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नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो विश्वास हो,
टूटी हुई उम्मीदों की एकमात्र आस हो,
हर जन का तुम्हीं तो आधार हो,
नफ़रत की दुनिया में मात्र तुम्हीं प्यार हो,
उठो अपने अस्तित्व को संभालो,
केवल एक दिन ही नहीं,
हर दिन नारी दिवस बना लो....
हैलो दोस्तों GreyMatters podcast में आपका स्वागत है।
जी हां दोस्तों आज का हमारा यह podcast अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक विशेष प्रस्तुति है।
जैसा की हम सभी जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान तथा उपलब्धियों को पहचान दिलवाना है। क्या आपको पता है कि इस दिन को सर्वप्रथम 28 फरवरी 1909 में मनाया गया था। परंतु संयुक्त राष्ट्र अमेरिका द्वारा वर्ष 1975 में इस दिवस को 28 फरवरी की जगह 8 मार्च के दिन अंतर्राष्ट्रीय रुप से मनाये जाने का निर्णय लिया गया।
इस बात को नकारा नहीं जा सकता की आज के समाज में महिलाओं का योगदान पुरुषों के बराबर ही है, बल्कि वे पुरुषों से भी आगे निकल गयी हैं। शिक्षा के क्षेत्र से लेकर हेल्थ सेक्टर और ऐसे ही कई क्षेत्रों में जिसकी कल्पना पहले की सामाजिक स्थिति में करना नामुमकिन सा था उन सभी क्षेत्रों में महिलाओं का विशेष योगदान रहा है। इतना ही नहीं ज़माने के साथ आगे बढ़ती महिलाएं, न केवल घर संभाल रही हैं बल्कि घर के साथ अपने कार्य क्षेत्र में भी खुद को साबित कर रही हैं।
फिर चाहे वो लक्ष्मी बाई हो या इंदिरा गाँधी या फिर कल्पना चावला या फिर कोई और, हर युग में नारियाँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलीं हैं।
सब जानते हैं कभी घर तो कभी ऑफिस, 24x7 अपने परिवार और खुद से जुड़ें लोगों के लिए तैयार खड़ी रहने वाली महिलाओं का कोई भी दिन छुट्टी का नहीं होता।
यही ही नहीं ज़माने के साथ आगे बढ़ती महिलाएं, न केवल घर संभाल रही हैं बल्कि घर के साथ अपने कार्य क्षेत्र में भी खुद को साबित कर रही हैं।
आज जब हम women's day celebrate कर रहे हैं, तो हमने कभी ये सोचा है कि क्या सच में हम नारियों को वो सम्मान दिलवा पाए हैं जिसकी वो हकदार हैं?
देखा जाए तो बात बहुत सीधी है, महिलाएं फिर चाहे वो गृहणी हो या working, उनके लिए International Women's Day के रूप में कोई एक दिन नहीं होना चाहिए बल्कि हर दिन ही Women's Day होना चाहिए।
सोचिये, गौर कीजिए और अगर बात दिल तक उतरी हो तो महिलाओं के उत्थान और उनके बेहतर भविष्य के लिए अपना एक छोटा सा ही सही पर योगदान दीजिए।
क्योंकि वो कहते हैं न कि बूंद बूंद कर भरे तलाबा।
तो आइए इस women's day पर शुरुआत अपने ही घर से करें। अपनी माँ, बहन, पत्नी, बेटी को समझें।
GreyMatters wishes you a very Happy Women's Day!
Hello everyone! Welcome to the GreyMatters podcast.
In every episode, we try to come up with new and innovative ideas.
In this episode, we are sharing an address by Dr Navneet Anand, Director, GreyMatters Communications. He was speaking as a keynote speaker at the prestigious e4m Awards Ceremony on February 1, 2023. Sharing some examples from the campaigns by GreyMatters Communications, Dr Anand said that young professionals must work on fundamentals and innovation should be their guiding principle. He said intellectual capital are the wealth of organisations, and professionals must constantly strive to excel - to be counted.
