रामकुटी (Ramkuti)

रामकुटी (Ramkuti)

By Shrikant BorkarBusinessManagement
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रामकुटी (Ramkuti) episodes

  • तेरी बाट निहारे राधा
    जय गौर हरि

    तेरी बाट निहारे राधा
    साँवरिया आजा रे
    आजा साँवरिया आजा!

    सिर पर है गोरस की मटकी
    तेरे दरस हित पथ में अटकी
    आजा ओ चित चोर कन्हाई
    ठाड़ी तेरी गुजरिया।

    बार बार यमुना तट जावे
    आ वे मोहन दरस दिखा वे
    घर से यमुना
    यमुना से घर
    डोले बीच डगरिया।

    चढ़ी अटरिया काग उड़ावे
    प्रेम पुजारिन बलि बलि जावे
    खान पान पहरान भूल गई
    लागी तोसे नजरिया।

    दरस दीवानी सुधि बुधि खोके
    नयन गँवाये रही रो-रो के
    6 min
  • राधा रानी मत जयिओ दूर
    जय गौर हरि

    श्री राधा रानी मत जइयो तुम दूर
    मेरी महारानी मत जइयो तुम दूर

    तुम हो परम उदार लाडली कर दो क्ष्यमा कसूर
    श्री राधा रानी मत जइयो तुम दूर
    मेरी महारानी मत जइयो तुम दूर

    एक दर्श की आस स्वामिनी बरसाने में आई
    तेरी किरपा कोर से दिल में स्वामिनी बजने लगी शहनाई
    उसी किरपा की एक नज़र से करती रहो महसूस
    श्री राधा रानी मत जइयो तुम दूर
    मेरी महारानी मत जइयो तुम दूर

    तुम तो मेरी भोरी स्वामिनी में विषयन की मारी
    पतित उधारत हे द
    7 min
  • पीठ से पीठ मिलाये बैठे हैं. स्वर सेवा: किशोरी दासी (अंजुना जी)
    *जय गौर हरि*
    पीठ से पीठ लगाइ खड़े,
    वह बाँसुरी मन्द बजाय रहे हैं।
    सौभाग्य कहूँ उस धेनु के क्या,
    खुद श्याम जिसे सहलाय रहे हैँ।
    बछड़ा यदि कूद के दूर गयौ,
    पुचकार उसे बहलाय रहे हैं।
    गोविंद वही,बृजचंद्र वही,
    गोपाल वही कहलाय रहे हैं॥

    स्वर सेवा: *किशोरी दासी (अंजुना जी)*
    4 min
  • मैं बॅॉके की बॉंकी बन गयी स्वर सेवा: दासी अंजुना जी
    मैं बॅॉके की बॉंकी बन गयी स्वर सेवा: दासी अंजुना जी
    बाँके पी से.....
    मैं बाँके की बाँकी बन गई बाँका बन गया मेरा
    बड़े भाग्य से मिले रंगीले-बाँके रसिक बिहारी
    परम् सुहाग ..सौन्दर्य सींव वे-अद्भुत प्रेम पुजारी!
    श्यामल घन की नित्य चातकी.. उनसे सर्वस्व मेरा
    मैं बाँके की बाँकी बन गई बाँका बन गया मेरा 
    मेरी उनकी प्रीत पुरानीजन्म-जन्म की दासी
    उन्हीं में नित जीती बसती,फिर भी रहती प्यासी?
    प्यास उसी चिर संगी कीवह नित्य अभीप्सत मेरा!
    मैं बाँके की बाँकी बन गई बाँका बन गया मेरा 
    "अग-जग", "इह-पर",बलि हो गए-उन पर ही अनजाने
    मैं अनजान...सदा सब जानें-प्रीतम परम् सयाने
    अपनी मंगल कृपा कोर से कर्ष लिया सब मेरा!
    मैं बाँके की बाँकी बन गई बाँका बन गया मेरा
    5 min

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