सादरकर्ते: मानसी तांबेकर आणि दीपक कुलकर्णी
१) देवश्री अंभईकर धरणगावकर: श्रावण सरी / मोरपिस आत खुले / सावळा हरी -------------- मनात मन / अलगद गुंतले / बंधन तुटले ---------------थोडे रुसावे / कुणीतरी असावे / अश्रू पुसावे ----------------- झुरते राधा / रासक्रीडेत दंग / तिचा श्रीरंग__________________________________
२) आरुषी दाते: पिकले पान / वार्धक्याने आज / कष्टाचा साज ----------------------------------------------------------------
३) स्मिता दाते: मोहरे मन / गंधाळले क्षण / विसरले भान -------------------------------------------------------------------
४) अजिता पणशीकर: ओल्या मातीचा गंध / अलगद पावसाची नांदी / वादळ आनंदी ---------------------वारा संथ वाहे / उमटती तरंग / एक पतंग -------------------------------
५) मानसी तांबेकर: पालापाचोळा / आठवणी झाल्या गोळा / मन मोकळं---------------------------- इंद्रधनुष्य / नभ रंगांनी सजले / भाग्य खुलले ------------------------------ फुलाचा गंध / भ्रमराला लागला / मैत्रीचा छंद ---------------
६) प्राची देवधर: देहाची कुपी / चैतन्याचे अत्तर / आत्म स्वरूपी