Listen in 👉🏻
हैलो दोस्तों! GreyMatters पॉडकास्ट में आपका स्वागत है।
वसंत का महीना आ गया है, हवाएं अपना रूख बदल रही हैं। वातावरण नई सकारात्मक ऊर्जाओं से भरा हुआ है। नई कोपलें, पेड़ों में मंजरियाँ इन सब की खुशबू हवाओं में घुल रही है। और इस वसंत का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, वसंत पंचमी। जी हाँ दोस्तों आज के हमारे इस पॉडकास्ट का विषय है वसंत पंचमी।
आज इस पॉडकास्ट के माध्यम से हम वसंत पंचमी से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों पर चर्चा करेंगे।
वसंत पंचमी, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि यह त्योहार वसंत के पंचमी तिथि को मनाया जाता है। माघ मास के शुक्लपक्ष की इस की पंचमी तिथि को देवी सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही रूपों में अपना महत्व है। वैसे तो हर रंग की अपनी खासियत है, जो हमारे जीवन पर गहरा असर डालती है, परंतु इस दिन पीले रंग की खास एहमीयत है। हिन्दू धर्म में पीले रंग को शुभ माना गया है। पीला रंग शुद्ध एवं सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ साथ इस रंग को भारतीय परंपरा में शुभ का प्रतीक भी माना गया है। इसके अलावा फेंगशुई ने भी इसे आध्यात्मिक रंग अर्थात आत्मा या अध्यात्म से जोड़ने वाला रंग बताया है। फेंगशुई के सिद्धांत ऊर्जा पर आधारित हैं और इसके अनुसार पीला रंग सूर्य के प्रकाश का है यानी यह ऊष्मा शक्ति क प्रतीक है। इसलिए पीला रंग हमें तारतम्यता, संतुलन, पूर्णता और एकाग्रता प्रदान करता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मान्यता यह भी है कि यह रंग डिप्रेशन दूर करने में कारगर है। यह उत्साह बढ़ता है और दिमाग को सक्रिय करता है। जिसके फलस्वरूप दिमाग में उठाने वाली तरंगें खुशी का एहसास कराती हैं, जिससे आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
दोस्तों, ये तो था वसंत पंचमी का पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व। इसके अलावा वसंत पंचमी भारतीय इतिहास में भी अपना महत्व रखती है। दरअसल यह दिन शूरवीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है। इसी दिन इस योद्धा ने अपने सखा चंद बरदाई की सहायता से मोहम्मद गोरी को मौत के घाट उतारा था। जी हाँ, पृथ्वीराज चौहान, जो कि दिल्ली की गद्दी के आखिरी हिन्दू सम्राट थे, वे भारतीय इतिहास का एक गौरवशाली नाम हैं। मोहम्मद गोरी से पराजित होने के बाद उन्हें बंधक बना के अफगानिस्तान ले जाया गया और उनकी आंखें फोड़ दी गई। कुछ समय बाद चंद बरदाई जो कि पृथ्वीराज चौहान के सखा और कवि, “पृथ्वीराज रासो” के रचयिता थे, जब पृथ्वीराज से मिलने पहुंचे तो उन्होंने गोरी को चौहान के शब्दभेदी बाण चलाने वाले हुनर के बारे में बताया। जिसके फलस्वरूप गोरी ने पृथ्वीराज चौहान के हाथों में तीर-कमान थमा दिए। इसके पश्चात बरदाई ने चार पंक्तियाँ कहीं, जिसे सुनते ही पृथ्वीराज ने तीर चलाया जो कि सीधा मोहम्मद गोरी के सीने में जा धंसा और उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद चंद बरदाई और पृथ्वीराज चौहान ने भी एक दूसरे के पेट में छुरा घोंप कर आत्मबलिदान दे दिया।
तो दस्तों ये थी वसंत पंचमी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य और घटनाएं। आशा है आपको हमारा यह पॉडकास्ट जरूर पसंद आया होगा।
हम फिर मिलेंगे कुछ नएपन के साथ।
तब तक के लिए आप सब को नमस्कार।
हैलो दोस्तों GreyMatters podcast में आपका स्वागत है।
नया साल आने वाला है, और हम पुराने साल की विदाई के लिए तैयार बैठे हैं। तो बस बैठे बैठे एक ख्याल आया कि क्यों न एक बार गुज़रते हुए इस 2022 पर एक नज़र डालें। देखें कि इस साल हमने यानी (GreyMatters ने) क्या ऐसा किया या दिया या पाया, जिससे हम अपने आप में संतुष्ट हो सकें कि हाँ हमने कुछ हासिल किया है। इतना ही नहीं, बल्कि आने वाले साल 2023 को हम किस तरह देखते हैं।
