सुसंग तारे,,कुसंग बोरे।कहावत पुरानी है,,,दवा नयी है,, माइंड मित्रवत हीलिंग करता है अगर मोहजीत हो,,,अगर माइंड हो,,अधीर,,खामी,, क्रोधी,, भ्रमित तो ये शरीर के कुसंग जैसा शत्रु होता है।अच्छा मित्र बनाने के लिए बैशाख शुक्ल एकादशी को संकल्प लें,, मेडीटेशन करें,,हम अक्रोधी,,अभरमित,, निर्मोही बन माइंड को मित्र बनायेगें