LIFEARIA

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By Dr. A. BhagwatEducationSelf-Improvement
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LIFEARIA episodes

  • धैर्य और संयम | Day 2 | dhairya or sanyam
    धैर्य और संयम के बग़ैर पकने न पाए फ़सलें भी खेतों में! हमारा विचलित होना न होना, है हमीं के हाथों में!!  
    जी हाँ! प्यारे दोस्तों , आज हम पहुंचे हैं "नौ दिन,नौ रातें! और ज़रूरी नौ बातें!" की दूसरी कड़ी में जिसके अंतर्गत आज हम बात कर रहे हैं धैर्य और संयम की। read more
    4 min
  • आस्था और विश्वास | Day 1 | astha or vishwas
    "बिन आस्था विश्वास के, बस कागज़ के फूल! न सुगन्ध न कोमलता, जमी रहे बस धूल!"  नमस्कार प्यारे दोस्तों, आप सभी को नौ रात्रियों की हार्दिक शुभकामनाएं!  और इसी बहाने आज हम शुरू कर रहे हैं एक नई शृंखला नौ दिन नौ रातें, और ज़रूरी नौ बातें! तो आज पहली कड़ी में हम बात कर रहे हैं आस्था और विश्वास की । read more
    4 min
  • Meditation Poem | चलो भाग चलें भीतर की ओर

    चलो भाग चलें भीतर की ओर..... ये वक़्त जब बाहर निकलना मुमकिन नहीं ! तो क्यों न भीतर ही मुड़ा जाए !  उन रास्तों पर बढ़ाए जाएं कदम जो बाहर से जाते हैं भीतर की ओर.... और पहुंचा जाए वहां  जो हमारी असल ज़मीन है, जो सिर्फ़ हमारी अपनी है ! तो क्या हुआ कि हम अक़्सर पहुंच नहीं पाते हैं वहां ! जहां पनपते हैं हमारे विचार, खिलती हैं हमारी भावनाएं । जहां छुपे बैठे हैं सपने कई ... ढूंढों तो मिलेंगे अपने कई.... सुलझी मिलेंगी गुत्थियां कई.... बंद एहसासों की खिड़कियां कई.... दीवारें कई.... घरौंदे कई .... पर्वत कई..... झरने कई..... मसलें कई......हल कई....... हँसी ख़ुशी की झीलें कई.... ख़ुद से ख़ुद की दूरियां कई.....फासले कई  और read more

    3 min
  • Afternoon Poem | दोपहर hindi

    दोपहरें… जब कपड़े सूख रहे होते हैं आंगन में ! बड़ी – पापड़ धूप के साथ -साथ सरकते रहते हैं इधर -उधर और पूरा की पूरा माहौल , विविधभारती के पुराने गीतों पर आधारित हो जाता है ! सुबह के हो चुके कामों और शाम के न हो चुके कामों के बीच सुस्ताती दोपहरें अक्सर खाली पड़ी रहती हैं बस । ये वही दोपहरें हैं जो माँएं बेटा – बेटियों की पढ़ाई की चिंता में गुज़ारा करती हैं । और जब read more

    4 min
  • Corona Poem | कोविड 19 "नहीं...नहीं!"
    क्या-क्या हो रहा है न इन दिनों ! सोना चाहो तो नींद नहीं ! आँख खुले तो चैन नहीं ! भोजन मिले तो भूख नहीं ! जल मिले तो प्यास नहीं ! फुर्सत में तो हम सभी  हैं पर बेफ़िक्र हममें कोई नहीं ! घण्टों बैठे रहें मगर दिल को कहीं आराम नहीं ! सारा परिवार घर में ही हैं पर हँसी ख़ुशी की शाम नहीं !ऑफ़र तो ढेरों थे पर क्या धंधा ज़ीरो हुआ नहीं !और कारोबारी कैसे बचे ? जब कारोबार ही बचा नहीं ! स्कूल नहीं, कॉलेज नहीं, ऑफ़िस नहीं, बाज़ार नहीं, ज़िंदा लोगों की बस्ती में ,बन्दे सारे ज़िंदा नहीं! तन से कुछ-कुछ ज़िंदा भी हैं पर मन से सारे ज़िंदा नहीं ! आधे जीकर, आधे मरकर हमने जाना सत्य यही कि झूठे सारे रिश्ते नाते, इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं ! read more - https://www.lifearia.com/poem-on-corona-virus-covid-19-in-hindi/
    4 min
  • Gulmohar udash hai | गुलमोहर उदास है! | A Poem
    'हाय-वे’ के किनारे… एक अकेला गुलमोहर ,बस रह गया है! “सड़क चौड़ीकरण” में उसका एक-एक साथी जाता रहा ! बस गुलमोहर ही रह गया है अकेला ! अफ़सोस है उसे अपने किनारे होने का…यूँ चीखा वो तब भी था जब कट रहे थे उसके हमसाये ! -“बख़्श दो इन्हें ! किस बात की सज़ा देते हो?? मगर सज़ा ये ‘उसके’ लिए थी ! अकेले छूट जाने की !
    3 min
  • सोचने वाली बात 06 | ज़िन्दगी यदि सवाल है तो जवाब भी ज़िन्दगी ही होना चाहिए…मौत नहीं !