तो आइए आज इस podcast के माध्यम से हम एक नज़र GreyMatters communications की उपलब्धियों पर डालें।
कोरोना के दौरान वर्ष की शुरुआत चाहे जैसी भी रही हो, परंतु धीरे धीरे हमारी लगातार कोशिश और मेहनत ने हमें उपलब्धियों की ओर अग्रसरित किया है। चाहे वो top 10 best PR Agencies की लिस्ट में अपनी जगह बनाना हो या E4M Events द्वारा अवार्ड मिलना हो। या फिर Air Products और The Nature Conservency (TNC) जैसी MNC's का bussiness partner बनना हो। NCPEDP के साथ काम कर के दिव्यांग जनों के achievements को हम साथ में celebrate करते हैं, बिहार में जल संसाधन विभाग के साथ हमकदम बन कर हमने उनके द्वारा बाढ़ से बचाव के लिए तथा सिंचाई के लिए उनके द्वारा किए गए कामों को cherish किया है। इसी क्रम में GreyMatters, बिहार सरकार के हर घर गंगाजल के अतिमहात्वाकांक्षी सपने एवं भागीरथी प्रयास को साकार करने में उनका हमकदम भी बना। यही नहीं, हम Bihar State Power Holding Company Ltd के साथ भी कदम से कदम मिला कर चलते रहे हैं। कभी बिहार के विद्युत उपभोक्ताओं तक हम BSPHCL की आवाज बन कर पहुंचे, तो कभी उपभोताओं के धन्यवाद और Thank you को celebrate किया। कभी बिजली दीदी और वोल्टेज भैया बन कर हमने उपभोक्ताओं को जागरूक किया तो कभी पॉडकास्ट के माध्यम से लोगों तक अपनी पहुंच बनाई। और तो और इस वर्ष जब BSPHCL ने अपनी स्थापना के दस वर्षों को 10 साल बेमिसाल के रूप में celebrate किया तो GreyMatters उनकी आवाज़ बना। इसके अलावा हमने political consultancy भी provide की है, जिसमें हमने election campaigns के साथ साथ कई और campaigns भी करवाए हैं। यूं तो, बीज के मामले में किसानों की पहली पसंद रही सिंजेन्टा कम्पनी के साथ हमारा जुड़ाव 10 वर्ष पुराना है, परंतु आज भी GreyMatters और Syngenta एक दूसरे के साथ वो पहली बार वाली feelings के साथ ही काम करते हैं। और सिंजेंटा के साथ 10 वर्षों के अपने गौरवशाली जुड़ाव पर हमें गर्व है। इन सब में हर दिन हमने कुछ नया करने की कोशिश की है, और हर बार हमने अपना एक benchmark स्थापित किया है।
वैसे देखा जाए तो यह साल GreyMatters के लिए विभिन्न पहलुओं पर अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इस साल हमें भारत के अग्रणी मीडिया ग्रुप नेटवर्क 18 के लिए भी काम करने का मौका मिला। इतना ही नहीं, हमारे निदेशक श्री नवनीत आनंद जी को इस वर्ष दो अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित भी किया गया; इसके साथ साथ उन्होंने अपने शैक्षणिक प्रयासों में उत्कृष्टता भी जारी रखी है।
GreyMatters की बात हो और फिर इसमें हमारे director श्री नवनीत आनंद जी की बात न हो तो बातें अधूरी रह जाएंगी। हालांकि मैं कोशिश करूँगी कि श्री आनंद जी की शक्सियत को चंद शब्दों में समेट सकूँ। श्री आनंद, एक ऐसी शक्सियत हैं जिहोंने अपने जीवन में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। चाहे वो शिक्षा हो या जॉब हो या फिर GreyMatters जैसी सफल कंपनी; हर क्षेत्र में उन्होंने खुद की पहचान बनाई है। Short में बोलूं तो श्री आनंद अपने आप में एक पूरी यूनिवर्सिटी हैं।
Coming back to the topic, यह साल GreyMatters Communications and Consulting Pvt. Ltd. के लिए बहुत सी उपलब्धियों से भरा रहा है। और आने वाले वर्ष 2023 में Team GreyMatters को इस बात का पूरा विश्वास है कि हम कामयाबी की नई उचाईयों को जरूर हासिल करेंगे। आने वाले साल में भी हम उसी लगन और उसी benchmark के साथ अपने काम को deliver करेंगे।
धन्यवाद!
GreyMatters Communications wishesh you a very Happy New Year 2023.
