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ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से...! ईर्ष्या एक ऐसा विष है...एक ऐसा जहर है..., जो इंसान को भीतर ही भीतर घुन की भांति विनष्ट कर देता है, इससे कैसे बचा जाए..?
"प्रेम" एक ऐसी जगह है जिसमें स्वयं खोया तो जा सकता है किंतु उसे खोजा नहीं जा सकता। किसी ने प्रेम को "प्रेमैव ईशः" कहा तो किसी ने "Love is God" तो किसी ने कहा "प्रेम जीवन जीने का वास्तविक आधार" है ! क्या जीवन का सार प्रेम है या प्रेम जीवन के आनंदादि का स्रोत? ..प्रस्तुत है, जीवन के इन्हीं कुछ जटिल प्रश्नों के इर्द-गिर्द सरल समझ की तलाश करती एक लघु-वार्ता : "ढाई आखर प्रेम का" !!
परीक्षा का नाम आते ही हम सब के हाथ-पांव फूल जाते हैं। परीक्षा का तनाव और उसके परिणाम की चिंता कई बार हमें परीक्षा की तैयारी से लेकर परीक्षा के परिणाम तक को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर देता है। परीक्षा की चिंता एवम् तनाव के इस दुष्परिणाम से कुशलतापूर्वक कैसे बचें...! इन्ही सब बिंदुओं पर एक उपयोगी, सार्थक एवम् महत्वपूर्ण वार्ता..!!
"विचित्र-बात" है कि लोग समझते ही नहीं...पहले सुनिए इस लघु-कथा को...फिर आप खुद ही समझ जायेंगे उस "विचित्र-बात" को..!
किसी भी प्राणी, वस्तु या मिश्रण के गुणधर्म और उनके प्रभावों की शत-प्रतिशत व्याख्या की जा सकती है किन्तु इस धरती पर कुछ ऐसे जीव हैं जो पैदा होने से लेकर केवल समझदार होने तक अपनी आत्मस्थिति और मौलिकता में शुद्ध-बुद्ध रहते है.. आपके लिए उन्हें समझना बहुत दुष्कर कार्य होता है.. सुखमय और प्रसन्नमय जीवन जीने के लिए ऐसे कौन जीव हैं जिनसे दूर रहना चाहिए? प्रस्तुत है, इन्हीं सब मनोग्त्यात्मक झंझावातों और उनसे बचने के उपायों के इर्द गिर्द घूमती डॉ0 गिरीश त्रिपाठी की एक विशेष वार्ता..!!
जीवन का हर पल चुनौतियों से भरा हुआ है..जीवन में आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटे? क्या चुनौतियों से उत्पन्न कष्ट, परेशानी व समस्या रूपी अभिशाप को वरदान में परिवर्तित कर सकते हैं, यदि हां, तो कैसे? इसी सब के इर्द-गिर्द घूमती डॉ0 गिरीश त्रिपाठी की एक बहुत ही अभिप्रेरित मनोवैज्ञानिक वार्ता..!
किसी नए कार्य को सीखने के लिए...कार्य को पूरा करने के लिए...अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने के लिए...जो हमें बड़ी आसानी से हमारे जीवन के उद्देश्य की पूर्णता की ओर ले जाती है; वह है लगन..! आज के अंक में प्रस्तुत है, हमारे जीवन में "लगन की महत्ता" पर डॉ0 गिरीश त्रिपाठी की एक विशेष वार्ता...
एकाग्रता (Concentration) एक मानसिक साधना है, जिसके बलबूते मनुष्य अपने जीवन में वांछित सभी संभव सफलताएं प्राप्त कर सकता है, परन्तु उसका मन बहुत चंचल है, वह एकाग्र होना ही नहीं जानता..! प्रस्तुत है, "एकाग्रता" पर बहुत ही ज्ञानवर्धक एवम् सारगर्भित वार्ता...
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