LIFEARIA

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By Dr. A. BhagwatEducationSelf-Improvement
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LIFEARIA episodes

  • तुम्हें खोने की हिम्मत नहीं है मुझमें, फ़िर भला तुम्हें पाने की ज़ुर्रत क्यों करूँ!

    जानते हो? हर दफ़ा तुम्हें पा लेने के मेरे ख़्वाब, बस तुम्हें खो देने के डर से ही टूटे हैं! तो अब पूरी शिद्दत से चाहती हूं मैं, बरक़रार रखना अपने दिल में तुम्हारी चाहत को ,तुम्हें पाने की कोशिश के बग़ैर! जैसे अक्सर बियाबान जंगलों में ही खिला करती हैं, महकते फूलों की हसीन वादियां, ये जानते हुए भी कि उन्हें देखने कोई नहीं आएगा! कोई आस की बाती जलती रहती है फ़क़त तेल की आख़री बून्द की ख़ातिर,दिये को ख़बर हुए बग़ैर ही! क्योंकि वास्ता उसका रोशनी से हुआ करता है!

    4 min
  • थप्पड़ परम्परा - Thappad

    "थप्पड़ परम्परा!" दिल के नक़्शे को बदल कर रख दिया है, गालों पर पड़े थप्पड़ ने! हाँ! अभी  "थप्पड़" देख रही हूं  मैं! यूँ तो अकेली ही हूँ....! पर यूँ लग रहा है कि जैसे कई कई ...शायद हज़ारों स्त्रियां मेरे भीतर हैं जो देख रही हैं...हज़ारों साल.....कई सदियां....कई युग ...पीछे जाकर! read more - https://www.lifearia.com/thappad/

    3 min
  • ख़्वाहिशों को सिखाइए सब्र का हुनर... कि अभी बहुत ज़रूरतें पूरी करनी हैं

    पूरी होनी चाहिए ज़रूरतें, ख़्वाहिशों को इंतज़ार करने दीजिए..... आख़िर वो सुबह आ ही गई! जिसका हम सभी को था इंतज़ार ! इतने दिनों,महीनों के बाद खुला है लॉक डाउन ! खिले हैं लोग ! और निकल पड़ी हूँ मैं बाज़ार की ओर... जैसे कोई आज़ाद पंछी भरता है नित नई उन्मुक्त उड़ान ! कितना कुछ चाहती हूं मैं, कितना कुछ खरीदना है मुझको ! पर्स टटोला देखा पैसें हैं या नहीं ? हाँ! पर्याप्त हैं! read more - https://www.lifearia.com/unfulfilled-wishes-in-hindi/

    3 min
  • शक्ति और सामर्थ्य | Day 9 | shakti or samrthya

    नमस्कार प्यारे दोस्तों,साथियों,  एक बेहद रुचिकर विषय के साथ हम बढ़ रहे हैं हमारी श्रृंखला की पूर्णता की ओर.... चाहे पूजा हो,पाठ हो,होम हवन हो,तप हो,तपस्या हो,आराधना हो,प्रार्थना हो, अनुष्ठान हो या कर्म कोई .....परन्तु इस सब का कोई न कोई प्रयोजन अवश्य  होता है।  जैसे प्रत्येक क्रिया का कोई न कोई कारण भी होता ही है। वैसे ही जब भी किसी कर्म की पूर्णता की ओर बढ़ते हैं हम .....हमें प्राप्त करना होता है कुछ न कुछ अवश्य....मनुष्य की सबसे बड़ी,महत्वपूर्ण इच्छा, आकांक्षा और महत्वाकांक्षा होती है विभिन्न प्रकार की  शक्तियों को प्राप्त करना! read more - शक्ति और सामर्थ्य

