I am sure you will love this poetry and emotions. This is all about life and self satisfaction. Written By:- Rj Prasun
Narration :- Rj Prasun
कई ख़्वाब अधूरे हैं, कुछ मंज़िलो तक पहुंचना अभी बाकी है।
चले हैं जो सफ़र मिलों का, कई पर्वत चढ़ने बाकी है।
बातें कुछ एक ही सच हुई है, कई संवादों को हकीकत में बदलना बाकी है।
उम्मीद कहां पूरी हुई अपनों की, अनेकों उम्मीदों पर खरा उतरना अभी बाकी है।
सवाल-जवाब, पूछना-बतलाना होता रहेगा, खुद के लिए तारिफ कमाना अभी बाकी है।
ज़रा आगे बढ़ गये हम अंध दौड़ में, नाराज़ यारों को मनाना बाकी है।
साथ चलने वाले हमेशा कहीं रह गये हैं पीछे, उन्हें फिर से साथ लाना बाकी है।
कई रातें गुज़र गई नींद खोजते-खोजते, मां की गोद में सुकुन से सोना अभी बाकी है।
सोचा की सब जी लिया, सब कर लिया पर पिता के जूते अभी भी पांव में आना बाकी है।
सुन नादान जो अब भी ये सोचता है तू कि जिंदगी यही है जो देख लिया तूने
तो अभी कई आसमान देखना बाकी है, तेरा तू बन जाना अभी बाकी है।
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Background Music Courtesy:- Bensound, Kinemaster