendur laal chadhaayo achchhaa gajamukha ko Dondil laal biraaje sut gaurihar ko Haath liye gud ladduu saaii sukhar ko Mahimaa kahe na jaay laagat huun pad ko Jai jai jai jai jai Jai jai jii ganaraaj vidyaasukhadaataa Dhany tumhaaro darshan meraa mat ramataa jai dev jai dev Astha sidhi dasi sankat ko bairi Vighan vinashan mangal murat adhikari Koti suraj prakash aise chabi teri Gandasthal Madmastak jhool shashi behari Jai jai jai jai jai Jai jai jii ganaraaj vidyaasukhadaataa Dhany tumhaaro darshan meraa mat ramataa jai dev jai dev Bhaavabhagat se koi sharaNaagat aave Santati sampatti sabahii bharapuur paave Aise tum mahaaraaj moko ati bhaave Gosaaviinandan nishidin gun gaave Jai jai jai jai jai Jai jai jii ganaraaj vidyaasukhadaataa Dhany tumhaaro darshan meraa mat ramataa jai dev jai dev
Beautiful song Lord Krishna. Achyutam Keshavam Krishna Damodaram - krishna bhajan. Achyutam Keshavam lyrics in english: Achyutam Keshavam Krishna Damodaram, Ram Narayanam Janaki Vallabham Achyutam Keshavam Krishna Damodaram Ram Narayanam Janaki Vallabham Kaun Kehte Hai Bhagavan Aate Nahi Tum Meera Ke Jaise Bulate Nahi Achyutam . . . Kaun Kehte Hai Bhagavan Khate Nahi Ber Shabri Ke Jaise Khilate Nahi Achyutam . . . Kaun Kehte Hai Bhagavan Sote Nahi Maa Yashodha ke Jaise Sulate Nahi Achyutam . . . Kaun Kehte Hain Bhagavan Nachte Nahi Gopiyo ki Tarah Tum Nachate Nahi Achyutam . . . Ram Narayanam Janaki Vallabham lyrics in hindi: अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || -2 कौन कहता है भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं | अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलते नहीं | अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || कौन कहता है भगवान सोते नहीं, माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं | अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || कौन कहता है भगवान नाचते नहीं, तुम गोपी के जैसे नचाते नहीं | अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || कौन कहता है भगवान नचाते नहीं, गोपियों की तरह तुम नाचते नहीं | अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || ----------
Guru brahma guru vishnu Guru devo maheshwara Guru sakshath parambrahma Tasmai Shri Gurave Namaha Akhanda mandalaakaaram Vyaaptam yenam charaacharam Tatpadam Darshitam Yena Tasmai Sri Gurave Namaha Govinda Bolo Hari Gopala Bolo Radha Ramana Hari Gopala Bolo Radhe Sham Sita Rame Sita ram radhe shyam Agnyaana Timiraandhasya Gnyaana anjana shalaakayaa Chakshuhu unmeelitam yenam Tasmai Sri Gurave Namaha Radhe Sham Sita Rame Sita ram radhe shyam Govinda Bolo Hari Gopala Bolo Radha Ramana Hari Gopala Bolo All rights of the govind bolo audio song belong to Universal Music. Background Music clip credit Gulshan Kumar and T-Series's Bhushan Kumar's "Govind Bolo"which is sung by Jubin Nautiyal.
Janmashtami Ka Mahatva
माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत करने पर भक्तों की मनोकामना पूरी होती हैं। जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर होता है अगर वो लोग इस दिन पूजा करते हैं तो उन्हें अच्छे फल की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति और संतान प्राप्ति के साथ-साथ दीर्घायु भी होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जनमाष्टमी के दिन बाल गोपाल को झूला झुलाने का भी बहुत ज्यादा महत्व है। लोग मंदिरों के साथ-साथ अपने घरों में भी बाल गोपाल को झूला-झूलाते हैं। कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति कृष्ण जी को झूला झुलाता है तो उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान श्री कृष्ण विष्णु के आठवे अवतार थे कृष्णजन्माष्टमी उनका जनमोत्सव है। योगेश्वर कृष्ण के जन्माष्टमी को भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में मथुरा में जन्म लिए। भगवान श्री कृष्ण स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस पावन पर्व के मौके पर भगवान की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु इस दिन पर मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मथुरा कृष्णमय हो जाता है। मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। ज्न्माष्टमी के दिन स्त्री-पुरुष बारह बजे तक अपना व्रत रखते हैं। इस शुभ दिन पर मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और साथ ही रासलीला का भी आयोजन किया जाता है.
