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मनुष्यों को विद्या के प्रति श्रद्धावान होना चाहिए क्योंकि विद्या ही मनुष्य का सच्चा उपकार करती है| विद्या को विद्वानों से प्राप्त किया जा सकता है| कैसे विद्वानों के सामने हमें बर्ताव करना चाहिए, यह इस मंत्र का विषय है|
ईश्वर ने अपनी प्राप्ति का साधन रहस्यमय नहीं रखा| ईश्वर को कैसे प्राप्त करते हैं, यह मंत्र आपको बताएगा|
सूर्य अपने प्रकाश से आपको जगत के पदार्थ सेवने के लिए उपलब्ध करवाता है| जो कार्य दिन में सिद्ध हो सकते हैं, वे रात में नहीं हो सकते| यही इस मंत्र का आशय है|
हर कार्य का कारण और प्रत्येक वस्तु का स्रोत होता है| विद्वान भी कहीं से विद्या लेते होंगे? और उस विद्या का भी कोई स्रोत होगा? कहीं ये सब आपस में जुड़े हुए तो नहीं? यह मंत्र आपको यही बताएगा|
वाणी केवल संचार माध्यम न होकर हम पर अनेकों उपकार कर सकती है|
पिछले मंत्र की ही भांति इस मंत्र में भी शुभ वाणी के लक्षणों का प्रकाश किया गया है|
शुभ वाणी के लक्षण| ऐसी आदर्श वाणी जो सबको बोलनी चाहिए|
विद्वानों की योग्यता पिछले मंत्रों में बताई गई| यह मंत्र उनके द्वारा यज्ञ करने की प्रेरणा देता है और यज्ञ का प्रकार भी बताता है|
संसार में विद्वान सरलता से प्राप्त नहीं होते| जो अपने पुरुषार्थ और चरित्र से विद्वान होते हैं उन्हें सदैव दूसरों की विद्या में उन्नति के लिए भी श्रम करना चाहिए|
सूर्य तथा वायु संसार को चलाए रखने वाल मुख्य स्तम्भ हैं| इस मंत्र में ईश्वर इन दोनों से अपने लिए उपकार लेने हेतु प्रेरित कर रहे हैं|
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#ved #god #spiritual
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