    ज़िन्दगी यदि सवाल है तो जवाब भी ज़िन्दगी ही होना चाहिए…मौत नहीं! सोचनेवाली बात है न ! कि हमेशा तो नहीं !!! पर हाँ ! अक़्सर सवालों में ही कहीं छुपे होते हैं जवाब भी…..वैसे ही जवाबों का धुआं है, तो यक़ीनन सवालों की आग भी धधक ही रही होगी कहीं!! और जैसे लाजवाब होती हैं बाते कईं …..वैसे ही नहीं खोजे जाते हैं जवाब ,जिनके सवाल नहीं हुआ करते….और इसीलिए बरबस हम कह उठते हैं कई दफ़ा कि “सवाल ही नहीं उठता” (ग़ौर तलब है कि हमारी सोच,हमारा परसेप्शन भी सवालों को जवाब, और जवाबों को सवाल बनाने के लिए पर्याप्त होता है ।)

    4 min
  • What is Importance of Prayer | प्रार्थना का महत्व | हम प्रार्थना क्यों करते हैं ?

    सबसे पहले और सबसे आख़िर में भी जिसकी आवश्यकता बनी रहती है और बनी रहेगी हमेशा, वो सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रार्थना ही है। क्योंकि वही हमारे जीवन का सुदृढ आधार भी है परन्तु दुःखद आश्चर्य है कि हम सभी ने प्रार्थना को केवल डर से, दुखों से,दर्द से, इच्छाओं से,आकांक्षाओं और अपेक्षाओं से ही जोड़े रख्हा है। जबकि सोच कर देखिए यदि केवल कुछ मांगने के लिए ही प्रार्थना में होते हैं हम ,तो हमसे बड़ा कोई याचक नहीं !  Read more - https://www.lifearia.com/importance-of-prayer-in-hindi/

    6 min
  • विचार प्रबंधन | Thought Management | how to think positive ?

    विचार प्रबंधन पर सुनिए विचार by Dr. A. Bhagwat एक विचार बस अभी अभी आया है । बस कुछ  ही क्षणों में ये बीत जाएगा बग़ैर अपनी कोई निशानी छोड़े  और  कोई दूसरा  विचार उसका स्थान ले लेगा फिर कुछ इसी तरह  तीसरा, चौथा  और  पाँचवा विचार ! विज्ञान कहता है कि प्रतिदिन हमारे मन में लगभग  50 हज़ार  विचार आते  हैं ।  और ये सभी हमनें  आमन्त्रित नहीं किए होते  वरन्  स्वतः आगमित होते हैं । हमारे लिए किसी सोचे हुए विषय या विचार  पर भी ; बहुत लम्बे समय तक बने रहना सम्भव नहीं है । कभी शीघ्र और कभी कुछ समयांतर पर कोई दूसरा , तीसरा विचार  बीच- बीच में हस्तक्षेप अवश्य  करता है । फिर हमें स्मरण होता है कि हम किसी विषय विशेष  पर  विचारमग्न थे और हम पुनः उसी विषय पर आने का प्रयास करते हैं । परन्तु  फिर कोई अन्य विचार हमें आकर्षित करता है और ये क्रम चलता रहता है....Read More..https://www.lifearia.com/how-to-think-positive-in-hindi/

    8 min
  • Earth Day Special | पृथ्वी के पक्ष में पेड़ों के हक़ में… | 22 April

    प्यारे दोस्तों, आप सभी को पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !! बात पृथ्वी की होगी तो पेड़ों तक भी पहुँचेगी । वो पेड़ जो लाख़ झड़ चुके पत्तों के बावज़ूद खड़े रहा करते हैं , फ़िर लौटने वाली बहारों की ख़ातिर …कि ज़रुर वो उगे थे कोमलता को लिए …हरदम बदलते मौसमों को बर्दाश्त करते हुए भी…वो बने रहें ,वो बने रहेंगे…कि बने रहना ही फ़ितरत है उनकी….वो यही सिखाते भी हैं कि बने रहो बस……बदलो जितना मुमकिन है बदलना…..छोड़ों जितना मुमकिन है छोड़ा जाना ……उतना ही लो जितना हो ज़रूरी….. https://www.lifearia.com/earth-day-2021-in-hindi/

    3 min

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तुम-सी मैं, मुझ-से तुम, इक दूजे-से हम...