आपकी दुआ से सब खैरियत है , देश इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है, हमारे देश को हमारी जरूरत आन पड़ी है और बाबू जी आपको ये जान कर खुशी होगी कि हमारी टुकड़ी भी कल कारगिल के लिए निकल रही है , आपके द्वारा भरे गए उसी जज्बे को लेकर कारगिल जा रहा हूं, जिसकी प्रेरणा से आज मैं यहाँ तक पहुँचा हूं, और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं दुश्मनों के दाँत खट्टे कर के ही लौटूंगा।
शायद आपको जब तक ये खत मिलेगा तब तक मैं हिमालय की सफेद वादियों में दुश्मनों से लोहा लेता रहूंगा। आप लोग अपना ख्याल रखियेगा, इसके बाद शायद वहाँ से खत न लिख पाउँ लेकिन मै जल्द ही वापस आऊंगा और फिर हम सब साथ मे माँ की मनौती पूरा करने (विकास की माँ ने सफल ट्रेनिंग के लिए मनौती मानी थी) "माँ विंध्यवासिनी" के दर्शन करने चलेंगे।
दादा जी , भैय्या-भाभी को प्रणाम कहना , और छुटकी से कहना मन लगाकर पढ़े, इस साल उसे बोर्ड देना है ।।