Sindhi Sanskriti with Tamana and Meena : Sindhi Samaj Podcast

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Sindhi Sanskriti with Tamana and Meena : Sindhi Samaj Podcast episodes

  • EP 29 : Lok Chavniyu (Proverbs)

    किसी बात को असरदार ढंग से और बंद शब्दो में बोलना एक कला है। मुहावरों तथा कहावतों से भाषा की सुंदरता बनी रहती है।ऐसे ही सिंधी भाषा में अनंत मुहावरे, कहावते कहे गए हैं, जो जीवन के अनुभवों से कहे गए हैं ।आज भी कहे गए वही मुहावरे और कहावते बेहतर जीवन की राह रोशन करते हैं।



    सिंधी संस्कृति पॉडकास्ट पर बने रहे । सिर्फ़ ऑडियो पिटारा पर।

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    6 min
  • EP 28 : Meeting with Expert - Prof. (Dr.) Hasso Dadlani

    सिंधी भाषा विकास के उपलक्ष में प्रोफेसर (डॉ.) हासो दादलाणी जी से प्रत्यक्ष मुलाकात में अति महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। आज, रोज़ी - रोटी देने वाली अन्य / अंग्रेजी भाषा के चलन के दौर में मातृभाषा सिंधी की क्या अहमियत है?, सहजता से बताया है। घर बैठे बैठे सिंधी सीखने के डिस्टेंस लर्निंग के कौन से माध्यम हैं , इसकी भी जानकारी दी है। मातृभाषा सिंधी सीखने और बोलने के लिए प्रेरित करते, बहुत ही सहज ढंग से उन्होंने अपनी मातृभाषा कैसे सीखें? क्यों सीखें? इसका महत्व समझाया है।अगर आप भी सिंधी सीखना बोलना चाहते हैं। तो जुड़े रहिए हमारे सिंधी संस्कृति पॉडकास्ट से। सिर्फ ऑडियो पिटारा पर ।

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    13 min
  • EP 27 : Sindhi Poem by Shri Dholan Rahi

    अजमेर निवासी , हिंद -सिंध के प्रतिष्ठित कवि, नाट्यकार, गायक और, साहित्यकार ढोलण राही जी ने पूछा है सिंधियों से आप सिंधी हो ? सिंधी हों ना! ,तो क्यों नही सिंधी में बात करते? जब पशु- पक्षी भी अपनी भाषा में बतियाते हैं तो हम तो इंसान है ! हमें भी अपनी ज़बान में बात करनी चाहिए। हम सिंधियों ने अपनी ज़मीन ,जायदाद अपना वतन तक छोड़ा, वह हमारी मजबूरी थी। भाषा को तो जिंदा रखना हमारा फ़र्ज है ना?!! सब छोड़ना मंजूर पर भाषा को कैसे भुलाएं। अभी भी वक्त है, आपस में अपनी मातृभाषा में बात करें। यही अपनी सोच को ढोलण राही जी ने इस कविता में प्रकट किए हैं।




    क्या आप भी घर में सिंधी में बात करते है।अगर हां तो कमेंट में जय झूलेलाल लिखें।




    और सुनते रहे। सिंधी संस्कृती पॉडकास्ट।




    सिंधी संस्कृति के बारे में और ज्यादा जानने के लिए जुड़े रहे हमारे पॉडकास्ट ऑडियो पिटारा से।

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    7 min
  • EP 26 : Thanks Giving

    हमें गर्व है आपके उत्साहपूर्ण सहयोग से, बिना ठहराव के, सिंधी संस्कृति पॉडकास्ट के 25 एपिसोड पूरे हुए। आप सभी के प्यार और समर्थन के बिना यह संभव नहीं था। हमें अपनी संस्कृति और भाषा-बोली पर गर्व है ।


    "सिंधी हैं , सिंधी में बात करेंगे, अपनी संस्कृति को आबाद करेंगे।"


    हमने संकल्प लिया है, हम अपनी मातृभाषा में बात करेंगे।


    सभी सुनने वालों के लिए उच्चतम गुणवत्ता सामग्री प्रदान करना हमारा संकल्प है। हम लगातार मजबूती से काम करेंगे ताकि हमारी सिंधी संस्कृति और भाषा अमर रहे ।


    आपके प्यार और समर्थन के लिए एक बार फिर से आपका हार्दिक आभार। आगे और भी अधिक खूबसूरत सफ़र जारी रहेगा।

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    7 min
  • EP 25 : Sindhi Little Star-Ridhi Bhojwani

    चइनि मुंदुंनि जो राग


    रिद्धि भोजवानी, अहमदाबाद, महात्मा गांधी हाई स्कूल में नवी कक्षा में पढ़ने वाली बालिका अपनी मधुर आवाज़ में चार ऋतुओ के बारे में गाकर आपको मंत्र मुक्त करने आई है। रिद्धि ने सिंधी ऋतु के नाम , उसके प्रभाव को, बेहतरीन उच्चारण से पेश किया है।


    आप जानते हैं शरद ऋतु में हम सिंधी खुराक माजून और कई सारी खाने की ताकत बक्श चीज़ें बनाते हैं। ऋतु के अनुसार खान-पान भी होना चाहिए।


