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पूनम अहमद ठाणे में रहती हैं, फाइन आर्ट्स से एम् ए हैं। बचपन से पढ़ने का बहुत शौक था और आज भी बहुत पढ़ती हैं ,पढ़ते पढ़ते लिखना भी शुरू कर दिया, इनकी अब तक 550 कहानियां और 200 लेख देश की कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। । चार कथा संग्रह आ चुके हैं, पांचवें पर काम कर रही हैं।
इनकी आज की कहानी है, बालक , भोले भाले गंगू की कहानी जिसका दिल बहुत साफ़ है जो बस प्यार करना जानता है, निभाना जानता है।
चैताली थानवी , राजस्थान जोधपुर से हैं। फ्रीलान्स राइटर। अखबार और पत्रिकाओं के लिए लिखती हैं। ऑडियो मीडियम के लिए भी लिखा। यादों का इडियट बॉक्स विथ नीलेश मिश्रा शो के लिए कहानियां लिखी हैं। अब पॉकेट ऍफ़ एम् के लिए ऑडियो डेली सीरीज लिख रही हैं , हमारी छोटी बहू। उसके २०० एपिसोड्स पूरे कर चुकी हैं। इंग्लिश लिटरेचर से एम् ए हैं। आज ये कहानी सुना रही हैं ,मेरी पहली रचना। इसमें प्रेमचंद अपने छुटपन की बात कर रहे हैं। कैसे किताबें पढ़ कर उन्हें लेखक बनने का शौक हुआ। उसी शौक में वे अपने रिश्तेदार की बड़ी रोचक और रसिक कहानी लिखते हैं पर उनकी पहली रचना गुम हो जाती है। और उन्हें कभी नहीं मिलती।
एक बहुत ही शानदार कहानी से जिसका नाम है मुबारक बीमारी जिसे सुनकर यही लगेगा कि हर बीमारी श्राप नहीं होती , कुछ मुबारक बीमारी भी होती है जो जीवन के नए पहलू और जीने के नए अंदाज सिखा जाती है। आज की कहानी सुना रही हैं शिल्पा वर्मा। शिल्पा जी एक लेखक, एक्टर और कहानीकार हैं। ये थिएटर भी करती हैं और इन्होने टी वी एड्स में भी काम किया है।
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