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सिंधियों में कन्या को नियाणी कहा जाता है। एक कन्या को एक सौ ब्राह्मण के बराबर माना जाता है। इसलिए सिंधी कन्या को पैर छूने नही देते,कन्या के पैर छूते है।जैसे द्रोपदी की रक्षा के लिए श्री कृष्ण आए, वैसे ही लाल साई की लीला भी न्यारी है। एक कन्या की आस्था प्रार्थना को सुनना, स्वप्न में आना, भगवान झूलेलाल की लीलाएं! क्या आप जानना चाहते हैं। सुनते रहिए ऑडियो पिटारा पर सिंधी संस्कृति पॉडकास्ट
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सिंधियों के इष्ट देव "भगवान झूलेलाल" के जन्म की आकाश वाणी हुई-"जब जब धर्म की हानि हुई है; तब तब सत पुरुष की रक्षा करने के लिए भगवान ने साक्षात रूप में जन्म लेकर उनके धर्म की रक्षा की है"। ऐसे ही मिर्ख शाह के अत्याचार से बचाने, पाप को नाश करने के लिए भगवान झूलेलाल ने मानव अवतार लिया। सिंध में मिर्ख शाह द्वारा सिंधियों पर अत्याचार बढ़ने लगे। धर्म और भक्तों की रक्षा करने भगवान झूलेलाल प्रकट हुए।
झूलेलाल का जन्म कहां हुआ था? झूलेलाल भगवान ने किसके घर जन्म लिया? भगवान झूलेलाल की लीलाएं! चालीहा साहिब की क्या महानता है? क्या आप जानना चाहते हैं। सुनते रहिए ऑडियो पिटारा पर सिंधी संस्कृति पॉडकास्ट।
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सिंधियों के इष्ट देव "भगवान झूलेलाल" हैं। भगवान झूलेलाल को उडे॒रो लाल, लाल साईं, ज़िंदहपीर, घोड़े वारो, भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है। भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव चेटीचंड के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है, तब तब पाप को नाश करने के लिए भगवान मानव अवतार लेते हैं। कहते है सिंध में मिखृ शाह द्वारा सिंधियों पर साथ अत्याचार बढ़ने लगे तब धर्म और भक्तों की रक्षा करने के लिए भगवान झूलेलाल प्रकट हुए।
झूलेलाल का जन्म कहां हुआ था? झूलेलाल भगवान ने किसके घर जन्म लिया? भगवान झूलेलाल की लीलाएं। चालीहा साहिब की क्या महानता है? क्या आप जानना चाहते हैं। सुनते रहिए ऑडियो पिटारा पर सिंधी संस्कृति पॉडकास्ट।
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इस एपीसोड में आप सुनेंगे 'विनीता दलवाणी 'और 'रिद्धि भोजवाणी' की गुफ्तगू - स्कूल में पढ़ने वाली यह बालिकाएं, अपनी वेकेशन में प्रवास की आयोजन के लिए सिंधी में गुफ्तगू कर रही है। यह बहुत हर्ष की बात है कि आज की युवा पीढ़ी आपस में सिंधी में बात करते हैं। ऐसी युवा पीढ़ी की छोटी-छोटी सिंधी गुफ्तगू सिंधी भाषा के फिर से उद्भव और फैलाव का एक बीज समान है।
अपने विचार और सुझाव हमें लिखकर बताए। सुनते रहे इसी तरह मनोरंजक और ज्ञानवर्धक शो में हमारे साथ "सिंधी संस्कृती" ऑडियो पिटारा से।
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इस एपिसोड में आप सुनेंगे वक्तव्य युवा पीढ़ी की जुबानी " भगवान झूलेलाल कथा सिंधी में। 'महक अहूजा' की स्पष्ट, जोश भरी, आवाज़ आप को "झूलेलाल भगवान " की महिमा से अवगत कराएगी। हमें इस वक्तव्य को आपके साथ साझा करते हुए बहुत खुशी हो रही है । हमें गर्व है हमारे बच्चे अपने सिंधियो के इष्ट देव को जानते हैं और उनकी लीलाओं से अवगत है।
हमारा अब तक का सफर बहुत बेहतरीन रहा और आगे भी आप सभी के साथ से और भी मजेदार होगा। अपने विचार और सुझाव हमें लिखकर बताए। सुनते रहे इसी तरह मनोरंजक और ज्ञानवर्धक शो में हमारे साथ "सिंधी संस्कृती" ऑडियो पिटारा से।
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इस एपिसोड में आप सुनेंगे' डॉली ठक्कर 'और 'भूमि विधानी 'की गुफ्तगू।_नवमी कक्षा में पढ़ने वाली इन बालिकाओं ने "डॉक्टर चोइथराम गिदवाणी - स्वतंत्रता सेनानी के जीवन पर सिंधी भाषा में एक दूसरे से चर्चा की। हमें इस चर्चा को आपके साथ साझा करते हुए बहुत खुशी हो रही है । हमें गर्व है हमारे बच्चे अपने सिंधी समाज के स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहे हैं।
हमारा अब तक का सफर बहुत बेहतरीन रहा और आगे भी आप सभी के साथ से और भी मजेदार होगा। अपने विचार और सुझाव हमें लिखकर बताए। सुनते रहे इसी तरह मनोरंजक और ज्ञानवर्धक शो में हमारे साथ "सिंधी संस्कृती" ऑडियो पिटारा से।
