एक तरफ़ भगवान को पुकारो, दूसरी तरफ़ ‘कुछ भी याद नहीं करना’ बताया, तात्पर्य? (श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज के साथ भक्ति-प्रेम, लगन, व्याकुलता संबंधी प्रश्नोत्तर)
जैसे कन्या पति को अपना मानती है, ऐसे भगवान को अपना मान लो। पर कन्या के सामने तो पति है, हमारे सामने तो भगवान अदृश्य रूप में है, क्या करें? (श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज के साथ भक्ति-प्रेम, लगन, व्याकुलता संबंधी प्रश्नोत्तर)
परीक्षित की एक बार भागवत सुनने से मुक्ति हुई, हमने कई बार सुनी, क्या हमारी मुक्ति हो गयी? (श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज के साथ भक्ति-प्रेम, लगन, व्याकुलता संबंधी प्रश्नोत्तर)
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