Fast Hanuman Chalisa in less than 10 Minutes I हनुमान चालीसा पढ़ने के फायदे-हनुमान चालीसा पढ़ने से शनि ग्रह और साढे़ साती का प्रभाव कम होता है.हनुमान जी राम जी के परम भक्त हुए हैं. हनुमान-चालीसा एक ऐसी कृति है, जो हनुमान जी के माध्यम से व्यक्ति को उसके अंदर विद्यमान गुणों का बोध कराती है. इसके पाठ और मनन करने से बल बुद्धि जागृत होती है. हनुमान जी कलयुग में जागृत देव हैं और बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देव हैं. राम भक्त हनुमान जी को संकट मोचन कहा जाता है.श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी कंचन बरन बिराज सुबेसा कानन कुण्डल कुँचित केसा हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे काँधे मूँज जनेउ साजे शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जग वंदन बिद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया राम लखन सीता मन बसिया सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा भीम रूप धरि असुर सँहारे रामचन्द्र के काज सँवारे लाय सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई सहस बदन तुम्हरो जस गावैं अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना लंकेश्वर भए सब जग जाना जुग सहस्र जोजन पर भानु लील्यो ताहि मधुर फल जानू प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते राम दुआरे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे सब सुख लहै तुम्हारी सरना तुम रच्छक काहू को डर ना आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हाँक तें काँपै भूत पिसाच निकट नहिं आवै महाबीर जब नाम सुनावै नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरन्तर हनुमत बीरा संकट तें हनुमान छुड़ावै मन क्रम बचन ध्यान जो लावै सब पर राम तपस्वी राजा तिन के काज सकल तुम साजा और मनोरथ जो कोई लावै सोई अमित जीवन फल पावै चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा साधु सन्त के तुम रखवारे असुर निकन्दन राम दुलारे अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा तुह्मरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुख बिसरावै अन्त काल रघुबर पुर जाई जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई और देवता चित्त न धरई हनुमत सेइ सर्ब सुख करई सङ्कट कटै मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करहु गुरुदेव की नाईं जो सत बार पाठ कर कोई छूटहि बन्दि महा सुख होई जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय महँ डेरा पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप I
Sankat Mochan Hanuman Ashtak, The mantra helps in mental relaxation and brings peace to the family, it was written By Tulsidas, he was a greatest devotee Lord Hanuman. During Lord Hanuman childhood he uses to harass the sages while playing outdoor, as he was immensely powerful since then, he got cursed by a sage that he would not be able to use his powers until someone else would make him realize about his powers.By reciting Sankatmochan Hanuman Ashtak, devotees desire get fulfilled making the powering lord realizing his power.In most Lord Hanumanji Temples, this Sankatmochan Hanuman Ashtak is recited after the Hanuman Chalisa. This mantra benefits the individuals who express it, yet additionally gives advantages to their relatives. This mantra helps in mental unwinding and achieves a feeling of harmony in one's family. Reciting this mantra routinely helps in the progress of wellbeing conditions for grown-ups and kids. License-Creative Commons Attribution license Music Credit - Hanuman Bhajan: Sankat Mochan Hanuman Ashtak Singer: HARIHARAN Album: Shree Hanuman Chalisa Music Director: Lalit Sen, Chander Lyrics: Traditional
HANUMAN ASHTAK – A PRAYER TO HANUMANJI IN EIGHT VERSES
Baali ki traasa kapeesa basai giri jaata mahaa prabhu pantha nihaaro
Angad kay sanga layna gayay, siya khoja kapisha yaha baina uchaaro