हेलो दोस्तों
ग्रे मैटर्स पोडकास्ट में आपका स्वागत है।
अर्जेंटीना! Fifa world Cup का विजेता बना। और लियोनेल मैसी ने दुनिया को मुठ्ठी में कर लिया। जिसका गवाह कतर का लुसैल स्टेडियम बना। अर्जेंटीना 4-2 से पेनाल्टी शूट आउट में जीता। आगामी वर्ष 2026 में कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको के शहरों में मिलने का वादे के साथ कतर में चल रहा fifa cup आखिर संपन्न हो गया। दिग्गज स्ट्राइकर लियोनेल मैसी का सन्यास से वापसी कर फीफा कप खेलना सफल रहा। महान मेसी ने अपने जीवन के पांचवें विश्व कप में न केवल अर्जेंटीना के सपने को ही पूरा किया बल्कि मारडोना के विश्व विजेता वाले सपने को पुन: साकार किया।
इसके इतर लियोनेल मैसी ने फ्रांस के विरूद्ध जीत के साथ अपने उस सपने को पूरा किया जो वह बचपन से देख रहे थे। अर्जेंटीना के दिग्गज खिलाड़ी माराडोना ने जब 1986 में आखिरी बार टीम टीम को विश्व विजेता बनाया था, तब एक बच्चे ने यही सपना अपने देश के लिए देखा था।
कतर फीफा वर्ल्ड कप में कई रिकॉड बनें। विश्व कप में 16 टीमों ने भाग लिया। 21 गोल में योगदान के साथ लियोन मैसी ने ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ी पेले को भी पीछे छोड़ दिया। उन्होंने अब तक पांच विश्व कप में 13 गोल दागे और 8 गोल का योगदान दिया है। वे इस कतर फीफा वर्ल्ड कप में भी सर्वाधिक सात गोल दागे।
पेले के क्लब में एमबापे लागातार दो विश्व कप फाइनल में गोल दागने वाले तीसरे खिलाड़ी बनकर दिग्गज पेले और वावा के क्लब में शामिल हुए। एमबापे ने तीन गोल दागकर गोल्डन बूट अपने नाम किया। 36 साल बाद अर्जेंटीना ने ट्रॉफी जीती। तीसरी बार विश्व कप में अर्जेंटीना ने फ्रांस को हराया। अर्जेंटीना ने पिछले 43 मैचों में से एक मैच हारा, 30 जीते और 12 मैच ड्रॉ रहा। कनाडा के अल्फोंसो डेविस ने क्रोशिया के खिलाफ दो मिनट का सबसे तेज गोल दागा। मैसी को सबसे ज्यादा चार बार मैन ऑफ मैच से जबकि एमबापे को तीन बार नवाजा गया। डेनमार्क,वेल्स,कतर,ट्यूनीशिया और बेलजियम ने एक- एक गोल किया। चार मैच में एकभी गोल नहीं गंवाने वाली मोरक्को एक मात्र टीम रही।
कतर विश्व कप में विजेता अर्जेंटीना टीम को 440 मिलियन डालर और उप विजेता फ्रांस टीम को 30 मिलियन डालर मिला।
फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल खेल का कुंभ लगाने वाली संस्था है। इसमें 32 देशों के पुरूष वर्ग की राष्ट्रीय टीम भाग लेती है। कतर फीफा कप में अंतिम में 16 टीमें पहुंची थी। यह कुंभ 118 सालों से लग रहा है। सन 1930 से फीफा विश्व कप प्रत्येक चार वर्षों पर आयोजन होता रहा है सिर्फ 1942 और 1946 में दूसरे विश्व युद्ध के समय विश्व कप का आयोजन नहीं हो सका था। अब तक फीफा कप में सबसे सफलतम टीम ब्राजील की रही है। 118 साल के इतिहास में पांच बार फीफा ट्रॉफी ब्राजील ने अपने नाम किया है।
फुटबॉल का यह महाकुंभ रोमांच की परकाष्ठा के साथ निर्विध्न समाप्त हो गया।
तो दोस्तों Fifa world cup पर GreyMatters communications की ओर से ये थी एक छोटी सी प्रस्तुति।
अगले पॉडकास्ट में आपसे फिर मुलाकात होगी, तब तक के लिए आप सभी को नमस्कार।
नवरात्रि गुजरी, दिवाली ने दस्तक दी। और अब दिवाली के जाते ही छठ की खुशबु हवाओं में फैल सी गई है। हवाओं में ठंडक का एहसास भी घुलने लगा है। घर की बहुत याद आ रही है।