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इस एपिसोड में हमने मुलाकात की हिंद- सिंध के बर्ख सिंधी- हिंदी-गुजराती -उर्दू के साहित्यकार डॉ. जेठो लालवाणी जी से।
सिंधी भाषा पर चर्चा की शुरुआत में उन्होंने बताया कि आज शहरों में जो भाषा बोली जाती है, उस पर दूसरी बोलियों का असर है। शहरों में सिंधी भाषा की मधुरता कहीं धुंधली हो गई है। आज भी गुजरात के कच्छ में ऐसी जगह है, जहां सिंधी भाषा की मिठास बरकरार है।
साथ ही चर्चा की गई कि सिंधी भाषा को रोजगार से कैसे जोड़ा जा सकता है। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि जब सिंधी लोग, सिंध से हिंदुस्तान आए तब सिंधी विद्यालयों में सिंधी पढ़ाई जाती थी, जिसके लिए सिंधी विद्वानों द्वारा किताबें बनाई जाती थी और सिंधी प्रेस में किताबें छपती थी, इसी तरह सिंधी भाषा रोजगार से जुड़ी हुई थी। उसके बाद 10 अप्रैल 1967 को सिंधी भाषा को जब संविधान में शामिल किया गया, तो सिंधी में और भी रोजगार जुड़े जैसे कि रेडियो, न्यूज़, दूरदर्शन आदि। आज भी सिंधी भाषा में स्कूल लेवल से लेकर कॉलेज तक सिंधी विषय में पढ़ाई के विकल्प हैं परंतु आज की नौजवान पीढ़ी अपनी भाषा को पढ़ना नहीं चाहती, इसलिए धीरे धीरे हर जगह से सिंधी स्कूल आदि को बंद किया जा रहा है।
बच्चों को घर में माहौल भी नहीं दिया जाता। भाषा एक संचार का माध्यम है, यदि सिंधी भाषा में संचार नहीं किया जाएगा तो भाषा विलुप्त होने की ऐसी परिस्थिति भी आ सकती है।
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पिछले एपिसोड में आपने डॉ. हूंदराज बलवाणी जी की मज़ेदार कहानी "फुंडियल पूरी" सुनी। कहानी सुनकर मज़ा आया होगा। कहानी में पूरी और गोलगप्पे का नाम सुनकर मुँह में पानी भी आया होगा। उम्मीद है आपने अपने बच्चों को भी कहानी सुनाई होगी। तो बच्चों ने आपसे कुछ सवाल भी किए होंगे। यही हमारा मकसद है कि बच्चे कहानी सुने और सवाल करें ताकि वह सिंधी भाषा के नए शब्द सीख सकें। अब आप इसी कहानी को अपने रोचक अंदाज में अपने बच्चों को सुनाए।
आज भी हम आपके लिए एक और मज़ेदार कहानी लेकर आए है "पोपटमल पोपट पकड़ियो"।शीर्षक सुनकर आपको सुनने की जिज्ञासा हो ही होगी तो आइए सुनते है -"पोपटमल पोपट पकड़ियो"।
यदि आप भी कोई मज़ेदार कहानी हमारे साथ साझा करना चाहते है तो जरूर कीजिए और सुनते रहिए "सिंधी संस्कृती" ऑडियो पिटारा से
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पिछले एपिसोड में, आपने बाल साहित्यकार डॉ. हूंदराज बलवाणी जी को सुना। उम्मीद है आपने उनकी सकारात्मक बातों से काफी कुछ सीखा होगा। उन्होंने आज की पीढ़ी को सिंधी भाषा से जोड़े रखने के सुझाव दिए । डॉ. बलवाणी हिन्द -सिंध के लोकप्रिय बाल साहित्यकार है, उन्होंने बच्चों के लिए बहुत कुछ लिखा है। उसी बाल साहित्य के खज़ाने में से, उन्होंने कुछ खज़ाना अपनी आवाज़ में हमारे साथ साझा किया है, जो कि आपके साथ शेयर करते हुए हमें बेहद खुशी हो रही है। कहानी का शीर्षक है - "फुंडियल पूरी" । जैसा कि शीर्षक ही इतना मनोरंजक है तो कहानी कितनी मज़ेदार होगी। तो आइए सुनते है - "फुंडियल पूरी" ।
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से |ws atur sho
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इस एपिसोड में हमनें मुलाकात की सिंधी के मशहूर बाल साहित्यकार और नाटककार डॉ. हूंदराज बलवाणी जी से। हमनें चर्चा की, कि बच्चों को किस तरह से गतिविधियों में शामिल तथा प्रोत्साहित किया जाए ताकि वह अपनी भाषा को जाने और उससे प्यार करें। साथ ही सिंधी भाषा को सीखकर गर्व के साथ उसे बोलचाल में लाएं। उन्होंने बहुत अच्छे और मूल्यवान सुझाव दिए जैसे हमें बच्चों को सीखाने के लिए उनकी माताओं के लिए वर्कशॉप्स अथवा कार्यक्रम करवाने की आव्यशकता है, जिसमें कहानी को पेश करने का तरीका सिखाया जाए ताकि बच्चे सिंधी कहानियाँ और किस्से सृजनात्मक ढंग से सुने और उससे सिंधी के नए शब्दों को एक नए क्रिएटिव अंदाज में सीखें। साथ ही घर में सिंधी में बात की जाए, उन्हें वह माहोल दिया जाए। बेशक स्कूल में बच्चे इंग्लिश मीडीअम में पढ़ाई करें पर घर में यदि उन्हे माहोल मिलेगा तो निश्चित रूप से वह अपनी मातृ भाषा से जुड़े रहेंगेअपने विचार और सुझाव हमें लिखकर बताए। सुनते रहे इसी तरह मनोरंजक और ज्ञानवर्धक शो में हमारे साथ "सिंधी संस्कृती" ऑडियो पिटारा से।।
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