    आप के घर में सिंधी खोराक, माजून बनता है। कमेन्ट में बताएं।




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    8 min
  • EP 24 : Talk with Sh. Mohan Himthani

    इस एपिसोड में हमनें मुलाकात की सुप्रसिद्द साहित्यकार और कवि - श्री मोहन हिमथानी जी से।


    "कैरियर के साथ मातृ भाषा को साथ ले चलो, घर और परिवार में सिंधी में बात करो" का संदेश दिया।


    सिंधी बोली के विकास के बारे में चर्चा करते हुए हिमथानी जी ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी अपने कैरियर के बारे में बहुत संवेदनशील है और अपनी भाषा से दूर हो रही है। एक इंसान के लिए उसकी भाषा ही उसकी पहचान होती है। 


    आज की स्थिति यह है कि हमारे भारत देश में धीरे-धीरे सिंधी भाषा लुप्त होती दिख रही है, इसका मुख्य कारण यह है कि लोग अपनी भाषा में बात नहीं करते। इससे आने वाली पीढ़ी अपनी भाषा से दूर हो रही है।


    अपनी सिंधी भाषा को बचाए रखने के लिए हमारे साथ आपके भी प्रयास की आवश्यकता है। आज की आवश्यकताओं के अनुसार भले ही विदेशी भाषा सीखी जाए परंतु अपने घर में सिंधी भाषा में बात की जाए।


    उम्मीद है आप अपने व्यवहार में सिंधी भाषा में को अपनाएंगे और अपनी भाषा से प्यार करेंगे।


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    26 min
  • EP 23 : Sindhi Little Star - Arya Khilnani

    आर्या खिलनानी, अहमदाबाद,के. जी. कक्षा की छात्रा, रचना स्कूल, अहमदाबाद से अपनी प्यारी सी आवाज़ में सुनाएंगी ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार को छोड़ , वह रे तारा गोल तारा ... रोशन तारा ...कविता और साथ साथ हाथी और चींटी की कहानी एक अलग अंदाज में। दादी माँ से सिंधी कहानी और कविता आर्या बड़े चाह से सिखती है। दादी माँ से वह सिंधी में बात करती है ।क्या आप भी घर में सिंधी में बात करते है।अगर हाँ तो कमेन्ट में जय झूलेलाल लिखें और सुनते रहे सिंधी संस्कृती पॉडकास्ट।


    सिंधी संस्कृति के बारे में और ज्यादा जानने के लिए जुड़े रहे हमारे पॉडकास्ट ऑडियो पिटारा से।

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    7 min
  • EP 22 : Shri Jhulelal Katha - Adhyay 5 (Man Joon Muradiyun Pooriyun Thiyan) - Part 2

    "लाल साईं की लीला बहुत निराली है। उन्हें जो भी सच्चे मन से, सच्चे दिल से याद करता है वह साकार रूप में प्रकट होते है, उसके मन की मुरादे पूरी करते हैं और फिर अंतर्ध्यान हो जाते है। कुछ ऐसा ही हुआ 'ममण' और उनकी धर्मपत्नी के साथ। उन्होंने लाल साईं से धन की जगह औलाद मांगी, साईं ने उनकी मुराद पूरी की। जो भी साफ़ मन और सच्चे भाव से भगवान झूलेलाल जी को ध्याएगा, मन की मुरादें पाएगा। जय झूलेलाल।

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    7 min
  • EP 21 : Shri Jhulelal Katha- Adhyay 5 (Man Joon Muradiyun Pooriyun Thiyan) - Part 1

    लाल साईं की लीला बहुत निराली है। उन्हें जो भी सच्चे मन से, सच्चे दिल से याद करता है वह साकार रूप में प्रकट होते है, उसके मन की मुरादे पूरी करते हैं और फिर अंतर्ध्यान हो जाते है। कुछ ऐसा ही हुआ 'ममण' और उनकी धर्मपत्नी के साथ। उन्होंने लाल साईं से धन की जगह औलाद मांगी, साईं ने उनकी मुराद पूरी की। जो भी साफ़ मन और सच्चे भाव से भगवान झूलेलाल जी को ध्याएगा, मन की मुरादें पाएगा। जय झूलेलाल।


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    7 min
  • EP 20 : Bhagwan Jhulelal Katha- Adhyay 4 (Dhan maal ji rikhya)

    कहा जाता है, संकट के वक्त ईष्ट देव का ध्यान करने से हमारी बीच मझदार में फंसी नैया को पार लगाने वह साकार स्वरूप में मदद करने आते है। एक बार व्यापारियों की नैया भी बीच भंवर में फंस गई, उन्होंने इष्ट देव का स्मरण किया, तभी भगवान झूलेलाल उनकी नैया को पार लगाने के लिए स्वयं प्रकट हुए। तब से उन्हे जिंदहपीर के नाम से पुकारा जाता है।

    यह प्रार्थना सुनी है आप ने "झूलण दरियाह शाह मुंहिंजी बेड़ी पार लगायजंह...." अगर सच्ची आस्था हो तो मुसीबत में सच्चे मन से याद करने पर भगवान किसी ना किसी रूप में स्वयं प्रकट होते हैं ।



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    7 min

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