Mantratmakam Shri Maruti Stotram मंत्रात्मकम् श्री मारुति स्तोत्रम् ★
यह एक मंत्र गर्भित स्तोत्र है जिसका अर्थ है कि इस स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति मंत्र के एक अक्षर से शुरू होती है। यदि हम इस स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति का पहला अक्षर पढ़ें तो हमें पूरा मंत्र इस प्रकार प्राप्त होता है।
• ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा । •
मंत्र गर्भित स्तोत्र अपने कार्य में बहुत शक्तिशाली होते हैं और तत्काल परिणाम देते हैं। और यह स्तोत्र कोई अपवाद नहीं है।
स्तोत्र:
ॐ नमो वायुपुत्राय भीमरूपाय धीमते I
नमस्ते रामदूताय कामरूपाय श्रीमते II १ II
मोहशोकविनाशाय सीताशोकविनाशिने I
भग्नाशोकवनायास्तु दग्धलङ्काय वाग्मिने II २ II
गतिनिर्जितवाताय लक्ष्मण प्राणदाय च I
वनौकसां वरिष्ठाय वशिने वनवासिने II ३ II
तत्त्वज्ञान सुधासिन्धुनिमग्नाय महीयसे I
आञ्जनेयाय शूराय सुग्रीवसचिवाय ते II ४ II
जन्ममृत्युभयघ्नाय सर्वक्लेशहराय च I
नेदिष्ठाय प्रेतभूतपिशाचभयहारिणे II ५ II
यातनानाशनायास्तु नमो मर्कटरूपिणे I
यक्षराक्षसशार्दूलसर्पवृश्चिक भीह्रते II ६ II
महाबलाय वीराय चिरंजीविन उद्धते I
हारिणे वज्रदेहाय चोल्लङ्घितमहाब्धये II ७ II
बलिनामग्रगण्याय नमो नः पाहि मारुते I
लाभदोSसि त्वमेवाशु हनुमन् राक्षसान्तक II ८ II
यशो जयं च मे देहि शत्रून् नाशय नाशय I
स्वाश्रितानामभयदं य एवं स्तौति मारुतिम् I
हानिः कुतो भवेत्तस्य सर्वत्र विजयी भवेत् II ९ II
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II इति श्री ह्रत्पुन्दरिकाधिष्ठितश्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य श्रीवासुदेवानंदसरस्वतीकृतं मन्त्रात्मकं श्रीमारुतिस्तोत्रं संपूर्णं II