हाँ, पता है... अब हम बच्चे नहीं रहे। नौकरी पेशे वाले matured लोग हैं। पर क्या feelings, भावनाएं कभी mature होती हैं? आप सभी को ये तो पता होगा ही कि दिल तो बच्चा है जी।
हाँ तो हम कहां थे? घर की बहुत याद आ रही है। दिवाली तो जैसे तैसे मना ली। पर अब घर जाना है। बिन कुछ कहे जो आंखें दरवाजे पर टकटकी लगाए हुए हैं, उन आँखों को खुशी के आँसू से नम करना है। माँ-पिताजी के चेहरे पर खिली हुई मुस्कुराहट को देखना है।
छठ के इस त्योहार में घर में जुटे सभी चाचा-चाची, मामा-मामी, मौसा-मौसी और भाई बहनों से मिलना है। किसी से प्यार भरे गुस्से के साथ कान खिंचवाना है, तो किसी से चंपी करवानी है।
छठ का बाजार भी तो सज गया होगा न। माँ के छठ के लिए दौरा और सूप खरीदना है। सूप में सजने वाले फलों को चुन-चुन कर उठाना है। अरता का पात, बद्धि, मिठाई और न जाने कितनी ही चीजें करनी हैं।
अरे हाँ! माँ को नहाय-खाय का गंगा स्नान भी तो करवाना है न। खरना का इंतजार तो हर किसी को होता है शायद। मिट्टी के चूल्हे में सजी आम की लकड़ी से निकलती धीमी आंच, और उस आंच पर पकती खरना की खीर। फिर पकती है रोटियाँ। वैसे एक बात बताऊँ, मेरी माँ व्रती के रूप में और खूबसूरत दिखती हैं। हम खरना कें बारे में बात कर रहे थे। खरना का प्रसाद इस ब्रह्मांड का सबसे स्वादिष्ट भोजन है। हो भी क्यों न, इस भोजन में अग्नि देव की आंच के साथ-साथ चंद्रमा की शीतलता जो मिली हुई है।
पूरा घर हंसी- ठिठोली और छठ के गीतों से गूंज रहा है। यही तो चाहिए था मुझे। यही तो miss कर रहा था न मेरा अंतर्मन। बहुत खुश हूँ मैं कि मैं भी इस माहौल का हिस्सा हूँ, कुछ छूटा नहीं मुझसे।
खैर आगे चलें! लीजिए साँझीया अरग का दिन भी आ गया। घर की सभी औरतें ठेकुआ और कसार बनाने में लगी हुई हैं। और सारे पुरुष! वो तो busy हैं घाट तैयार करने, घाट को सजाने, फलों और सूप को धोने आदि में।
लो शाम भी हो गई, वातावरण छठ के गीतों से गुंजायमान हो रहा है। ठेकुआ, कसार और धूप की भीनी भीनी खुशबू धरती पर ही स्वर्ग के होने का एहसास दे रही है।
कांच ही बांस के बहंगिया, बहँगी लचकत जाए,
उ जे लेहु न महादेव बहँगी, बहँगी घटे पहुंचाए।
डाला सज गया और घर के सभी पुरुष बहँगी लेकर घाट की तरफ बढ़ चुके हैं। माँ भी घाट पर पहुँच चुकी हैं, और पानी में उतरने की तैयारी कर रही हैं। घाट सज गया है, लाइटें लग चुकी हैं। सुपें सज गईं और अब माँ ढलते सूर्य को अर्घ्य देंगी। पूरी दुनिया उगते सूर्य को प्रणाम करती है, लेकिन ये छठ ही है, जिसमें हम डूबते सूर्य को पहले प्रणाम करते हैं और फिर उगते सूर्य को। कितना खूबसूरत और भक्तिमय माहौल है न। अद्वितीय! तभी तो छठ में दिल सिर्फ घर की ओर ही भागता है।
ढलते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही आज छठ का साँझीया अरग खत्म हुआ। कल की सुबह कितनी खुशनुमा होगी न।
3 बज चुके हैं। सब जल्दी-जल्दी घाट के लिए तैयार हो रहे हैं। 4 बजे तक घाट पर जो पहुंचना है। एक बार फिर घाट सज गया है और माँ पानी में उतरने के लिए तैयार हैं। हवाओं में मीठी सी ठंड है। पर छठ के उल्लास के आगे ठंड भी फीकी पड़ गई है। सूर्योदय होने को है और माँ अब उगते सूर्य को अर्घ्य दे रही हैं।
अरे! मुझे तो पता ही नहीं चला कि ये 4-5 दिन कैसे निकल गए। आज तो उषा अर्घ्य भी समाप्त हो गया।
एक बार फिर अपने दिल को समझाना होगा और वापस काम पर जाना होगा। अच्छा तो अब चलूँ!
