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प्रवचन-8b : शिविर के चौथे दिन के सायं काल के प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 20वें श्लोक तक की व्याख्या करी।
साधना पञ्चकं प्रवचन माला के दूसरे दिन स्वामी आत्मानन्दजी महाराज ने ग्रंथ में प्रवेश किया, और श्लोक पाठ के बाद पहले सूत्र पर विशद प्रकाश डाला। उन्होंने बताया की अध्यात्म यात्रा का श्रीगणेश वेदों के प्रति श्रद्धा उत्पन्न कर अपने मन और इंद्रियों को समन्वित एवं जागृत करने से होता है। इसके लिए नियमित रूप से वेद का पाठ एक सरल और सुन्दर तरीका है। यहाँ अधीयतां शब्द का अर्थ ज्ञान की सीधे प्राप्ति नहीं है, बल्कि केवल वेद पाठ मात्र है। अपनी परंपरा में वेद पाठ की बहुत महिमा है। यहाँ से ही प्रारंभ करें।
प्रवचन-14 (8a) : शिविर के चौथे दिन के सायं काल के प्रवचन के पहले भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 19वें श्लोक की आगे व्याख्या करी।
पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी से एक सुन्दर प्रेरक कहानी सुनें जिसका शीर्षक है - नज़रिआ।
साधना पञ्चकं प्रवचन माला का श्रीगणेश करते हुए वेदान्त आश्रम, इंदौर के प.पू. स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने "साधना पञ्चकं" नामक ग्रन्थ का अपनी अत्यंत प्रसन्न एवं गंभीर शैली में परिचय दिया। इसके अधिकारी, विषय, प्रयोजन एवं ग्रन्थ की भूमिका बताई। उन्होंने यह भी बताया की ‘साधना’ शब्द सापेक्ष्य होता है, अर्थात किसी भी साधक को सर्वप्रथम अपने साध्य की अति स्पष्टता एवं उसके प्रति अथाह प्रेम होना अनिवार्य होता है। साधन भी प्रामाणिक होना चाहिए, ज्यादातर साधक किसी साधन से आसक्त हो जाते हैं। यहाँ पर आचार्य ४० साधना के सोपान बताते हैं, एक से उचित लाभ लो फिर आगे बढ़ चलो। तब तक रुकना नहीं है जब तक परमात्मा से एक न हो जाएँ।
प्रवचन-13 (7b): शिविर के चौथे दिन के प्रातःकाल के प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 19वें श्लोक तक की व्याख्या करी।
प्रवचन-7a : इस, शिविर के तीसरे दिन के प्रातःकाल के प्रवचन के पहला भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 17वें श्लोक तक की व्याख्या करी।
प्रवचन-6b : इस, शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन के दूसरे भाग में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ‘दृग-दृश्य विवेक’ ग्रंथ के 15वें श्लोक की व्याख्या करी।
छठा प्रवचन-1 : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के १4वें श्लोक की व्याख्या करी।
पाँचवा प्रवचन-2 : शिविर के दूसरे दिन के दूसरे प्रवचन में, पू स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने दृग-दृश्य विवेक ग्रंथ के १३वें श्लोक की व्याख्या करी।
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