क्यों आपके मुंह पर बार बार कालिख पोता जाता है नक्सली और जिहादी।
दो दिन पहले को घटना है जेएनयू में एक मार्ग का नाम वीर सावरकर मार्ग रखा गया।
रात के अंधेरे में जेएनयू के नक्सली और जिहादी आए और साइन बोर्ड पर कालिख पोत कर जिन्ना मार्ग लिख दिया।
जी हां , ये वही जिन्ना है जिसने कहा था मुस्लिम एक अजीम कोम है हिन्दुओं जैसे काफ़िर के साथ नहीं रह सकता है उसके बाद पाकिस्तान बना और लगभग 20 लाख लोग मारे गए ।
आज भी नक्सलियों और जिहादियों के दिल में जिन्ना जिंदा है, नेहरू जिंदा है क्योंकि आज फिर से ये देश बांटना चाहते है
पहले ये आज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उठी थी आज ये आवाज़ जेएनयू, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जामिया, से उठ रहीं है
ये जो कालिख आज सावरकर के साइन बोर्ड पर पोता गया है असल में ये कालिख भारत के मुंह पर , हर भारतीय के मुंह पर, हमारे और आपके मुंह कालिख पोता गया है
और आप यदि सोचते है कि इसका इलाज प्रशासनिक और कानूनी है तो भूल होगी ये एक भारत विरोधी सोच है इसका जबाव भारतीय समाज को देना पड़ेगा।
यदि भारतीय समाज इसके खिलाफ आज उठायेगा तो ये जिहादी नक्सली भागते हुए नजर आएंगे।
सावरकर लंबे समय तक काले पानी सजा काटता रहा देश के लिए सावरकर का पूरा परिवार ने अपना बलिदान दिया लेकिन सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह, लाल बहादुर शास्त्री जैसे अनेक देश भक्तो को जिस तरह से नेहरू ने राजनीतिक हत्या की उसी अफवाह पर आधारित रास्ते पर चल कर नेहरू और नेहरु खानदान ने सावरकर के चरित्र का हनन किया।
सावरकर का स्वाभिमान ओर सामर्थ्य और प्रतिष्ठा भारत का स्वाभिमान और प्रतिष्ठा है ।
अपने स्वाभिमान और प्रतिष्ठा की रक्षा कीजिए
अपनी आवाज़ जेएनयू के नक्सली और जिहादी के खिलाफ बुलंद कीजिए
ये जो कालिख आपके मुंह पर पोता जा रहा है
इसके खिलाफ वैचारिक युद्ध छेड़िए