फिर मिलने की उम्मीद लिए सबको मेरा प्रणाम।
GreyMatters Communications wishes you Happy Chhath
गांधी जयंती पर विशेष
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हेलो दोस्तों, GreyMatters पॉडकास्ट में आपका स्वागत है।
आज 2 अक्टूबर है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती।
यह दिन पूरी दुनिया में International Day of Non-Violence यानि अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। 2 अक्टूबर को 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' के रूप में मनाने के भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में 15 जून 2007 को मतदान हुआ था और महासभा ने इसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया था। प्रस्ताव में गांधी जी के अहिंसा के सिद्धांत की सार्वभौमिक प्रासंगिकता को स्वीकार करते हुए "शांति, सहिष्णुता, ज्ञान एवं अहिंसा पर आधारित संस्कृति" के निर्माण का आह्वान किया गया। साथ ही कहा गया कि 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' "शिक्षा एवं जन जागरूकता के माध्यम से अहिंसा के संदेश को प्रसारित करने" का सही अवसर होगा।
वर्तमान गुजरात राज्य के पोरबंदर जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में 2 अक्टूबर 1869 को जन्मे मोहनदास करमचंद गाँधी ने स्वतंत्रता और शांति की प्राप्ति के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका में हुए कई ऐतिहासिक आंदोलनों को नई दिशा प्रदान की। गांधी जी को यकीन था कि किसी को चोट पहुंचाए बिना, किसी तरह की हिंसा का सहारा लिये बिना भी, स्वतंत्रता और शांति के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान गांधी जी के नेतृत्व में हुए चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, नमक सत्याग्रह, भारत छोड़ो जैसे अनेक अहिंसक आंदोलनों ने अंग्रेजों को आखिर भारत से जाने पर मजबूर कर ही दिया। गांधी जी के अहिंसक आंदोलनों की सफलता से प्रेरित होकर दुनिया के कई देशों में लोगों ने अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए अहिंसक आंदोलन किये।
अहिंसा सिर्फ एक विचार नहीं, जीने का मार्ग है। किसी भी देश के विकास के लिए शांति और सद्भाव का माहौल अनिवार्य शर्त है। लेकिन, आज दुनिया के कई देशों में आतंकवादी, उग्रवादी एवं अलगाववादी शक्तियां मजबूती से अपना फन फैला रही हैं, नफरत के बीज बोकर देशों और समुदायों को विभाजित करने के प्रयास कर रही हैं। ऐसे वक्त में गांधी जी के सत्य एवं अहिंसा के संदेशों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। गांधी दर्शन में संपूर्ण मानवता को एकजुट करने की शक्ति है।
गांधी जी कहते थे, "यह पृथ्वी प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन इससे मनुष्य के लालच की पूर्ति नहीं की जा सकती।"
आज आधुनिकीकरण की होड़ में पूरी दुनिया में विज्ञान की चकाचौंध है, भौतिकता का बोलबाला है, अमीर बनने की अनैतिक प्रतिस्पर्धा है, और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। मानवतावादियों और नीति-निर्माताओं के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है। गांधी जी की चिंतन धारा और जीवन आदर्श हमें इस चिंता से भी पार पाने की राह दिखाते हैं। गांधी जी सिर्फ एक उपदेशक या दार्शनिक नहीं थे, उनका संपूर्ण जीवन उनके विचारों एवं आदर्शों का आईना था। आइए, गांधी मार्ग को जानें और उस पर चलने का संकल्प लें।
आज गांधी जयंती के अवसर पर, राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि स्वरूप, यह थी GreyMatters Communications की एक छोटी सी प्रस्तुति। अगले podcast में फिर मुलाकात होगी, तब तक के लिए आप सबको नमस्कार।
Welcome to the GreyMatters podcast.
Trust you are all having a great time.
I am here with an interesting case study for you.
GreyMatters is India’s leading communications agency offering services in public relations, political communications, public affairs & social media management among others.
Always a delight to share something new, and fresh for you. Today, September 24, 2022, we share with you a short case study that will reveal our passion to work. Sure, many of you have heard of one of India’s leading school book publishers Oswaal Books.
Agra-based Oswaal Books publishes help books for all the leading boards like CBSE, ISC & ICSE. Apart from this, they also publish books for some of the most important national level competitive exams.
Present for last 35 years, Oswaal Books is trusted by 3 Lakh Teachers, 50000 Schools, 13 million parents.