    4 min
  • सुख और आनंद | Day 8 | sukh or anand
    सुख है तो यही है कि दे सकें किसी को कुछ! और पाने के लिए आनंद से अधिक न कुछ!
    जी हां प्यारे दोस्तों, न पेड़ सूखते हैं अपने फल फूल लुटाकर और न नदियां ही सूखती हैं कभी किसी की प्यास बुझाकर! चांद, सूरज कभी निस्तेज नहीं हुए इस धरा को रोशन कर अपनी ऊर्जा से!  कहाँ समंदर खाली हुआ हमें बारिशों से नवाज़ कर! और  कितने समृद्ध हो जाते हैं माता-पिता अपने बच्चों पर अपनी ममता एवं प्यार लुटाकर!  फ़िर भला क्यों रुक जाते हैं हाथ हमारे! बढ़ते नहीं मदद को किसी की ! ये भूल कर कि देने के सुख से बड़ा कोई और सुख है ही नहीं! और ये भी कि जो कुछ भी हम एकत्रित करते रहते हैं, संग्रहित करते रहते हैं आवश्यकता से अधिक! वो एक न एक दिन नष्ट होना तय है! क्योंकि वापसी तो खाली हाथ ही मुमकिन है हमारी! हम देखते हैं कि पंछी नहीं इकट्ठा करते कभी दानें अपने घोसलों में! क्योंकि उन्होंने ही सुना होता है मधुमख्खियों  को  गाते हुए ये गीत कि "ख़ाली हाथ शाम आई है!" जब उनका इकठ्ठा किया हुआ शहद  चुरा ले जाते हैं इंसान ! अथाह धन और सम्पत्ति के बावज़ूद लोभी और कंजूसों को भूखे प्यासे दम तोड़ते! read more
    3 min
  • भाव और संवाद | Day 7 | bhav or sanvad
    बिन सुने कुछ मैं सुनूं!!, बिन बोले कुछ तुम कहो! दो लोगों की ख़ामोशी में गूंजता हुआ संवाद हो! 
    जी हाँ, प्यारे दोस्तों स्वागत है आप सभी का आपके अपने यूट्यूब चैनल लाइफेरिया के इस मंच पर जहां आज  हम सातवीं ज़रूरी बात कर रहे हैं!  खुल रहे हैं एक  बेहद रोचक विषय के पन्ने... तो चलिए करते हैं शुरुआत.... एक बेहतरीन विषय की.....उन बातों की जिन्हें भावों तक पहुंचने के लिए भाषा के पुल की गरज़ ही नहीं होती क्योंकि उनका सफ़र तो तय होता है सीधे दिल से दिल तक और दिमाग़ से दिमाग़ तक!  पर सच कहूं तो ये कोई बहुत बड़ा रॉकेट साइंस नहीं है ! read more
    4 min
  • कर्म और समर्पण | Day 6 | karm or samrpan
    बिन समर्पण भाव के, कर्म न हो साकार! पुष्प तो हर दिन खिलें, सुरभित न हो बयार! 
    स्वागत प्यारे दोस्तों,साथियों, लगातार साथ बने रहने के लिए!  आपने कभी सोचा है प्यारे दोस्तों कि सुबह होते ही कितने सारे काम होते हैं न करने के लिए! यहां तक कि रात को सोने से पहले भी एक लंबी फेहरिस्त होती है हमारे ज़हन में कि ये - ये काम कल निपटाने हैं! ये दुनिया चल ही इसलिए रही है कि कुछ न कुछ चल रहा है हर कहीं! सबकुछ थम नहीं गया! हम सभी के पास अपने अपने काम हैं! हालांकि चाहते तो हम सभी हैं कि हमारे सारे ही काम बेहतरीन हों! पर वास्तव में ऐसा होता नहीं है! read more
    4 min
  • क्षमा और शांति | Day 5 | kshama or shanti
    सुखी निर्विघ्न जीवन की हम लाख़ रखें महत्वाकांक्षा ! पर बिन क्षमा के सम्भव नहीं शांति की आकांक्षा ! 
    नमस्कार प्यारे दोस्तों, एक बार पुनः स्वागत आप सभी का! आस्था ,विश्वास,धैर्य,संयम,उत्साह,उमंग और दृढ़ संकल्प के बाद आज हम पहुंच चुके हैं नौ दिन नौ रातें और ज़रूरी नौ बातों के पांचवे पायदान पर! जहां बात होगी शांति और क्षमा की! जिसके बग़ैर हम सुखों की कल्पना भी नहीं कर सकते! read more
    4 min
  • प्रण और संकल्प | Day 4 | pran or prakalp
    मन का घड़ा जब भरा हो संयम से! विश्वास अटूट,अडिग खड़ा हो! बड़े सपने तो सभी देखते हैं उत्साह से! क्यों न इस दफ़ा संकल्प भी बड़ा हो! 
    नमस्कार प्यारे दोस्तों, आप सभी का बहुत बहुत स्वागत और धन्यवाद मेरे वीडियोज़ को लगातार सुनने,समझने के लिए! तो आइए करते हैं शुरुआत । अक्सर यूं होता है न कि लगभग हर रोज़ ही हमारे मन में जागती हैं कई कई ख़्वाहिशें! दिल ये अरमानों से भला कब खाली रहता है!  फ़िर ख्वाहिशों के पीछे पीछे उग आते हैं हज़ार हज़ार इरादें भी! मगर लाख़ चाहने पर भी इरादें टूट टूट जाते हैं! और अधूरी रह जाती हैं ख़्वाहिशें तमाम! read more
    4 min
  • उत्साह और उमंग | Day 3 | utsah or umang
    "उत्साह और उमंग न हो तो, हो कैसे शुरुआत! बस भावों के रहने से ही,बने न मन की बात!" 
    नमस्कार प्यारे दोस्तों, स्वागत है आप सभी का आपके अपने यूट्यूब चैनल "लाइफेरिया" के इस मंच पर जहां आज हम बात कर रहे हैं "नौ दिन नौ रातें,और ज़रूरी नौ बातें! " जिसके अंतर्गत अबतक हम बात कर चुके हैं आस्था और विश्वास की,धैर्य और संयम की! और आज हम प्रस्तुत हैं उत्साह और उमंग पर बात करने के लिए जिसके अभाव में जीवन के उत्सव की कल्पना भी सम्भव नहीं! जीवन जो हर पल बस बीते  ही जा रहा है !  read more
    4 min

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तुम-सी मैं, मुझ-से तुम, इक दूजे-से हम...