साठ के दशक के आखिर में राजेश खन्ना के साथ किशोर कुमार तेजी से उभरे। उस समय कुछ लोगों ने कहा कि मोहम्मद रफी का सूरज अब ढल चुका है। इन लोगों को शायद पता नहीं होगा कि सूरज कभी नहीं ढलता। किशोर कुमार के दौर में ही उन्होंने 'क्या हुआ तेरा वादा' (हम किसी से कम नहीं) के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता। उसी दौर में उनके 'तुम जो मिल गए हो', ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं, पर्दा है पर्दा, शिर्डी वाले सांईबाबा, आदमी मुसाफिर है, मेरा मन तेरा प्यासा, मैंने पूछा चांद से, जनम-जनम का साथ है हमारा तुम्हारा, 'गुलाबी आंखें' और 'दर्दे-दिल दर्दे-जिगर' जैसे सैकड़ों गानों ने लोगों को दीवाना बनाए रखा।