We have had a tiny role to play in the fantastic journey of Oswaal Books. Oswaal has always been keen to be on the forefront of informed discussions on education. As their communications partner, we had a task cut out to create a forum which would serve this purpose. Rather than taking a short-cut route to glory and getting a few news clips here and there, we brainstormed relentlessly for days together before we came up with an idea - and Bang On, we were there.
The Oswaal Books “Future of School Education” series was born - a robust platform that has seen all stakeholders in the school education ecosystem converge to discuss and deliberate on the challenges and way forward.
Starting in 2012, we have organised eight mega roundtable meet bringing education ministers, education secretaries, teachers, parents, principals, ed tech companies, NGOs working in education domain among others. Five education ministers have attended our programs.
This has immensely helped Oswaal Books establish a unique credibility for itself. It is not only a leading publisher today, but is also respected for steering credible discussion, and creating an enabling environment for mutual knowledge sharing among all stakeholders.
Thank you for listening.
Keep tuning in as We strive to bring you a new idea and story every time.
हैलो दोस्तों, GreyMatters पॉडकास्ट में आपका स्वागत है।
आज के इस पॉडकास्ट में हम आपसे बात करेंगे एक ऐसे adventure center के बारे में जिसके अंदर जटायु की लगभग 200 फीट लंबी, 150 फीट चौड़ी और 70 फीट ऊंची मूर्ति है, जो कि भारत की सबसे बड़ी मूर्तियों में से एक है।
जी हाँ दोस्तों हम बात कर रहे हैं केरल के कोवल्लम में स्थित चटयमंगलम जटायु एडवेंचर सेंटर के बारे में।
अगर आप प्रकृति और एडवेंचर प्रेमी है तो आपको यह adventure center जरूर अपनी ओर आकर्षित करेगा। इस सेंटर में बनी जटायु यानि गरुड़ की विशाल मूर्ति और रॉक थीम एडवेंचर प्रेमियों को अपनी तरफ खींचता है। लगभग 65 एकड़ में फैले इस सेंटर से आप पहाड़ों का मनोरम दृश्य भी देख सकते हैं। यहाँ paintball, valley crossing, bouldering, zip line , trekking , archery, rappelling, wall climbing , आदि जैसी अनेक गतिविधियां हैं।
इस एडवेंचर सेंटर के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि पौराणिक कथाओं में पक्षीराज जटायु लंकापति रावण द्वारा मारे जाने के बाद चटयमंगलम की ही एक पर्वत चोटी पर गिरे थे। जनकनंदनी माता सीता को बचाने के लिए पक्षीराज जटायु ने लंकापति रावण से वीरता पूर्वक युद्ध किया था लेकिन वृद्ध होने के कारण लंकापति रावण से परास्त हो गए। शायद आप सभी यह जानते होंगे कि परास्त होने के बावजूद भी पक्षीराज जटायु ने भगवान श्री राम को रावण द्वारा सीता का अपहरण किए जाने की सूचना दी और फिर उनकी गोद में चटयमंगलम पर्वत पर अपने प्राण त्याग दिए।
गोस्वामी तुलसी दास ने भी इसका जिक्र राम चरितमानस में किया है।
कर सरोज सिर परसेउ कृपासिंधु रघुबीरा।
निरखि राम छवि धाम बिगत भई सब पीरा।।
तब कह गीध बचन धरि धीरा।
सुनहु राम भँजन भव भीरा।।
नाथ दसानन यह गति कीन्ही।
तेहि खल जनकसुता हर लीन्ही।।
चटयमंगलम जटायु एडवेंचर सेंटर, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं मूर्तिकार श्री राजीव आंचल जी का सपना था। इस adventure center को बनाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि निर्माण से जुड़ी सभी समाग्रीयों को शीर्ष पर ले जाना बेहद मुश्किल काम था। परंतु तमाम मुश्किलों के बाद भी इस सेंटर के निर्माण को पूरा किया गया। जटायु की विशालकाय मूर्ति के निर्माण में लगभग सात साल लगे। इस मुर्ति के अंदर ऑडियो एवं विडियो based डिजिटल म्यूजियम स्थापित किया गया है जहां रामायण के बारे में बताया जाता है। इतना ही नहीं, पर्यटक मूर्ति के अंदर से समुद्र तल से लगभग 1000 फीट उपर के खूबसूरत नजारों का आनंद भी ले सकते हैं। पार्क में आर्युवेदिक गुफा रिसॉट भी है जहां entertainment से लेकर thrill और आराम, ये सब कर सकते हैं।
