मानव जब संघर्षों से जूझता है या दुविधाओं में घिर जाता है तब हमें किसी ऐसे पथ प्रदर्शक की आवश्यकता होती है जो शोक से शांति तक और मोह से मोक्ष तक सब सिखा दे,
अंधकार में प्रकाश की लौ भी जला दे.....
यदि ऐसे मार्ग दर्शक के रूप में स्वयं ईश्वर आपकी उंगली पकड़ लें और कहें ....
" उठो पार्थ "....मैं हूँ ना
आपके भीतर का सत्य
जीवन के प्रत्येक द्वंद का उत्तर, और
हृदय गति में छिपा समाधान हूँ ....
" मैं कृष्ण हूँ "