जननायक टंट्या भील
को हम श्रद्धांजलि देते हैं 4 दिम्नम्बर को बलिदान दिवस के रूप में मनाकर।
अपनी लोककल्याणकारी छवि के चलते
मामा के नाम से प्रसिद्ध क्रांतिकारी टंट्या
भील ने कई वर्षों तक ब्रिटिश शास्नन को
चैन नहीं लेने दिया और उनके लिए एक
चुनौती बने रहे। 1874 से अपनी गिरफ्तारी
तक इन्होंने अनेकों अवम्नरों पर सरकारी
रवजाने को लूटा और उसे जनसाधारण में
बांट दिया। जीवन के अंतिम समय में
अंग्रेजों द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर लिया
गया। 4 दिसम्बर, 1889 को अंग्रेजों द्वारा क्रांतिसूर्य
जननायक टंट्या भील को फांसी पर चढ़ा
दिया