तो दोस्तों ये थी कोवल्लम स्थित चटयमंगलम जटायु एडवेंचर सेंटर से जुड़ी कुछ जानकारियाँ। हमें पूरी उम्मीद है कि यहाँ जाकर आप निराश नहीं होंगे।
आज के इस पॉडकास्ट में GreyMatters Communications की तरफ बस इतना ही। अगले पॉडकास्ट में हम फिर मिलेंगे कुछ ऐसी रोचक जानकारी के साथ।
तब तक के लिए सलाम- नमस्ते।
हेलो दोस्तों, GreyMatters पॉडकास्ट में आपका स्वागत है।
हम सब आजादी की 75वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहे हैं। आजादी हमारे लिए वह अनमोल धरोहर है, जिसके लिए भारत माता के न जाने कितने सपूतों ने हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। उनमें से बहुत से ऐसे unsung heroes भी थे, जिनकी कहानियां इतिहास के पन्नों में वह स्थान नहीं पा सकीं, जिसकी वो हकदार थीं।
आजादी के अमृत महोत्सव की वेला में unsung heroes पर आधारित विशेष पॉडकास्ट सीरीज में आपने श्री जीत सिंह, श्रीमती तारा द्विवेदी, श्री जगन्नाथपुरी और श्रीमती बिमलप्रतिभा देवी जी की कहानियां सुनीं। इसी सीरीज में आज हम आपको सुना रहे हैं एक और unsung hero पीर अली खान साहब की दास्तान।
पीर अली खान
बात 7 जुलाई 1857 की है। पटना के जिलाधिकारी कार्यालय के सामने बड़ी संख्या में लोग जमा थे। उनके चेहरे पर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आक्रोश साफ दिख रहा था। आक्रोश इसलिए, क्योंकि वहां क्रांतिकारी पीर अली खान को सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाने वाली थी।
फांसी से पहले कमिश्नर विलियम टेलर ने प्रस्ताव दिया था कि अगर पीर अली पटना के क्रांतिकारियों की पहचान और उनके छुपने की जगहों के बारे में बता दे, तो उसे छोड़ दिया जाएगा। पीर ने माफी की पेशकश सुनते ही उसे ठुकरा दिया था।
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के मुहम्मदपुर में जन्मे पीर अली खान जब सात साल के थे, तो पटना आ गये थे। उनकी परवरिश पटना के जमींदार नबाब मीर अब्दुल्ला ने की। बाद में पीर अली ने किताब की एक दुकान खोली, जो पटना के क्रांतिकारियों के लिए योजना बनाने का मिलन स्थल बन गयी। पीर अली ने अंग्रेजों के खिलाफ नियमित अभियान चलाया और धीरे-धीरे अपना एक छोटा संगठन खड़ा कर लिया।
3 जुलाई 1857 को अपनी दुकान पर जुटे करीब दो सौ सशस्त्र क्रांतिकारियों को साथ लेकर पीर अली ने पटना के प्रशासनिक भवन पर हमला कर दिया। हमले में कमिश्नर विलियम टेलर तो बच गया, लेकिन एक अंगरेज अधिकारी मारा गया और कुछ क्रांतिकारी भी शहीद हो गये।
अगले दिन 4 जुलाई, 1857 को पीर अली को कई साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। उनमें से ज्यादातर को एक दिन बाद ही बिना किसी सुनवाई के फांसी दे दी गई, लेकिन पीर अली को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया और जिरह की गई। फिर उन्हें 7 जुलाई को सार्वजनिक रूप से फांसी देने की घोषणा की गई।
फांसी के फंदे को चूमने से पहले पीर अली ने विलियम टेलर से कहा था, ‘जीवन में कुछ ऐसे अवसर आते हैं, जब जान बचाना अच्छा होता है। लेकिन, कुछ ऐसे अवसर भी आते हैं, जब जान दे देना ही अच्छा होता है। आज तुम मुझे फांसी पर लटका दोगे, लेकिन मेरे जाने के बाद तुम्हारे इरादों को ध्वस्त करने के लिए हजारों क्रांतिकारी जन्म लेंगे।’
पीर अली को पटना में जिस स्थान पर फांसी दी गई थी, उसे अब शहीद पीर अली खान पार्क के नाम से जाना जाता है। यह पार्क यहां आने वालों को आजादी के इस गुमनाम नायक की शहादत याद दिलाता रहा है और हमेशा दिलाता रहेगा।
तो दोस्तों GreyMatters Communications की तरफ से यह थी unsung heroes पर विशेष पॉडकास्ट सीरीज।
We wish you a very Happy Independence Day!
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