Rawana traasa-dayi siya ko, saba raakshashi so kahi shoka nivaaro
Baanlagyo ura Laksmana kay, taba praana tajay suta rawana maaro
Rawana juddha ajaana kiyo, taba naaga ki phaasa sabai sira daaro
Bandhu sameta jabai–ahirawana, lay raghunatha pataala sidhaaro
Kaaja kiyay bara daywana kay, tuma beera mahaa prabhu dekhi bichaaro
Laal Deha Laalee Lasay, Aru Dhari Laala Langoora
SIIYAA PATI RAMACHANDRA KI JAI
जय हिंद I स्वतंत्रा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 15 अगस्त की हार्दिक शुभकामनाएं I स्वतंत्रता दिवस का महत्व- 1757 में, ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्लासी के युद्ध में बंगाल के अंतिम नवाब को हराया, जिसने भारत में ब्रिटिश शासन की शुरुआत को चिह्नित किया। भारतीय विद्रोह या स्वतंत्रता का पहला युद्ध 1857 में हुआ था जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक प्रमुख असफल विद्रोह था। वर्ष 1885 में, भारत की पहली राजनीतिक पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन किया गया था। और 1918 में प्रथम विश्व युद्ध के समापन के बाद, भारतीय कार्यकर्ताओं ने स्व-शासन या 'स्वराज' का आह्वान किया। 1929 में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लाहौर की एक सभा में 'पूर्ण स्वराज' या भारत की स्वतंत्रता की घोषणा की। अंत में, ब्रिटिश सरकार और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच सत्र और बैठकों की एक श्रृंखला के बाद, लॉर्ड माउंटबेटन, जिन्होंने पूर्व-स्वतंत्र भारत के अंतिम वायसराय के रूप में कार्य किया, ने प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की। 15 अगस्त 1947 को, लॉर्ड माउंटबेटन ने ब्रिटिश भारत को दो नए स्वतंत्र राष्ट्रों में विभाजित किया; भारत और पाकिस्तान। इसके बाद से हर साल 15 अगस्त के दिन, भारत का राष्ट्रीय ध्वज कई सार्वजनिक स्थानों पर फहराया जाता है; प्रधान मंत्री ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को मनाने के लिए दिल्ली के लाल किले में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण समारोह के साथ ही परेड और लोक-नृत्य की प्रस्तुतियां भी होती हैं। राष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में कई उत्सव होते हैं। स्कूलों और कॉलेजों सहित शैक्षणिक संस्थान, इस दिन के ऐतिहासिक महत्व के बारे में छात्रों को ज्ञान प्रदान करने के लिए एक विशेष समारोह की मेजबानी करते हैं। इस अवसर को मनाने के लिए बच्चे तिरंगे वाली पतंग उड़ाते हैं। Mashup Credits : Singers : Saheba, Pooja Giri, Puja Lucky Sharma Music : Gaurav Singh II {{{{Vandematram Song : CCAttribution Licence}}}
शिव उपासना “रुद्राष्टकम” Shiv prayer rudrashtakm shlok
श्री रुद्राष्टकम महाकवि तुलसीदास जी ने लिखा था | रुद्राष्टक भगवान शिव की उपासना हैं जिसमे उनके रूप, सौन्दर्य, बल का भाव विभोर चित्रण किया गया हैं |रुद्राष्टक काव्य संस्कृत भाषा में लिखा गया हैं | श्रीरामचरितमानस में लिखित 'शिव रुद्राष्टकम'अपने-आप में अद्भुत स्तुति है। अगर कोई भक्त विनय पूर्वक श्रीरामचरितमानस में वर्णित इस स्तुति का पाठ करता है तो शिव जी उससे प्रसन्न हो अपने भक्त को सभी मनोकामना पूरी करने के साथ हर कार्य में विजयी होने का आशीर्वाद भी देते हैं। श्रीरामचरितमानस में लंका विजय से पूर्व भगवान श्रीराम ने शिवजी की 'रुद्राष्टकम' स्तुति का पाठ किया था और रावन पर विजयश्री प्राप्त की थी। अगर किसी के जीवन में परेशानियां है या कोई शत्रु परेशान कर रहा हो तो इस स्तुति का पाठ करने के बाद मिलने वाला शुभफल किसी चमत्कार से कम नहीं होता। इसका पाठ करते समय भावमग्न होकर भगवान शंकर से मन ही मन अपनी कामना को पूरी होने का निवेदन भी करते है। श्रद्धापूर्वक की गई थोड़ी सी प्रार्थना से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं भगवान शिवजी।Song credits : Singer - Dhvani Arora Music - Ramesh Mishra Producer - Baal Kishan Bunty II Introductory Guest Speech- Mrs. Urvashi
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