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जानते हो? हर दफ़ा तुम्हें पा लेने के मेरे ख़्वाब, बस तुम्हें खो देने के डर से ही टूटे हैं! तो अब पूरी शिद्दत से चाहती हूं मैं, बरक़रार रखना अपने दिल में तुम्हारी चाहत को ,तुम्हें पाने की कोशिश के बग़ैर! जैसे अक्सर बियाबान जंगलों में ही खिला करती हैं, महकते फूलों की हसीन वादियां, ये जानते हुए भी कि उन्हें देखने कोई नहीं आएगा! कोई आस की बाती जलती रहती है फ़क़त तेल की आख़री बून्द की ख़ातिर,दिये को ख़बर हुए बग़ैर ही! क्योंकि वास्ता उसका रोशनी से हुआ करता है!
"थप्पड़ परम्परा!" दिल के नक़्शे को बदल कर रख दिया है, गालों पर पड़े थप्पड़ ने! हाँ! अभी "थप्पड़" देख रही हूं मैं! यूँ तो अकेली ही हूँ....! पर यूँ लग रहा है कि जैसे कई कई ...शायद हज़ारों स्त्रियां मेरे भीतर हैं जो देख रही हैं...हज़ारों साल.....कई सदियां....कई युग ...पीछे जाकर! read more - https://www.lifearia.com/thappad/
पूरी होनी चाहिए ज़रूरतें, ख़्वाहिशों को इंतज़ार करने दीजिए..... आख़िर वो सुबह आ ही गई! जिसका हम सभी को था इंतज़ार ! इतने दिनों,महीनों के बाद खुला है लॉक डाउन ! खिले हैं लोग ! और निकल पड़ी हूँ मैं बाज़ार की ओर... जैसे कोई आज़ाद पंछी भरता है नित नई उन्मुक्त उड़ान ! कितना कुछ चाहती हूं मैं, कितना कुछ खरीदना है मुझको ! पर्स टटोला देखा पैसें हैं या नहीं ? हाँ! पर्याप्त हैं! read more - https://www.lifearia.com/unfulfilled-wishes-in-hindi/
नमस्कार प्यारे दोस्तों,साथियों, एक बेहद रुचिकर विषय के साथ हम बढ़ रहे हैं हमारी श्रृंखला की पूर्णता की ओर.... चाहे पूजा हो,पाठ हो,होम हवन हो,तप हो,तपस्या हो,आराधना हो,प्रार्थना हो, अनुष्ठान हो या कर्म कोई .....परन्तु इस सब का कोई न कोई प्रयोजन अवश्य होता है। जैसे प्रत्येक क्रिया का कोई न कोई कारण भी होता ही है। वैसे ही जब भी किसी कर्म की पूर्णता की ओर बढ़ते हैं हम .....हमें प्राप्त करना होता है कुछ न कुछ अवश्य....मनुष्य की सबसे बड़ी,महत्वपूर्ण इच्छा, आकांक्षा और महत्वाकांक्षा होती है विभिन्न प्रकार की शक्तियों को प्राप्त करना! read more - शक्ति और सामर्थ्य
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