आज तक ये रहस्य बना हुआ है कि भारत तालाबंदी के फैसले तक कैसे पहुंचा? किस एक्सपर्ट कमिटी ने ये सुझाव दिया और उसने 24 मार्च का ही समय क्यों चुना? जबकि उसके पहले दुनिया के कई देशों में तालाबंदी हो चुकी थी.
मध्यप्रदेश के एक पायलट ने कोरोना के समय जान जोखिम में डालकर एक हवाई जहाज उड़ाकर रेमडेसिविर पहुंचाने का प्रयास किया. हवाई जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया. मगर सरकार अब पायलट से ही हर्जाना वसूलने जा रही है.
प्रधानमंत्री ने दो साल के भीतर मची तबाही पर पलटवार करना शुरू कर दिया. उन तमाम सवालों को जो वाजिब थे और जायज़ थे, प्रधानमंत्री ने भारत को बदनाम करने की नीयत से जोड़ दिया. जब लोग आक्सीजन के बिना दम तोड़ रहे थे तब सवाल उठाना क्या ठीक नहीं था?
वित्त मंत्री ने मान लिया कि कोरोना के कारण नौकरी गई और दुनिया भर में गई, लेकिन उन्होंने भारत की जनता को यह नहीं बताया कि अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में जिनकी नौकरी गई उन्हें सरकारों ने सीधे खाते में लाखों रूपये भेजे. भारत में क्या कुछ ऐसा हुआ? देखें रवीश कुमार का प्राइम टाइम...
क्या ये मुमकिन है कि दिल्ली जैसे महंगे शहर में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ महीनों काम करते रहे और तीन-तीन महीने से वेतन ना मिले. ये संभव हो सकता है. अगर हर चौराहा अमृत लोटा नाम से एक योजना लॉन्च कर दी जाए तो अमृत काल में लोग नजदीक के चौराहे पर रखे अमृत लोटे से एक बूंद अमृत पी लेंगे और अमर हो जाएंगे. फिर पूर्वी एमसीडी के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को वेतन और भोजन की जरूरत नहीं पड़ेगी.
उत्तर प्रदेश में पहले चरण के चुनाव प्रचार में रोड शो का सिलसिला शुरू हो चुका है. मायावती से लेकर प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव से लेकर अमित शाह की सभाएं होने लगी हैं.
2019, 2020, 2021 के 15 अगस्त के दिन 100 करोड़ से अधिक के इंफ्रा प्रोजेक्ट की बात प्रधानमंत्री ने की. तो इस दौरान कुछ खर्च हुआ होगा, कुछ काम हुआ होगा, कुछ रोजगार पैदा हुआ होगा, उसका हिसाब कुछ तो इस बजट में या बाहर देना चाहिए था?
मथुरा में पिछले साल योगी आदित्यनाथ के भाषण के बाद भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान के आसपास दरेसी रोड पर सालों से चल रही मीट की दुकान को बंद कर दिया गया था. उसके कुछ दिन बाद ही 'श्रीनाथ जी' के नाम से डोसा की दुकान चलाने वाले मुस्लिम युवक को दुकान का नाम बदलने पर हिंदू संगठनों ने मजबूर कर दिया था.
भारत बनाम इंडिया की जगह अब इंडिया बनाम न्यू इंडिया ने ली है. आपको भांति भांति के इंडिया और भांति भांति के भारत का जिक्र मिलेगा, जिसके नाम पर कई तरह के सपने अलग-अलग काल खंड में दिखाए जाते रहे हैं. 2022 में न्यू इंडिया बनना था और नया आया है कि 2047 में न्यू इंडिया बनेगा.
अब भी हमारे देश के अधिकतर लोग मानसिक बीमारियों को गंभीर समस्याओं में नहीं गिनते हैं. छुपाने के लायक मानकर एक्सपर्ट से मिलने से झिझकते हैं. कोविड के दौर में मानसिक बीमारी भी खुद में एक गंभीर महामारी के रूप में उभरी है.