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आत्म-विश्वास घमण्ड की श्रेणी में नहीं आता। यह आत्म सम्मान या स्वाभिमान की रक्षा का भाव होता है, जिससे मनुष्य के गुणों और कार्यक्षमताओं का विकास होता है। इन्हीं के आधार पर महत्वाकांक्षाओं की सफलता के लिए द्वार भी खुलते है। आत्म विश्वास में वृद्धि के लिए हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं ?... ...इन्हीं सब विषयों के परिप्रेक्ष्य में सुनिए, डॉ0 गिरीश त्रिपाठी की एक बहुत ही उपयुक्त, सार्थक एवं प्रेरणाप्रद वार्ता...!
सपनों का संसार चाहे कैसा भी हो, लेकिन यह तो स्पष्ट है कि सपनों से हमारा कोई न कोई गहरा नाता होता है, तभी तो हम इसकी दुनिया में प्रवेश करते हैं और थोड़े समय के लिए ही सही, इसे हम जी पाते हैं...! सपनों का यह संसार एक रहस्य का विषय है... अचरज का विषय है....खोज का विषय है…! प्रस्तुत है, सपनों की इसी रंग-बिरंगी दुनिया पर डॉ0 गिरीश त्रिपाठी की एक रोचक एवं शानदार वार्ता...!
प्राण वायु (आक्सीजन) के बिना मानव जीवन संभव ही नहीं है एवम् पेड़-पौधों और वनस्पतियों के बिना ऑक्सीजन...!
क्या बच्चों में चारित्रिक निर्माण की प्रक्रिया गर्भावस्था से ही शुरू होनी चाहिए... यदि हाँ तो कैसे ? प्रस्तुत है बच्चों के चरित्र निर्माण की प्रक्रिया पर डॉ0 गिरीश त्रिपाठी की एक सारगर्भित, ज्ञानवर्धक एवं अति-उपयोगी वार्ता...!
जीवन में चतुर्दिश विकास एवं प्रगति के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्या है? आइये सुनें डॉ0 गिरीश त्रिपाठी की यह लघु वार्ता और जानें एक सफल जीवन के पीछे की असली वजह... !
प्रेम, संवेदना व ममता की साक्षात मूर्ति, भगवान की सर्वश्रेष्ठ कृति, जिसकी महिमा व्यक्त करने की शक्ति किसी शब्द के बस में नहीं, आधुनिक पीढ़ी जिसके सम्मान में "मदर्स डे" मनाने लगी है.. ओ मां, मेरी प्यारी मां..!!
बच्चों को सीखना-सिखाना एक सूक्ष्म प्रक्रिया है जिसकी न्यूनतम समझ प्रत्येक माता-पिता एवं अभिभावक को अवश्य होनी चाहिए, किन्तु इसी समझ के अभाव में वे अपने बच्चों पर मेहनत तो बहुत करते हैं... फिर भी परिणाम अनुकूल नहीं आता। बच्चे जिद्दी, उद्दंड और बिगड़ैल हो जाते हैं या माता-पिता एवं अभिभावक का कहना नहीं मानते हैं। ऐसी नौबत न आने पाये, इसके लिए माता-पिता एवं अभिभावकों को जिन छोटी-छोटी बातों की मोटी-मोटी समझ रखनी चाहिए, उन्हीं सब बातों के इर्द-गिर्द 'बच्चों की श्रेष्ठतम परवरिश की प्रक्रिया' पर केन्द्रित एक सारगर्भित एवं उपयोगी वार्ता...!!
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